यूं बचिए आंखों की बीमारियों से

यूं बचिए आंखों की बीमारियों से

 eyeball_2473536bशरीर के कोमल अंगों में आंखों को सबसे अधिक कोमल अंग माना जाता है। ‘आंखें हैं तो जहान है’ की कहावत उपयुक्त सिद्ध होती है। सर्दी, गर्मी, बरसात सभी ऋतुओं में आंखों की हिफाजत पर संपूर्ण रूप से ध्यान देना आवश्यक है। आंखों की परेशानियों से नेत्र ज्योति के कम होने का खतरा बना रहता है।
प्राय: देखा जाता है कि आंख की किसी भी परेशानी में लोग बिना डाक्टरी सलाह के कैमिस्ट से किसी भी नेत्र ड्रॉप को खरीदकर ले आते हैं और उसे डालना प्रारंभ कर देते हैं। यह प्रयोग भविष्य में जाकर काफी खतरनाक हो सकता है। बिना चिकित्सक के परामर्श से आंखों में अपनी इच्छा से कोई लोशन नहीं डालना चाहिए। आंखों के रोग प्राय: संक्र मण व धूल के पड़ते रहने से ही होते हैं। आंखों का लाल होना, कुकरे या रोएं का होना, आंखें चुंधियाना, चुभन महसूस होना, मोतियाबिंद, आंखों का भारी होना आदि अनेक ऐसे रोग हैं जो किसी भी मौसम में बहुतायत से हो जाया करते हैं और अधिक तकलीफ देते हैं।
यूं बहकते हैं कदम किसी और की तरफ

आंखों के लगातार तनावग्रस्त रहने के कारण भी आंखों की अनेक बीमारियां हो जाती हैं। आंखों की नियमित सफाई का न होना, फैशन वाले चश्मों को लगातार लगाये रखना, कम प्रकाश में आंखों पर जोर डालकर अधिक कार्य करना आदि कारणों से आंखें तनावग्रस्त हो जाती हैं और संक्र मण की गिरफ्त में आकर बीमारियों का शिकार हो जाती हैं। टी. वी., वीडियो अत्यधिक देखने व लगातार कंप्यूटर पर काम करने से भी आंखें तनावग्रस्त हो जाया करती हैं। यूं तो आंखों में पर्दे की बीमारी भी होने का भय बना रहता है परंतु इसके होने में कई वर्ष तक लग जाते हैं। इसका उचित समय पर उपचार न होने से आंखों में अल्सर अर्थात् जख्म होने का भय बना रहता है। आंख आना कई कारणों से हो सकता है जिसमें एलर्जी और संक्र मण प्रमुख हैं।
आंखों का लाल होना, आंखों में पानी आना, आंखें दुखना या मवाद आना वायरस संक्र मण के कारणों से ही होते हैं। आंख आने की तीन स्थितियां होती हैं। इन्क्युबेशन पीरियड के दौरान वायरस अपना असर दिखाना शुरू करता है। इस दौरान संक्र मण की आशंका काफी अधिक बढ़ जाती है। दूसरी स्थिति इंफेक्शन पीरियड की होती है जिसमें आंखें लाल होना, दर्द होना, गारा होना आदि शामिल होते हैं। रेन्यूलूशन पीरियड तीसरा व अंतिम पोजीशन होता है। इस दौरान आंखों की लालिमा या दर्द खत्म भी हो सकता है। संक्र मण प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष दोनों ही रूपों में हो सकता है।
जब आंख की बीमारी पैर फैलाना शुरू करे तो उस समय आंखों को बार-बार ताजे जल से धोते रहना चाहिए। आंखों के ऊपर धूप का चश्मा लगाना चाहिए तथा भीड़-भाड़ व धूलयुक्त जगहों पर जाने से यथासंभव बचना चाहिए। आंखों के संक्र मण वाले रोगियों के तौलिए, तकिया, रूमाल व अन्य वस्तुओं के इस्तेमाल से बचना चाहिए। जिन लोगों की आंखें लाल हों, उनसे सीधी नजर मिलाने से यथासंभव बचना चाहिए। आंखों में बार-बार हाथ न लगाएं तथा आंखों पर रूमाल को पानी में भिगो कर रख दें। आंख के रोगियों को धूप की चमक से बचना चाहिए। थोड़ी-सी समझदारी और जरा सी देखभाल से आंखों को हमेशा स्वस्थ व निरोगी बनाये रखा जा सकता है। अच्छी आंखों के लिए अच्छे स्वास्थ्य का होना आवश्यक है, साथ ही आंखों को सुदृढ़ बनाने वाली कसरतों का करना भी आवश्यक होता है। आंखों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए निम्नांकित उपायों को करना हितकर होता है। हाथों से बिना छुए, दोनों आंखों को जोर से दबाइये अर्थात् आंखों को बंद कर तेजी से भींचिये। इस प्रकार की कोशिश करिये कि आंखों पर चारों ओर से दबाव लगे। आंख दबाव की कसरत से आंख के आंतरिक दबाव में क्षणिक वृद्धि होती है। यदि यह व्यायाम नियमित रूप से किया जाये तो भविष्य में रोगी होने की संभावना कम हो जाती है। आंखों को कुछ क्षण इस प्रकार भींचने के बाद धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में लाइये। इसके बाद मुंह को यथासंभव अधिक से अधिक फैलाकर रखिए और खोलिए। जीभ को अधिक से अधिक बाहर कर दीजिए तथा सिर ऊपर की ओर उठाए बिना ही छत की ओर देखिए। कुछ क्षण तक इस स्थिति में रहने के बाद धीरे-धीरे मूल स्थिति में आइये।
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सिर को स्थिर रखकर आंखों को बायें-दायें व ऊपर-नीचे घुमाइये। इसके लिए सर्वप्रथम आंखों को बंद करिये तथा खड़ी अंगुली को इस प्रकार नाक पर रखिए कि नाक पूरी ढक जाये। अब धीरे-धीरे आंखें खोलिए और सिर को स्थिर रखकर अंगुली को दायीं ओर बारह इंच तक ले जाइये। साथ ही आंखों को भी उसी तरफ घुमाकर अंगुली को देखते रहिए। अब आराम से आंखें बंद करिये। अंगुली को बायीं ओर ले जाइए तथा आंखों को उसी तरफ घुमाते हुए अंगुली को देखिए, 8-10 बार इसी प्रकार का अभ्यास करिये। इसी प्रकार आंखों को ऊपर, नीचे व वृत्ताकार ढंग से घुमाने का व्यायाम करें। सभी प्रकार की कसरतों के बाद पामिंग करें। सिर को आगे झुकाकर ठोड़ी की सहायता से गले को दबाना तथा सामान्य व्यवस्था में आकर धीरे-धीरे यथासंभव पीछे की ओर सिर को ले जाना, गले व गर्दन की कसरत कहलाती है। इसके अलावा सिर को दाएं-बाएं घुमाना, सिर को दायें और बायें कंधे की ओर झुकाना, सिर को चक्राकार क्र म में धीरे-धीरे घुमाना भी आंखों के लिए लाभप्रद होता है।
आंखों की बीमारियों से बचने के लिए शवासन, सिद्धासन, सर्वांगासन, मत्स्यासन और मत्स्येन्द्रासन का अभ्यास करना परम लाभदायक होता है। आंख की किसी भी परेशानी के लिए इन आसनों को करते रहना चाहिए।
– आनंद कुमार अनंत आप ये ख़बरें अपने मोबाइल पर पढना चाहते है तो दैनिक रॉयल unnamed
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