यादगार बना लें ससुराल की पहली होली..

यादगार बना लें ससुराल की पहली होली..

होली रंगों का खेल है। मन की उमंगों को, मचलते अरमानों को रंग के माध्यम से अपने चेहरे पर रंगों के माध्यम से उड़ेल देने वाले पर्व का नाम होली है। इस पर्व में मन के अंदर बूढ़े होते, अरमानों को भी एक नया आयाम मिल जाता है और वे अरमान रंगों के माध्यम से गले का हार बन जाते हैं। इन्हीं कारणों से होली को मौज-मस्ती का त्योहार भी कहा जाता
है।
कुंवारी लड़कियां जब परिणय सूत्र में बंधकर अपने ससुराल पहुंचती हैं तो उनकी उमंगें एवं अरमान भी बहुत ऊंचे होते हैं क्योंकि उन्हें पहली बार पिया संग होली खेलने का अवसर जो मिलने वाला होता है। विवाहित जीवन का पहला फागुन। इस प्रथम फगुआ को किस प्रकार नवविवाहिता मनाये, यह प्रश्न सबसे अहम् होता है।
हर नवविवाहिता की यही इच्छा होती है कि उसके विवाहित जीवन की प्रथम होली यादगार बन कर रह जाये, एक ऐसी यादगार जिसकी याद में भीगती हुई वह उम्र को पार कर जाये। प्रथम होली को यादगार बनाने के लिए कुछ ऐसी खास बातों पर अमल करना होगा जिन्हें प्राय: नजर-अंदाज ही कर दिया जाता है। इन खास बातों पर अमल करने से न सिर्फ होली का रंग-अंग चढ़ जाएगा बल्कि वह मन को भी अपने आगोश में लेकर जन्म-जन्म के बंधन की डोरी को और मजबूत बना डालेगा।
यूं तो आपने स्वयं इस पहली होली को यादगार बनाने के विषय में पहले से ही बहुत कुछ सोच लिया होगा, फिर भी मैं आपकी खुशियों को और अधिक बढ़ाने की फिराक में हूं। नवविवाहिता के लिए ससुराल का माहौल एक दम नया होता है। यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि जिस प्रकार आप होली की योजनाओं को बना रही हैं, उसी प्रकार आपके पति और उनके मित्र भी अवश्य ही नई-नई योजनाओं को बनाने में लगे होंगे।
शालीनता एवं शिष्टाचार नववधू के दो अमूल्य गहने होते हैं। इनकी परिधि में चलकर ही होली का वास्तविक आनन्द उठाया जा सकता है। होली की प्रथम शुरूआत अपने ‘साजन’ के माथे पर खुशबूदार लाल गुलाल लगाकर करिए। यह गुलाब ‘समर्पण’ का प्रतीक होगा। आपका गुलाल साजन के मन में असीमित प्रेम के हिलोरों को उत्पन्न करेगा और वे भी आपको इसका प्रत्युत्तर उसी जोश के साथ देंगें।
पिया के माता-पिता एवं उनके भाई-बहनों के पास भी जाकर अपने उल्लास को प्रस्तुत करें। माता-पिता के चरणों पर गुलाल डालकर उनका आशीर्वाद ग्रहण करना तथा देवर-ननद की इच्छानुसार उनके मन अनुसार सहभागिता करना आपके व्यक्तित्व में चार-चांद लगा डालता है। परिवार के हर व्यक्ति की खुशी में ही आपकी खुशी भी निहित है, इसलिए इस खुशी के अवसर को अपने हाथों से चूकने न दें।
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आपके पति के कई दोस्त भी आपसे होली खेलने अवश्य ही आयेंगे। आपको इससे कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। आत्मविश्वासी बनकर उन आने वाले मित्रों का सामना बड़ी ही शालीनता के साथ करें। आने वाले सभी मित्र एक ही विचारधारा वाले हों, यह आवश्यक नहीं है। कुछ गुलाल लगाकर ही संतोष कर सकते हैं और कुछ आप पर रंगों की बाल्टी भी उड़ेल सकते हैं। इसके लिए आप पहले से ही तैयार रहें। आज के दिन पहनने वाले वस्त्र भी आपको अनेक परेशानियों एवं शर्मिन्दगियों से बचा सकते हैं।
होली के दिन ब्रा पहनना कभी न भूलें। इसके ऊपर बांह वाला चुस्त ब्लाउज पहल लें। इस दिन साड़ी कॉटन वाली ही पहनें क्योंकि सूती साड़ी भीगने के बाद पारदर्शी नहीं बन सकती। रंगों से भीगकर साडिय़ां शरीर से चिपक जाया करती हैं और सूती वस्त्र न होने से अन्दरूनी अंगों के दिखाई देने का अधिक चांस बना रहता हैं
प्राय: यह देखा गया है कि होली के रंग से भयभीत होने वालों को ही अधिकांशत: उनके मित्र तंग किया करते हैं। अगर आप आत्मविश्वासी बनकर होली खेलने आये अपने पति के मित्रों को बाकायदा खेलने के लिए आमंत्रित करेंगी और उनके तरीकों का सामना करेंगी तो आप पायेंगी कि उनका आधा उत्साह ठंडा पड़ गया है और वे थोड़ा ही खेलकर रणक्षेत्र से पीछे हटने पर मजबूर हो जायेंगे।
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होली के दिन कई प्रकार के ऐसे रासायनिक रंगों का भी प्रयोग किया जाता है तो त्वचा के लिए हानिकारक होते हैं, साथ ही त्वचा पर से छूटते भी नहीं हैं। इसके लिए यह आवश्यक है कि आप सुबह से ही अपने चेहरे पर कोई चिकनाईयुक्त क्रीम लगा लें और उसके ऊपर थोड़ी अधिक मात्र में टेलकम पाउडर को इस प्रकार मल लें ताकि आपके चेहरे की त्वचा के रोमछिद्रों में पाउडर चला जाए। इससे न तो चेहरे पर रंग ही जम पायेंगे और न ही वे बाद में छूटने में कोई दिक्कत ही करेंगे। रंगों को छुड़ाने के लिए हमेशा गुनगुने पानी एवं साबुन का ही व्यवहार करें।
आने वाले मेहमानों को आदर के साथ घर में व्यंजनों को खिलाना कतई न भूलें। यह अवश्य ध्यान रहे कि इस दिन किसी को जबर्दस्ती और अधिक खाने का आग्रह न करें। रूचि अनुसार जो जितना खाये, उसे वही वस्तु उतनी ही देनी चाहिए। होली के दिन अत्यधिक आग्रह भी कभी-कभी मुसीबत बन जाया करता है।
होली के दिन घर के वातावरण को मोहक बनाने के लिए हमेशा ‘होली खेलत नन्दलाल’ जैसे गीतों को ही मधुर आवाज में बजायें। होली के अवसर पर कई ऐसे भी कैसेट बाजार में आते हैं जो द्विअर्थी हुआ करते हैं। ऐसे कैसेटों से बचना चाहिए क्योंकि ऐसे गीत आने वालों में आपकी छवि पर बुरा असर डाल सकते हैं।
ससुराल की पहली होली आपकी यादगार बनकर रह जाये, इसके लिए यह आवश्यक है कि नववधुओं को आत्मविश्वास, संयम एवं शालीनता की परिधि में रहकर ही होली का लुत्फ उठाना चाहिए।
– पूनम दिनकर

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