लघु कथा – “चेतना के स्वर “

लघु कथा – “चेतना के स्वर “

_20160529_221236“भाई सहाब आपकी बेटी हमें पसंद हैं
..आप तो बस ये रिश्ता पक्का ही समझिये
“!
नरेंद्र ने मेघा के पापा की तरफ़ देखते हुये कहा
…मेघा के पापा भी बहुत खुश हुये और उन्होने मेघा
की माँ की तरफ़ देखते हुये कहा …
“सुधा जल्दी से मिठाई की प्लेट तो
उठाकर
लाओ और सबका मुँह मीठा कराऊँ भई
….आखिर
आज वो शुभ घड़ी आ ही गई
….हमारी प्यारी बेटी मेघा के
लिये एक अच्छा वर मिल ही गया “!
सुधा ने मिठाई की प्लेट लाकर अपने पति
के हाथ में
पकड़ाते हुये कहा …..”लिजिये आप समधी
जी का मुँह मीठा कराईये तब तक मेघा और
राज़ भी एक दूसरे का मिठाई खिला देंगे
..तभी नरेंद्र ने मेघा के पापा की तरफ़
देखते हुये कहा ….
“भाई सहाब मैं चाहता हूँ के ….देखिये आपकी
बेटी तो हमें पसंद आ ही गई… तो क्यों ना
थोड़ा कुछ ज़रूरी बात भी हो
जाती ” !
हाँ ….हाँ भाई सहाब आप जैसा कहें वैसा
ही होगा
…”मेघा के पापा ने हँसते हुये कहा !
“आप शादी में कितना रुपया खर्च करना
चाहते हैं “?
“जी यही कोई दस लाख “! मेघा के पापा ने
कहा …
“लेकिन भाई सहाब दस लाख तो आजकल
दावत-पानी में
ही खर्च हो जाते हैं .?
देखिये आप दस लाख नगद और गाड़ी तो देंगे
ही थोड़ा जेवर और बता दीजिये कितना
सोचा
हैं आपने ?आपने अपनी बेटी और दामाद
के साथ साथ हमारी भी कुछ तो मान-
सम्मान की सोची ही
होगी ?”
“लेकिन भाई सहाब मेरा बजट मैने आपको
बता दिया हैं पहले
ही ….दस लाख से ऊपर मैं नहीँ खर्च
कर पाऊँगा ….” मेघा के पापा ने कहा !
नरेंद्र ने मेघा की तरफ़ देखते हुये कहा
…….”भाई
सहाब आपकी बेटी हमें पसंद हैं… बस
आप थोड़ा अपना बजट और बढा दें तो …..”
काफी देर तक इसी लेन -देन
की बात होती रही,नरेंद्र कम
से कम तीस लाख रुपया चाहते थे मगर मेघा
जानती थी उसके पापा का इतना बजट
नहीँ हैं… होगा भी कैसे…. दोनों बेटियों
की पढाई में ही अपनी
जीवन भर की कमाई जो खर्च कर बैठे हैं
….मेघा की छोटी बहन एम॰
बी .बी .एस कर रही हैं और
खुद मेघा इंजीनियर हैं …..अब कोई इन दहेज के
लालचियो से पूछेे कि जो पिता अपनी
पढी -लिखी बेटी दे रहा हैं और भला इन्हे क्या
चाहिये ……...मेघा जो बहुत देर से ये सब देख
रही
थी अचानक से खड़ी होकर नरेंद्र की
तरफ़ देखकर कहने लगी …
“अंकल आपने तो मुझे पसंद कर लिया और अपने
बेटे की
कीमत भी बता दी, लेकिन
अभी तक मेरी पसंद तो आपने
पूछी ही नहीँ …..”
मेघा की  बात सुनकर नरेंद्र का चेहरा देखने
लायक था…
.. मगर मेघा की बात
अभी ख़त्म नहीँ हुई थी… उसने फ़िर नरेंद्र और
बेटे की  तरफ़ देखते हुये कहा …..
…..और अंकल आपने जो कीमत अपने बेटे
की लगाई…. सच कहूँ तो ये इस काबिल हैं ही नहीँ,ये तो दस लाख क्या, दस हजार के
लायक
भी नहीँ…. क्योंकि जिसमे जुर्म के खिलाफ
आवाज़ उठाने की भी हिम्मत ना हो,
उसकी कोई इम्पोटेन्स, मेरी नज़र तो क्या
इस दुनिया में  भी कही नही
होगी ……जाएये और जहाँ आपके बेटे
की कीमत आपको मिल जायें, बेच
दीजिये ……..क्योंकि मुझे आपका बेटा पसंद
नहीँ हैं …….”
मेघा के पापा जो अपनी बेटी का ये रुप
पहली बार देख थे …..
नरेंद्र ने उनकी तरफ़ देखते हुये कहाँ …..”ये
शिक्षा दी हैं आपने अपनी बेटी को ?
… और आप अपनी बेटी को
यूँ अनाप -शनाप बोलते हुये देखकर भी चुपचाप
खड़े
हैं ….?”मेघा के पापा अवाक से अपनी बेटी को देख रहे थे..उनकी आँखे ख़ुशी से डबडबाई..और बोले-
“मुझे आज गर्व हो रहा हैं कि मेघा मेरी
बेटी हैं …..मुझे खुशी हैं कि
मेरी बेटी ने दहेज जैसी बुराई
का विरोध किया है ……..!!!!-सविता वर्मा “ग़ज़ल “
07417071585

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