यूपी चुनाव: जय श्रीराम और तीन तलाक पर राजनीति..!

यूपी चुनाव: जय श्रीराम और तीन तलाक पर राजनीति..!

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की सियासी हलचलें तेज होती जा रही हैं। राजनीतिक दलों के चुनावी मुद्दे भी बदलने लगे हैं। प्रदेश की राजनीति जमीनी मुद्दों को छोड़ श्रीराम मन्दिर और तीन तलाक व लव जिहाद पर लौट रही है। भाजपा का शीर्ष नेतृत्व ताबड़तोड़ रैलियां कर रहा है और ‘सबका साथ सबका विकास’ का नारा दे रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी प्रदेश में ध्वस्त कानून-व्यवस्था, गुंडाराज और भ्रष्टाचार को मुद्दा बना रहे हैं तो दूसरी और पार्टी के शीर्ष नेता ऐसी बातों को तूल दे रहे हैं जिनसे वोटों के ध्रुवीकरण में सफलता मिले। भाजपा नेता विनय कटियार का कहना है कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर बनने के लिए यूपी में भाजपा का बहुमत जरूरी है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी कहा है कि श्रीराम मंदिर कब-कैसे बनेगा यह तो समय बताएगा लेकिन अगर श्रीराम मंदिर भारत में नहीं बनेगा, अयोध्या में नहींं बनेगा तो क्या पाकिस्तान में बनेगा? वहीं दूसरी तरफ भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ इन चुनावों में कैराना से हिन्दुओं के पलायन और लव जिहाद को मुख्य मुद्दा बना रहे हैं। इससे पश्चिमी यूपी में ध्रुवीकरण की राजनीति भी तेज हो गई है। भाजपा तीन तलाक, राम मंदिर और बूचड़खानों के मुद्दों को खुलकर रैलियों और सभाओं में उठा रही है। भाजपा के फायरब्रैंड नेता पूरी ताकत के साथ पश्चिमी यूपी में पार्टी के लिए प्रचार में जुटे हैं। सरधना से भाजपा विधायक संगीत सिंह सोम और थाना भवन से विधायक सुरेश राणा ने इस क्षेत्र में पार्टी के प्रचार की कमान थाम रखी है। इन नेताओं के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और स्मृति इरानी, ओम माथुर हिन्दुत्व और तीन तलाक से जुड़े मुद्दों को हवा दे रहे हैं।
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भाजपा उत्तर प्रदेश प्रभारी ओम माथुर तीन तलाक के मुद्दे को उठाते हुए इसको ठीक करने की बात कह रहे है। रविशंकर प्रसाद ने कहा, हम आस्था का सम्मान करते हैं, लेकिन उपासना पद्घति और कुप्रथा साथ-साथ नहीं चल सकतीं। केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति का कहना है कि महिलाओं को ‘पैर की जूती’ समझने वाले लोग ही तीन तलाक के पक्ष में हैं जबकि भाजपा ऐसी अमानवीय क्रूर परंपराओं के खिलाफ है। रविशंकर प्रसाद और स्मृति इरानी तीन तलाक और बूचड़खानों को बंद करने के मुद्दे को अपनी सभाओं में लगातार उठा रहे हैं। वहीं, पार्टी के एक अन्य नेता और केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के स्टेटस के मुद्दे को उठा रहे हैं। प्रसाद और इरानी ने तीन तलाक के मुद्दे पर अखिलेश यादव और डिंपल यादव के साथ-साथ कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका गांधी को भी घेरने की कोशिश की। दोनों नेताओं ने कांग्रेस, एसपी और बीएसपी के शीर्ष नेताओं से तीन तलाक के मुद्दे पर उनकी राय जाननी चाही है। इन विधानसभा चुनावों में पढ़े-लिखे मुस्लिम वर्ग और विशेषकर मुस्लिम महिलाओं को अपनी ओर खींचने के उद्देश्य से तीन तलाक जैसे मुद्दे को भी भुनाने की पूरी कोशिश करने में भाजपा नेता लगे हुए हैं।
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 2013 में हुए मुजफ्फरनगर दंगों के बाद इस क्षेत्र के राजनीतिक ताने-बाने में बड़ा बदलाव हुआ है। इन दंगों में करीब 60 लोगों की जान गई थी और 50 हजार लोग बेघर हो गए थे और बड़ी संख्या में लोग पलायन भी कर गए। लोकसभा चुनाव में यहां धर्म के आधार पर वोट का बंटवारा हुआ था। उल्लेखनीय है कि इस बार विधानसभा चुनावों में अगर भाजपा उत्तर प्रदेश में जीत नहीं पाती है तो यह हार भाजपा से ज्यादा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मानी जाएगी और अगर जीतती है तो भी इसका श्रेय नरेंद्र मोदी को ही जाएगा। ऐसे में उत्तर प्रदेश में जीत सुनिश्चित करने के लिए भाजपा कोई कसर नही छोड़ना चाहती है। ये चुनावी नतीजे सिर्फ़ उत्तर प्रदेश में नई सरकार के गठन का रास्ता ही साफ नहीं करेंगे बल्कि 2019 के संसदीय चुनावों के भावी राजनीतिक-समीकरण की दिशा भी तय करेंगे। इसकी वजह है- उत्तर प्रदेश, जो आबादी के हिसाब से देश का सबसे बड़ा और राजनीतिक रूप से सबसे प्रभावशाली राज्य है। यहां विधानसभा की 403 और लोकसभा की 80 सीटें हैं इसलिए 403 विधानसभा सीटों के लिए हो रहे चुनाव के नतीजे राष्ट्रीय राजनीति का भविष्य तय करेंगे।-विवेक बाड़मेरी

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