राहुल-अखिलेश युवाओं को क्या दिशा देंगे…?

राहुल-अखिलेश युवाओं को क्या दिशा देंगे…?

विधानसभा चुनाव के समय सियासी दलों के समर्थन में उनके छात्र संगठन भी माहौल बनाने में जुट जाते हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) पर भी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पक्ष में ऐसे ही आरोप लगते रहे हैं। हालांकि एबीवीपी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुनील अम्बेकर इससे इत्तेफाक नहीं रखते। उनका कहना है कि विद्यार्थी परिषद जहां 09 जुलाई 1949 को ही अस्तित्व में आ गया था, वहीं जनसंघ 1951 में और भाजपा की स्थापना 1989 में हुई। इसलिए विद्यार्थी परिषद एक अलग संगठन है। राजधानी आये अम्बेकर ने बातचीत में प्रदेश के सियासी माहौल पर चर्चा की। उन्होंने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के यूथ फैक्टर का प्रदेश के युवाओं पर असर को लेकर पूछे सवाल पर कहा कि क्या राहुल को आप युवा मानेंगे? जिसकी दिशा-दशा ही निर्धरित नहीं है। भविष्य का सपना ही नहीं है। उन्होंने कहा कि जो दूसरा युवा परिवार में ही उलझा है, वह प्रदेश को क्या दिशा दे पायेगा? उन्होंने कहा कि युवा होने मात्र से ही कोई युवाओं के बारे में सोचे, यह जरूरी नहीं। अगर कोई परिपक्व और उम्र वाला राजनेता युवाओं के हित में सोचता है, तो नई पीढ़ी उसे ही पसन्द करती है। जब अम्बेकर से कहा गया कि क्या वह भाजपा के समर्थन में वोट देने का इशारा कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि युवा समझदार है, उसे पता है कि क्या करना है और मतदान सीक्रेट होता है। आने वाले समय में राजनीति में युवाओं का राज बढ़ेगा। केन्द्र में नरेन्द्र मोदी सरकार बनने के बाद एबीवीपी को छात्र हित के मुद्दे सुलझाने में मदद मिलने के सवाल पर अम्बेकर ने कहा कि हां हमें फायदा मिल रहा है, लेकिन हमारा संघर्ष भी जारी है। उन्होंने कहा कि हमने स्कॉलरशिप पर आन्दोलन किया और सफल हुए। शोध के मुद्दे को उठाया।
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इसके अलावा हर जिले में छात्राओं के लिए छात्रावास की मांग की। खेलों को प्रोत्साहन देने के साथ स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी जैसे कई मुद्दों पर हम लगातार दबाव बना रहे हैं। एबीवीपी से भाजपा की नजदीकी पर राष्ट्रीय संगठन मंत्री ने कहा कि दरअसल दूसरे दलों के पास मिट्टी से जुड़ी राजनीति का वक्त नहीं है। वह या तो विदेशों से या फिर बिना किसी विचारधारा के संचालित हो रहे हैं। एक पार्टी हमारे मुद्दों को तरजीह देती है, इसलिए समाज में एबीवीपी को उसके छात्र संगठन के तौर पर देखा जाता है। उन्होंने कहा कि जबकि हम दूसरे दलों को भी प्रभावित करने में जुटे हैं। एक दिन वह सभी हमारी बातों से सहमत होंगे। हिन्दुस्थान समाचार ने जब उनसे कहा कि ऐसे तो दूसरे दलों के छात्र संगठन समाप्त हो जायेंगे, तो अम्बेकर ने कहा कि जब राजनैतिक दल ही हमारी बातों को समझेंगे तो उनके संगठन कैसे इससे किनारा कर पायेंगे। डेमोक्रेसी वाले देश में युवा राजनीति नहीं करें, कैसे सम्भव है विश्वविद्यालयों में कई जगह अभी भी छात्रसंघ चुनाव नहीं होने पर राष्ट्रीय संगठन मंत्री ने कहा कि हमारा संघर्ष जारी है। हम इसमें सुधार भी चाहते हैं। दरअसल व्यवस्था के अभाव में छात्र राजनीति गलत दिशा में चली जाती है। इसमें हिंसा और बाहुबल का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। इसलिए शर्ते जरूरी हैं। अच्छे माहौल में छात्रसंघ चुनाव होने चाहिए। फिर जिस देश में डेमोक्रेसी है, तो वहां के युवा राजनीति नहीं करें, ऐसा कैसे हो सकता है।
-सुनील अम्बेकर

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