वर्षा गीत

वर्षा गीत

pushplataबदरी के संग लिपट रहा है
सांवरिया घन छम-छम बारिश
शर्म से सूरज पलट रहा है
सांवरिया घन छम-छम बारिश
पत्ते-पत्ते, बूटे-बूटे नहा रहे हैं खेत, बाग, वन
गागरिया सी उलट रहा है सांवरिया घन छम-छम बारिश
चिंहुक उठा है चातक प्यासा
पकड़ रही बूदें अभिलाषा
जल धारा में सिमट रहा है सांवरिया घन छम-छम बारिश
धुला-धुला सा मन आँगन है
धुला-धुला तन छत दीवारें
घुला-घुला नभ चमक रहा है सांवरिया घन छम-छम बारिश
युगों-युगों से बदरी प्यासी सदियों से प्यासा बादल मन
प्यास बुझाता भटक रहा है सांवरिया घन छम-छम बारिश
मदिर-मदिर सी हवा बही है
मृदुल-मृदुल सा हुआ है मौसम
कौन दिशा में अटक रहा है सांवरिया घन छम-छम बारिश
छेड़-छेड़ कर जाता पानी हंस-हंस नाच रही पंखुरियाँ
अब कलियों में चटक रहा है सांवरिया घन छम-छम बारिश
डॉ. पुष्पलता

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