रखे मर्यादा का ध्यान…..नाजुक है रिश्ता देवर- भाभी का…!

रखे मर्यादा का ध्यान…..नाजुक है रिश्ता देवर- भाभी का…!

मां के बाद भाभी संयुक्त परिवार की दूसरी मुख्य सदस्या है। भाभी परिवार की वह नाजुक कड़ी है जिसकी मजबूती भाभी के देवर के प्रति दृष्टिकोण के मापदण्ड तथा भाभी के प्रति देवर के आदर भाव पर निर्भर करती है।
बदलते परिवेश में जब भाभी का स्नेह व देवर का आदर भाव दैहिक भावना से प्रेरित होने लगे तो यह चूक संयुक्त परिवार की दहलीज में चिंगारी के रूप में प्रवेश कर कुटुम्ब की प्रतिष्ठा, मान-मर्यादा को नेस्तनाबूद करते हुए इस पवित्र बंधन के सफेद दामन पर कलंक के काले धब्बों की अमिट छाप छोड़ जाती है। ऐसे में यदि निम्न तथ्यों के अनुसार स्वयं को ढालने का प्रयास करें तो निस्संदेह परिवार में देवर-भाभी के पवित्र बंधन में ग्रहण लगने से पूर्व ही बचा जा सकता है। वहीं आप समाज में आदर्शवादी भाभी अथवा देवर साबित हो सकते हैं।
भाभी देवर के लिये एक सच्चे मित्र की भूमिका भी अदा करती है। देवर के किसी भी भटकाव की स्थिति में होने पर उसे संयम से, सूझबूझ से दिग्भ्रमित होने से बचायें।
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– परिवार के सम्मानीय या रिश्तेदारों व आगन्तुकों के समक्ष अशोभनीय हंसी-व समाज में देवर भाभी के संबंध चर्चा का विषय बन सकते हैं। अत: ऐसी स्थिति में संयत रहें।
– यदि देवर या दूर का रिश्तेदार सीमाओं से बढ़कर रसिक मिजाज है तो यथासंभव उससे दूर रहें।
– देवर मां तुल्य भाभी से सीमित दायरों को लांघे बिना हंसी-मजाक की बात करे। इससे आप मोहल्ले में शंकित नजरों से नहीं देखे जायेंगे अपितु किसी भटकाव से भी निजात मिलेगी।
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– बच्चों की बातों को लेकर दूरियां न बढ़ायें। हल्की बोलचाल की स्थिति में एक पक्ष द्वारा क्षमायाचना की औपचारिकता से संबंध मधुर बने रहेंगे।
– लेन देने के मामलों में औपचारिकता से दूर रहें तथा संकीर्णपतावश कुण्ठित न हों। इसमें देवरानी की भूमिका अहम होती है।
– भैया-भाभी की दु:ख तकलीफ में अपने कर्तव्यों का निवर्हन तत्परता से करें। बीमारी के हालत में भैया भाभी की सेवा में शर्म या संकोच महसूस न करें।
– नीरज खत्री ‘एकांत’

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