वॉटर थेरेपी वरदान है सेहत के लिए

वॉटर थेरेपी वरदान है सेहत के लिए

water therapyहमारे शरीर के लिए पानी कितना आवश्यक है यह सभी जानते हैं मगर कई बार जानते हुए भी हम कई बातों में लापरवाही बरतने लगते हैं। हैल्थ एक्सपर्ट की मानें तो एक आम व्यक्ति को दिन भर में कम से कम आठ दस गिलास पानी पीना चाहिए। हां, मौसम के अनुसार मात्रा कुछ कम ज्यादा भी हो सकती है। इसके अलावा व्यक्ति के खानपान और परिश्रम आदि पर भी पानी के इनटेक की मात्रा निर्भर करती है।
फायदे अनेक हैं – पानी से शरीर के टॉक्सिन बाहर निकलते हैं। ये टॉक्सिन हैल्थ हैजर्ड होते हैं। पानी पर्याप्त मात्र में पिया जाए तो युरिनरी ब्लैडर व किडनी
संक्र मण से बचे रहते हैं। यू.टी.आई की प्रॉब्लम होने पर भी पानी दवा का काम करता है।
त्वचा के लिये भी पानी फायदेमंद है। पानी के अभाव में त्वचा की नमी सूखने पर त्वचा रूखी लगने लगती है तथा उस पर झुर्रियां पडऩे लगती हैं। लचीलापन खत्म होने से त्वचा का सौंदर्य नष्ट होने लगता है।
हमारे भीतर एक सिस्टम होता है जो टाक्सिंस को रक्त प्रवाह में जाने से रोकता है। यह सिस्टम लिम्फेटिक सिस्टम कहलाता है। पानी की कमी होने पर ये सिस्टम ठीक से काम नहीं कर पाता। उससे शरीर में इम्युनिटी कम होने लगती है।
हमारे शरीर की मांसपेशियां व जोड़ भी पानी की कमी, ऐंठन व थकान महसूस करने लगते हैं। गला पानी के अभाव में जिस तरह सूखता है, उसे हर कोई कभी न कभी जरूर महसूस करता है। मुंह भी पानी के अभाव में सूखने लगता है। सेलिवा के लिये भी पानी चाहिए। सेलिवा दांतों में फंसे बैक्टीरिया व सडऩ को दूर करता है। पानी मुंह को दुर्गध से बचाता है। मुंह साफ रखता है।
पेट साफ रखने, कब्ज से बचने के लिये भी पानी अत्यंत उपयोगी है। आंखों के नीचे डार्क सर्कल तथा पफीनेस के लिए अन्य कारणों में पानी की कमी भी एक कारण है।
आजकल कोई कितना भी खाद्य पदार्थों की मिलावट से बचे, कहीं न कहीं, कभी न कभी कलर और कैमिकल युक्त फूड खाने में आ ही जाते हैं। इस तरह के तथा अन्य जंक फूड के टाक्सिंस को दूर करने में पानी मददगार साबित होता है। पानी के अभाव में ये अपना पूरा असर दिखाते हैं लिवर में जम जाते हैं। ऐसे में व्यक्ति की मन की एकाग्रता बाधित होती है।
अल्कोहल से उपजे साइड इफैक्ट्स भी पानी से दूर होते हैं। सिरदर्द से राहत मिलती है।
पानी खूब पीने से रक्त में ऑक्सीजन की कमी नहीं होने पाती वर्ना इसके अभाव में लैक्टिक एसिड बनने पर मांसपेशियों में ऐंठन महसूस हो सकती हैै।
वॉटर थेरेपी – सुबह उठकर ताम्रपात्र में रात भर रखा पानी पियें। यह पानी ज्यादा ठंडा न हो। दो तीन गिलास से शुरू कर थोड़ा बढ़ा सकते हैं।
पानी के बाद एकदम चाय कॉफी न पियें, न ही कुछ खायें। पानी धीरे-धीरे पियें। एक साथ जल्दी-जल्दी ढेर सारा पानी न पिये।
आर्थराइटिस और रयूमेटिज़्म में पानी पीना रोग के लिये मुफीद है।
इसके अलावा पानी से स्नान भी तरोताजा और रिलैक्स करता है।
तैरना एक अच्छा व्यायाम माना जाता है। पानी में नेचर क्योर की अद्भुुत क्षमता होती है। इससे कई रोगों को आक्र मण करने से रोका जा सकता है।
पानी कितना गरम, गुनगुना ठंडा हो, यह आपका शरीर स्वयं बता देता है।
फिर भी किसी व्याधि से पीडि़त होने पर डॉक्टर की राय से ही चलें।
अपने आप तो तब वॉटर थेरेपी भी नो….नो।
– उषा जैन ‘शीरीं’

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