लोक अदालत में निपटाये गये कई पुराने वाद...न्यायिक विभाग का बोझ हुआ कम, राजस्व की भी प्राप्ति हुई

लोक अदालत में निपटाये गये कई पुराने वाद...न्यायिक विभाग का बोझ हुआ कम, राजस्व की भी प्राप्ति हुई

मुजफ्फरनगर। शनिवार को आयोजित हुई लोक अदालत में हजारों पुराने वादों का निपटारा किया गया। साथ ही न्यायिक विभाग में काम का बोझ भी कुछ हद तक कम हुआ। शनिवार को राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों पर लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिला न्यायिक विभाग परिसर में लोक अदालत का शुभारंभ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष जिला जज डा. गोकुलेश ने किया। इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के नोडल ओमवीर सिंह ने बताया कि लोक अदालत के आयोजन को सफल बनाने के लिए उपयुक्त वादों को चिह्नित करते हुए अधिकतम लंबित वादों का निस्तारण कराने के प्रयास पिछले कई महीनों से चल रहे थे, इसका नतीजा भी सामने आया है। लोक अदालत का मकसद अदालतों में कायम वादों का बोझ कम करना है। ऐसे वाद जो अभी न्यायालय के सामने नहीं आये हैं, उन्हें निस्तारित कराये जाने की कार्यवाही के प्रयास किये गये।


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प्राधिकरण के सचिव अंकुर शर्मा ने बताया कि पारस्परिक विवादों को सुलह समझौते के आधर पर निस्तारित करने के लिए राष्ट्रीय लोक अदालत वैकल्पिक मंच उपलब्ध् कराता है। उन्होंने बताया कि शनिवार को आयोजित हुई लोक अदालत में एनआई एक्ट की धरा 138 के अंतर्गत बैंक वसूली, पारिवारिक मामले, श्रम मामले, बिजली बिल, जल कर, शमनीय, मोटर दुर्घटना प्रतिकर, बीमा मामले, विद्युत अधिनियम के अंतर्गत सुलह योग्य वाद, भूमि अधिग्रहण संबंधी वाद, सेवा, वेतन संबंधी वाद, सेवानिवृत्ति लाभ संबंध्ति प्रकरण, राजस्व, राजस्व वाद आदि शामिल रहे। इसमें जहां अदालतों में वादों का बोझ कम हुआ, वहीं विभागों को राजस्व की प्राप्ति भी हुई है।

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