शराबखोरी और नाबालिग बच्चे

शराबखोरी और नाबालिग बच्चे

मैं आटो से उतरकर घर की तरफ चल पड़ा। रास्ते में अचानक मेरी नजर देशी शराब के ठेके पर पड़ी। मैं देखकर दंग रह गया। शराब खरीदने वाले लोगों में चार पांच 12-13 साल के लड़के भी थे। यह दृश्य सिर्फ मैंने नहीं देखा था। आप भी किसी न किसी शराब के ठेके पर उस तरह का दृश्य देख सकते हैं।
शराब पीने का प्रचलन काफी बढ़ गया है। विशेषत: छोटे काम करने वाले को तो आप काम से लौटते समय शराब खरीदते हुये देख सकते हैं। फैक्ट्री या कारखानों में काम करने वाले मजदूर तो रोज या पैसे मिलने वाले दिन तो जरूर शराब खरीदते हैं।
यों तो बाल मजदूरी पर कानूनी रोक है लेकिन यह सिर्फ कागजों तक सीमित है। आप कारखानों, फैक्टरी व दुकानों पर या अन्य जगह अठारह साल से कम उम्र के बच्चे को काम करते देख सकते हैं। दिन में ये लोग बड़े लोगों के साथ काम करते हैं। ये बड़ी उम्र के लोग जो शराब के शौकीन होते हैं, इन बच्चों को भी शराब चखा देते हैं। शराब का स्वाद चख लेने के बाद धीरे-धीरे इन बच्चों को शराब पीने की आदत पड़ जाती है।
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शराब से राज्य सरकारों को भारी राजस्व मिलता है। हर साल-लाखों-कराड़ों रूपये में शराब के ठेके उठते हैं।
शराब एक बुराई है। अनेक बीमारियों को जन्म देती है। शराब पीने वाले गरीब लोगों की जो मेहनत-मजदूरी करते हैं, संख्या ज्यादा होती है। रोज कमाने वाले अपनी पूरी कमाई या उसका बड़ा हिस्सा शराब पर खर्च कर देते हैं जिससे घर में भी क्लेश होता है। इस क्लेश और घरेलू झगड़े का नतीजा पत्नी के साथ गाली-गलौज या मारपीट के रूप में निकलता है। इससे परिवार का वातावरण विषाक्त होता है। आदमी अगर शराब पीता है तो उसका असर बच्चों पर भी पड़ता है। बच्चों को आर्थिक अभाव झेलना पड़ता है। उनका लालन पालन और शिक्षा सही नहीं हो पाती।
गुजरात में शराबबंदी है तो क्या वहां सरकार का काम नहीं चलता? सरकारें अगर अपने आर्थिक स्रोत को खोना नहीं चाहती तो कम से कम कुछ मापदंड तो तय कर सकती हैं जैसे:-
– शराब के ठेके या दुकानों के खुलने का समय नियत होना चाहिये।
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– सप्ताह में कम से कम एक दिन तथा सभी धर्मों के महत्वपूर्ण त्यौहारों पर शराब की दुकानें बंद रहनी चाहिये।
– 21 वर्ष से कम उम्र के लोगों को शराब की बिक्री नहीं की जानी चाहिए। नादान उम्र के बच्चों को शराब बेचने पर प्रतिबंध होना चाहिये। अगर कोई दुकानदार ऐसा करता है तो उसे भी दंड मिलना चाहिये।
– सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए।
ऐसे और भी बहुत से उपाय हो सकते हैं जिनसे कम से कम हम कुछ तो अंकुश लगा सकते हैं। बच्चे देश का भविष्य हैं। बच्चे अगर कम उम्र में ही शराब पीना सीख जायेंगे तो हमारे देश का भविष्य कैसा होगा? हम स्वयं यह बात सोच सकते हैं। हमें अपने देश के भविष्य को अच्छा बनाना है तो इसे तुरन्त रोकना होगा। यह हम सबका नैतिक कर्तव्य है।
– किशन लाल शर्मा

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