यूं कीजिए कड़ाके की ठंड से मुकाबला…बचिए जुकाम औऱ इन्फ्लुएंजा से

यूं कीजिए कड़ाके की ठंड से मुकाबला…बचिए जुकाम औऱ इन्फ्लुएंजा से

sardi भारत में शीत ऋतु का आगमन नवम्बर माह से ही प्रारंभ हो जाता है, परन्तु कड़ाके की सर्दी दिसम्बर-जनवरी में पड़ती है। तेज हवाओं के चलने के कारणों से जब ठंड का प्रकोप बढ़ जाता है तो उस समय शरीर को उष्णता प्रदान करने व जीवनी शक्ति बनाये रखने के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि हम सभी स्वस्थ आहार-विहार वाली दिनचर्या को अपनायें ताकि सर्दी से शरीर की रक्षा करने में सफल हो सकें। ठंड से बचने के लिए हम प्राय: मुंह ढक कर सोते हैं जो उचित नहीं होता क्योंकि ऐसा करने से हमें शुद्ध वायु से वंचित रह जाना पड़ता है और कार्बन डाईआक्साइड, जो हमारे श्वांसों से निकलती है, उसे ही बार-बार लेना पड़ता है। सोते समय बाकी अंगों को गर्म कपड़ों से ढका जा सकता है परन्तु नाक को खुला रखना आवश्यक होता है।
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स्नान से पूर्व सम्पूर्ण शरीर में तेल की मालिश कर लेने से त्वचा फटती नहीं है तथा मुलायम बनी रहती है। शीत ऋतु में मौसम के प्रभाव से त्वचा खुश्क हो जाती है साथ ही गाल, होंठ एवं हाथ-पैरों की त्वचा फटने भी लग जाती है, इसलिए इन दिनों साबुन का प्रयोग कम से कम करना चाहिए। एडिय़ां इन दिनों खूब फटती हैं अत: नहाते समय एडिय़ों को रगड़ कर साफ करें। रात में सोते समय हाथ एवं पैरों में ग्लिसरीन युक्त नींबू के रस को अवश्य ही लगाते रहना चाहिए। जाड़े की धूप शरीर के लिए टॉनिक के समान हुआ करती है। धूप के सेवन से पसीने की ग्रंथियां अधिक कार्य करने लगती हैं फलस्वरूप पसीने के साथ शरीर के अन्दर की गन्दगी बाहर आ जाती है। नियमित रूप से धूप सेवन करते रहने वालों में रोग नहीं फटकते बल्कि स्नायुतंत्र सशक्त होकर मस्तिष्क की क्षमता को भी कई गुना बढ़ा देता है।
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सर्दी को सहन करने की क्षमता बहुत हद तक शरीर की बनावट, आकार, स्वास्थ्य, आयु और भावनात्मक स्थिति पर भी निर्भर करती है। यद्यपि मनुष्य स्वयं ठंड से बचने का अथक प्रयास करता है परन्तु कभी-कभी विषम परिस्थितियों में जैसे कड़क ठंड के सामने वह हथियार डालने पर भी मजबूर हो जाता है। इसके लिए यह आवश्यक है कि ठंड से बचने के लिए अन्य उपायों के साथ ही साथ वह सन्तुलित आहार भी ग्रहण करता रहे। इस ऋतु में ऐसा आहार लेना आवश्यक है जिसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन, कार्बोज, वसा, विटामिन, खनिज एवं रेशे हों। शरीर को ऊर्जा शक्ति प्रदान करने वाले कुछ विशेष रंग वाले पदार्थ भी होते हैं जिनको भोजन में सम्मिलित करने पर ठंड के साथ-साथ इस ऋतु की आम बीमारियों-जुकाम, इन्फ्लुएंजा आदि से भी बचा जा सकता है। शीतऋतु में सफेद रंग वाले खाद्य पदार्थों का सेवन स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यन्त उपयोगी माना जाता है। इस ऋतु में ‘कामदेव के बाणों’ का प्रहार भी स्त्री-पुरूष दोनों पर ही समान रूप से होता रहता है। सफेद रंग वाले पदार्थों के अन्दर ‘कामशक्ति’ वर्धक तत्व भी होते हैं अत: इनका प्रयोग आवश्यक होता है।
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सफेद रंग वाले खाद्य-पदार्थों में लहसुन, प्याज, सफेद सेम, केला, दूध से बने पदार्थ, नमक, सोयाबीन से तैयार दही, पत्ता गोभी, फूल गोभी, कच्चा पपीता, मूली आदि आते हैं। लहसुन के 4-5 जवा को बारीक टुकड़ों में काटकर निगल जाना लाभदायक होता है। शीत ऋतु में प्याज को सलाद के रुप में काटकर उसमें नींबू का रस व थोड़ा नमक डालकर खाना उत्तम माना जाता है। लाल रंग वाले खाद्य पदार्थ-टमाटर, अनार, चुकन्दर, चकोतरा आदि का सेवन भी शीतऋतु में लाभदायक होता है क्योंकि इनमें अनाक्सीकारक पदार्थ (लाइकोपीन), रक्तवद्र्धक व शोधक-एन्थो साइमिन, कीटाणुनाशक-बीटा सायोमिन आदि तत्व पाये जाते हैं।
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पीले रंग के खाद्य पदार्थों में गाजर, खूमानी, पपीता (पका) आदि का सेवन करना चाहिए क्योंकि इनमें अनाक्सीकारक बीटा कैरोटिन पाया जाता है। रेशे भी बहुतायत से पाये जाते हैं जो अवांछनीय विषैले तत्वों को शरीर से निकालने में मदद करते हैं। हल्दी, पीली सरसों, मक्का, पीली मिर्च के सेवन से करक्यूमिन, एलाइल आइसोसाईनाइथ, ल्यूटिन तथा विटामिन-सी की प्राप्ति होती है। अंगूर, जामुन, चेरी आदि जो जामुनी रंग के पदार्थ होते हैं उनका सेवन शीतऋतु में भरपूर करते रहना चाहिए क्योंकि इनमें ‘एन्थ्रोसाइमिन’ भरपूर मात्रा में पाया जाना है। स्ट्राबेरी में इलैजिक अम्ल पाया जाता है जो आंतों में कैंसर की रोकथाम करता है। शीतऋतु में हरे रंग के पदार्थों का सेवन अत्यन्त ही लाभदायक माना जाता है। पालक, हरी सब्जियां, बंदगोभी, गांठ गोभी, खीरा-ककड़ी आदि हरे रंग के पदार्थों में आते हैं। इनके सेवन से लौह, कैल्शियम, कीटाणुनाशक गंधक आदि प्राप्त होते हैं। अधिक मसाले वाले खाद्य पदार्थ, मांस के व्यंजन, अधिक वसा में तले हुए पदार्थ, डबल रोटी, चाकलेट, लेमन ड्राप्स, तम्बाकू, शराब, फास्टफूड आदि का सेवन शीतऋतु में विष तुल्य माना जाता है, अतएव इनके सेवन से परहेज अवश्य करना चाहिए। उपरोक्त उपायों द्वारा इतनी ऊर्जा-शक्ति प्राप्त की जा सकती है कि हम कड़ाके की ठंड से भी बिना रोगग्रस्त हुए मुकाबला कर सकते हैं।
– आनन्द कुमार अनन्तadd-royal-copy

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