यूं मनाया जाता है अप्रैल फूल…इस दिन लोग यह कोशिश करते हैं कि दूसरे को किस तरह बनाया जाये मूर्ख..!

यूं मनाया जाता है अप्रैल फूल…इस दिन लोग यह कोशिश करते हैं कि दूसरे को किस तरह बनाया जाये मूर्ख..!

अप्रैल फूल हमारे भारत देश के साथ-साथ विश्व के अनेक देशों में भी मनाया जाता है। इस दिन लोग यह कोशिश करते हैं कि दूसरे को किस तरह मूर्ख बनाया जाये। वैसे मूर्ख बनाने की परम्परा तो काफी प्राचीन है। शोधशास्त्री इस अप्रैल फूल की शुरूआत फ्रांस में ही हुई मानते हैं। अप्रैल फूल धीरे-धीरे विश्व में फैल गया।
कहा जाता है कि फ्रांस में ईसा की छठवीं -सातवीं शताब्दी में एक ‘सोसायटी ऑफ ज्वान’ नामक सभा का आयोजन किया जाता था। इस सभा में जो भी सदस्य भाग लेते थे, उनको यह स्वतंत्रता थी कि वे किसी का भी मजाक उड़ा सकते थे। वे कोई भी ऊल जुलूल हरकत व कार्य कर सकते थे।
कई लोग तो विचित्र अजीब सी वेशभूषा पहनकर लोगों का दिल बहलाया करते थे। फिर अंत में इस सभा में वे सबसे मूर्खतापूर्ण ऊल जलूल हरकत व कार्य जो व्यक्ति करता था, उसे सभा का अध्यक्ष चुनकर ‘मास्टर ऑफ फूल्स’ की उपाधि प्रदान की जाती थी। वर्तमान में यह दिवस मूर्ख दिवस व अप्रैल फूल में तब्दील हो गया।
फ्रांस में अप्रैल फूल के दिन को ‘अप्रैल फिश’ कहकर मनाया जाता है। फ्रांस में जो व्यक्ति इस दिन सबसे ज्यादा मूर्ख बनता है उसे ‘फूल मैकल’ कहा जाता है। दरअसल बात यह है कि अप्रैल एक मछली का नाम है। वहां के लोग फ्रांस में ही इसका शिकार करते है। यह नदियों और तालाबों में पाई जाती है।
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आज विश्व के सभी देशों में ‘अप्रैल फूल’ मनाया जाने लगा है। 10 अप्रैल को यहूदी उस फाख्ता की स्मृति में मनाते हैं जो माना जाता है कि अप्रैल के आरम्भ में आने वाली बाढ़ की भयानकता को अनुभव कर मूर्खता कर उड़ती है।
स्कॉटलैंड में अप्रैल फूल को ‘हंटिग डिकाउल’ के नाम से जाना जाता है। इस दिन मूर्ख बनाने वाले को ‘अप्रैल कुक्कू’ की उपाधि दी जाती है। कहा जाता है कि बसंत आने पर इन्हीं दिनों में कोयल अपने अंडे देती है। फिर यह अपने अंडे को दूसरे पक्षियों के घोसले में रखकर पक्षियों को मूर्ख बनाती है। इसलिये इसे अप्रैल कुक्कू की उपाधि प्रदान की जाती है। चीन में प्रथम अपै्रल को डींग हांकने व झूठ बोलने की प्रथा के रूप में बनाया जाता है। यहां पूरे वर्ष भर 31 मार्च तक डीगें हांकने व सबसे ज्यादा झूठ बोलने की तैयारी की जाती है।
रोम में पहली अप्रैल को ‘सेटरनेलिया’ समारोह का आयोजन किया जाता है जिसमें बहुत हुड़दंग व हो-हल्ला मचाया जाता है। इस उत्सव के पीछे यह कारण माना जाता है कि पुराने काल में रोम में स्त्रियों की आबादी बहुत कम थी जिसके कारण रोम के बहुत से लड़के कुंवारे रह जाते थे। इस समस्या को हल करने के लिए प्रथम अप्रैल को एक विचित्र मेले का आयोजन किया जाता था और इस आयोजन का समाचार दूर-दूर तक पहुंचा दिया जाता है।
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मेले में दूर-दूर से पुरूष व स्त्रियां भाग लेते थे। तब रोमवासियों द्वारा ऐसी चाल चलकर अनेक कुंवारी स्त्रियों का विवाह रोमवासियों के साथ गंधर्व विवाह कर दिया जाता था। इसी कारण व इसी याद में ‘सेंटरनेलिया’ उत्सव मनाया जाता हैं। इंग्लैंड के बच्चे अप्रैल फूल को विशिष्ट त्यौहार मानते हैं। इस दिन सभी बच्चों द्वारा मिलकर आयोजित बालसभा का अध्यक्ष जो चुना जाता है उसे ‘सेंट निकोलस’ की उपाधि से सम्मानित किया जाता है।
इंग्लैंड के निवासी यह मानते हैं कि एक बार यहूदियों ने ईसा-मसीह से बहुत परेशान होकर उनका खूब मजाक उड़ाया। उन्होंने पहले ईसा-मसीह को ऐनास के पास भेजा, फिर ऐनास ने कैपेस के पास, फिर कैपेस से पिलेट के पास, फिर पिलेट के द्वारा हिरोड़ के पास और हिरोड़ के पास से अन्त में फिर मिलेट के पास उन्हें भेजा गया। मिलेट के पास ईसा-मसीह को प्रथम अप्रैल के ही दिन भेजा गया था। इसी दिन की याद में वहां ‘अप्रैल फूल’ का दिवस मनाया जाता है।
हमारे भारत में तो होली के अवसर पर ही परिचितों को मूर्ख बनाने की परम्परा चली आ रही है व भारत में इसी दिन कई हास्य रस कवि सम्मेलन भी आयोजित किये जाते हैं व खूब मनोरंजन किया जाता है। कृपया मजाक करते समय यह ध्यान रखें कि हम जो मजाक करें वह बिना किसी द्वेष व बिना क्षति के हो तथा उससे कोई किसी प्रकार की हानि व नुक्सान न हो। सावधान रहियेगा। याद है न आज अप्रैल फूल है।
– विजय बवेजा

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