विपरीत दिशा में काम करती चीन की बुद्धि..भारत ने भी कच्ची गोलियां नहीं खेली है

विपरीत दिशा में काम करती चीन की बुद्धि..भारत ने भी कच्ची गोलियां नहीं खेली है

pak-china-friendship सच मानिए, शैतान को शैतान मिल ही जाता है। सबसे बड़ा शैतान है- आई.एस.आई. जो इराक व सीरिया में  आतंक का नंगा खेल खेल ही रहा है, साथ ही पूरे विश्व में आतंकवाद फैला रहा है। अफगानी, तालिबान, पाकिस्तानी, आतंकवाद और चीनी साम्यवाद इन तीनों के साथ आई.एस.आई.एस.- इन सबों ने मिलकर भारत को ध्वस्त करने का और फिर  इस राष्ट्र को अपने मनोनुकूल बनाने का बहुत बड़ा मनसूबा बनाया है और उपरोक्त पृष्ठभूमि में आज का विषय है- एक आतंकी राष्ट्र चीन और हमारा संबंध।एक समय था, जब चीन और भारत टकराए, मगर एक-दूसरे के अधिकारों, एक-दूसरे की संप्रभुता व एक दूसरे की सीमाओं को लेकर और दोनों देशों ने सौहार्द, शान्ति व भाईचारे को लेकर बौद्ध धर्म आधारित पंचशील की नीतियों पर चलने का संकल्प लिया। भारत महात्मा बुद्ध की जन्म भूमि है,  इस आधार पर प्रगाढ़ता को स्थापित किया गया।लेकिन हिंसा का पर्याय बन गया चीन, जैसे-जैसे समय बीतता गया, वैसे-वैसे अपनी नीचता पर आने लगा। चीन मानकर चलता है कि नई-नई घटनाओं के घटने से, नई-नई परिस्थितियों के बनने से, नए-नए परिप्रेक्ष्य में पुराने वादे व पुराने दावे खुद ब खुद टूट जाते हैं। चीन इस बात को नजर अंदाज करता है कि दुनिया का कोई देश सदियों के बाद भी अपनी सीमाओं से हाथ धोना नहीं चाहता, किसी क्षेत्र पर आत्मनिर्णय नहीं करवाना चाहता, अपनी संप्रभुता खोना नहीं चाहता। अगर चीन इस बात से सहमत नहीं है तो उसे लोकतंत्रात्मक आन्दोलनकारियों को आत्मनिर्णय का अधिकार देना होगा, तिब्बत पर से अपना अधिकार खोना होगा। खुद गलती करने व दूसरों की जबर्दस्ती गलती उखाड़ऩे से कुछ मिलने वाला नहीं। और तो और आज के परिप्रेक्ष्य में, दुनिया के सभी देश व देशों की जनता व सत्ता इतनी ज्यादा सचेत व जागरूक हो गई है कि साम्राज्यवाद  को एक मिनट के लिए भी अपने आस-पास फटकने देना नहीं चाहती, न ही दूसरे देशों की ओर सामरिक अभियान ले जाना चाहती है। तो फिर पाकिस्तान व चीन को कोई बख्श देगा?चीन में यह बात घर कर गई है कि अगर पाकिस्तान आतंकवाद का सहारा लेकर भारत के सीमावर्ती, तदुपरान्त पूरे भारत पर अपना कब्जा जमाता चला जाएगा तो  उसका भला होगा?  और चीन ऐसा भी समझता है कि साम्राज्यवादी बनना कोई अपराध नहीं, बल्कि जिंदादिल राष्ट्र की महत्वाकांक्षा है। उसे भारत के क्षेत्रों पर कब्जा जमाना ही चाहिए। सच पूछा जाए तो अभी चीन में अधिनायक तंत्र (निरंकुश तंत्र) है, जो जुल्म ढाना चाहता है, और भारत उसके लिए सबसे सुलभ लगता है।चीन की यह मजबूरी है कि वह पाकिस्तान से दोस्ती का रिश्ता रखता है। अभी उसका समर्थन चाहता है। मगर बाद में- मकसद पूरा होने के बाद चीन पाकिस्तान को भी हथियाना चाहेगा और अपने नागरिकों को पाकिस्तान में बसाना चाहेगा। पाकिस्तान को भारत से निपटने के लिए फिलहाल  चीन के तात्कालिक सहयोग की जरूरत है।चीन एक बहुत बड़ा बौद्ध प्रधान राष्ट्र माना जाता रहा है। मगर यह  उसके लिए और विश्व के लिए यह दुर्भाग्यपूर्ण ही है कि वह एक हिंसावादी  राष्ट्र बन गया है। दुनिया में सबसे ज्यादा जानवर चीन में काटे और खाए जाते हैं। चीनी कुत्ते की अंतडिय़ों तक को खाने-पचाने में नहीं हिचकते। और ऐसा खूंखार देश साम्राज्यवाद व उससे पनपने वाले खून-खराबे से नहीं डरता।भारत के कारण पाकिस्तान पर शामत आई तो चीन आड़े आ गया और ब्रह्मपुत्र को लेकर भारत को सबक सिखाने के लिए आमादा हो गया। मगर भारत ने भी कच्ची गोलियां नहीं खेली है। चीन में बनी क्राकरी, पटाखे, खिलौने, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान- इन सबका का सबसे बड़ा बाजार चीन ने भारत में ही खोल रखा है और इनसे चीन को अच्छी खासी आमदनी मिलती है। अगर यह सहयोग टूट जाता है तो चीन की आर्थिक कमर भी टूट जाएगी। और भारतवासियों के पास इतना मनोबल जरूर है, वे अपने पर आ जाते हैं तो बड़े से बड़े त्याग कर बैठते हैं। यह उनके खून में घुला लक्षण है। चीन के खिलाफ भारत अपना आर्थिक युद्ध छेड़ता है तो चीन आधा पस्त हो ही जाएगा।साम्राज्य बढ़ाने को आतुर चीन को भी लद्दाख सियाचीन व उत्तर-पूर्वी सीमाओं पर करारा जवाब मिलना चाहिए। सर्जीकल स्ट्राइक की स्थिति यहां भी बनती है तो भारत को जवाब देना चाहिए। चीन पाकिस्तान की संगत में है तो बहुत संभव है कि दोनों संयुक्त सैन्य अभ्यास को भारत पर धावा बोलने का जरिया बना सकते हैं। भारत को इन संयुक्त सेना अभ्यासों पर सीधी नजर रखनी चाहिए। बौखलाए चीन की आन्तरिक स्थिति भी अच्छी नहीं है। वहां भयंकर जनसंख्या विस्फोट की स्थिति है, लोकतंत्र व साम्यवाद समर्थकों के बीच भयंकर संघर्ष है, फिर भी वह भारत के प्रति आक्रामक होता है तो यही कहा जाएगा- विनाशकाले विपरीत बुद्धि। कुछ कीड़ों के पंख मरने से पहले निकलते हैं। आप ये ख़बरें और ज्यादा पढना चाहते है तो दैनिक रॉयल unnamed
बुलेटिन की मोबाइलएप को डाउनलोड कीजिये….गूगल के प्लेस्टोर में जाकर
royal bulletin
टाइप करे और एप डाउनलोड करे..आप हमारी हिंदी न्यूज़ वेबसाइट
www.royalbulletin.com
और अंग्रेजी news वेबसाइट
www.royalbulletin.in
को भी लाइक करे..कृपया एप और साईट के बारे में info @royalbulletin.com पर अपने बहुमूल्य सुझाव भी दें… 

Share it
Share it
Share it
Top