शरीर को स्वस्थ रखता है तुलसी का प्रयोग

शरीर को स्वस्थ रखता है तुलसी का प्रयोग

अधिकांश हिन्दू घरों में तुलसी का पौधा देखने को मिलता है। हिंदू लोग तुलसी की पूजा करते हैं। कहा जाता है कि जहां तुलसी का वास होता है, वहां शांति व सुख-समृद्धि होती है। तुलसी का जितना धार्मिक दृष्टि से महत्त्व है, उतना ही चिकित्सा की दृष्टि से भी। तुलसी पर्यावरण में भी बहुत सहायक है। इससे वायुमंडल में पैदा होने वाली दूषित वायु को खत्म करने में सहायता मिलती है। शरीर को स्वस्थ रखने में व बीमारियों को दूर करने में इसका बहुत प्रभाव होता है। तुलसी के पत्ते रोगी की शारीरिक अवस्था के अनुसार 5 से 25 तक लेना उचित है।
– मलेरिया, टाइफाइड और ठंड से होने वाले बुखार में तुलसी के 10 पत्तों का रस शहद में मिलाकर तीन चार दिन तक सेवन करें।
ह्म्यदि पेट में कीड़े हो गए हों तो तुलसी के 5 या 10 पत्ते गुड़ में मिलाकर खाने चाहिएं। इससे पेट के कीड़े मर जाते हैं।
– खांसी या कफ में तुलसी व अदरक का रस थोड़े से शहद में मिलाकर लें, राहत मिलेगी।
– दाद होने पर तुलसी का रस निकाल कर दिन में दो-तीन बार लगाएं। इससे दाद पूर्णत: नष्ट हो जाएगा।
– सिरदर्द में तुलसी के पत्तों को चंदन की लकड़ी से घिस कर माथे पर लगाने से आराम मिलता है।
– तुलसी के पत्तों का रस शहद के साथ लेने से गुर्दे की पथरी समाप्त हो जाती है।
– किसी को यदि ज्यादा उल्टियां हो रही हों तो तुलसी के रस में पुदीना एवं सौंफ का अर्क मिलाकर पिलाने से उल्टियां आनी बंद हो जाती हैं।
– तुलसी के पत्तों को पीसकर लेप बना लें। इसे कील-मुंहासे, झाई वगैरह पर लगाने से लाभ होता है।
– कान में दर्द होने पर तुलसी के पत्तों का अर्क कान में डालें।
– आंख दुखने पर, रतौंधी होने पर काली तुलसी का रस रात को सोने से पहले आंख में दो-दो बूंद डालें।
– मुंह में छाले होने पर तुलसी की पत्तियां पानी में उबालकर उस पानी को पीने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।
– सांप के काटने पर तुलसी की जड़ को काटे हुए भाग पर पीस कर लगाना चाहिए व तुलसी के पत्ते ज्यादा से ज्यादा रोगी को खिलाने चाहिए।
– रोज सवेरे खाली पेट तुलसी के दो चार पत्ते खाने से शरीर बीमारियों से मुक्त व स्वस्थ और हृष्ट पुष्ट रहेगा।
– शैली माथुर

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