मौत का पूरा सामान है कोल्ड ड्रिंक्स में

मौत का पूरा सामान है कोल्ड ड्रिंक्स में

कोल्ड ड्रिंक्स में कीटनाशक की मात्रा निर्धारित से कई गुना अधिक होने की रिपोर्ट आने पर चर्चा होती रहती है किंतु इस कीटनाशक के कुचक्र को नियंत्रित करना कठिन है। पहले यह बात सामने आने पर कमेटी दर कमेटी बनी, बैठक दर बैठक हुई पर निष्कर्ष व निर्णय को अधिसूचित नहीं किया गया।
इनके लिए अब भी कोई नियामक तंत्र व कानून नहीं बना है। बिकाऊ विधायक, सांसद, मंत्री व अधिकारियों को खरीदकर ये कोल्ड ड्रिंक्स कम्पनियां ऐलानिया मनमानी कर कानून तक को अंगूठा दिखा रही हैं। ऐसी स्थिति में प्राणघाती रोगदायी कोल्ड ड्रिंक्स पर काबू करना नितांत कठिन है।
कोल्ड ड्रिंक्स निर्माता बहुराष्ट्रीय कंपनियां विश्व भर में पावरफुल हैं। इनका मार्केटिंग सिस्टम (व्यवसायिक प्रणाली) बहुत तगड़ा है जो सभी परिस्थितियों में कारगर रहता है। ये अपने कोल्ड ड्रिंक्स के प्रचार के लिए ख्यात व लोकप्रिय व्यक्तियों को खरीद लेते हैं। सांसद, विधायक, मंत्री यहां तक कि सरकारें तक बिक जाती हैं।
इन कंपनियों से मिले चंदे से राजनीतिक पार्टियां चुनाव लड़ती हैं। इन डिंरक कंपनियों ने तो अब अपने विरोधियों से निपटने हेतु जेबी एन. जी. ओ. समाजसेवी संस्थाएं भी बना ली हैं। जहर बेचने वाली ये कम्पनियां हर स्तर पर अवरोधकारी चुनौती से निपटने हेतु चौकस, चाक-चौबंद होती हैं। इसीलिए प्यासे को पानी मिले न मिले, कोल्ड ड्रिंक्स हर स्थान पर मिल जाते हैं।
2003 में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि इसमें निर्धारित मात्रा से कई गुना अधिक कीटनाशक रसायन पेस्टीसाइड मिले हैं जो प्राणघातक है। यह रिपोर्ट सेंटर फॉर साइंस एंड इन्वार्नमेंट सी. एस. ई ने दी थी। इस रिपोर्ट को झुठलाने हेतु ठण्डा पेय कंपनियों ने जांचकर्ता प्रयोगशाला पर उंगली उठा दी थी।
विश्व स्तरीय जांच प्रयोगशाला सी. एस. ई. ने कुछ वर्ष पूर्व भारत के 12 राज्यों में 11 ब्रांड कोल्ड ड्रिंक्स के 25 उत्पादन प्लांटों से 57 अलग-अलग नमूने लिए। जांच में पाया गया कि विषैले प्रतिबंधित कीटनाशक की मात्र पेप्सी में 30 गुना व कोका कोला में 27 गुना अधिक थी। इनमें 3 से 6 तरह के प्रतिबंधित घातक कीटनाशक पाए गए हैं। कीटनाशक की मात्रा कोलकाता के नमूने में 140 गुना एवं ठाणे के नमूने में 200 गुना अधिक मिला।
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एक बार पुन: साफ्ट ड्रिंक्स की वास्तविकता सामने आने पर बवाल तो मचा पर इन बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने इसे झुठलाने हेतु कई हथकंडे अपनाने आरंभ कर दिये। तत्कालीन कृषि मंत्री व स्वास्थ्य मंत्री कम्पनियों के साथ मिल गए। बचाव करने लगे व साथ मिलकर जांच प्रयोगशाला को ही संदिग्ध व अमानक बता ये कुतर्क भी कर रहे थे। मां के दूध, गन्ने के रस तक में कीटनाशक की बात कर खाद्य पदार्थ एवं खेती में कीटनाशक को बढ़ावा तो ये मंत्री ही दे रहे हैं जिसके माध्यम से यह कीटनाशक मनुष्य के पेट में जाता है।
ये शीतल पेय कंपनियां प्रतिदिन साढ़े चार करोड़ लिटर पानी धरती से सोख लेती हैं। जहां-जहां इनका प्लांट लगा है, वहां का भूजल स्तर गिर रहा है। ये शीतल पेय कंपनियां भारत में 7 हजार स्थानों से भूजल निकालती हैं। प्रत्येक स्थान से दैनिक 10 लाख करोड़ लिटर पानी दोहन किया जाता है।
मात्र कोका कोला के ही 90 बड़े प्लांट हैं। ये प्रत्येक 4 करोड़ लीटर पानी निकालते हैं। एक लीटर कोल्ड ड्रिंक के लिए चार लीटर पानी उपयोग किया जाता हैं जिनमें तीन लिटर पानी बर्बाद होता है। पुरोहितों की ढाणी, कालाडेरा, प्रतापपुर, चौमूं सभी राजस्थान, बरेली, नासिक, गाजियाबाद, मेहंदीगंज, पांचीमाण केरल आदि में भूजल अब बचा ही नहीं। इन स्थानों पर कोल्ड ड्रिंक्स प्लांट हैं।
कोल्ड ड्रिंक्स में मौत का पूरा सामान:-प्रसिद्ध शीत पेयों में फार्मूला के नाम से मिलाए जा रहे रसायनों का प्राप्त विवरण इस प्रकार है।
कैफीन शीतपेय को नशीला बनाता है। इससे एड्रीना ग्लैण्ड उत्तेजित होता है जिसके कारण नींद गायब हो जाती है और हृदयगति तेज हो जाती है।
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एथिलिन ग्लाइकोल:- यह स्वाद बढ़ाने हेतु मिलाया जाता है। इससे कैंसर होता है व किडनी खराब होती है।
लैड:- शीतल पेय का स्वाद तो बढ़ाता है पर आमाशय व गुर्दों को क्षतिग्रस्त कर देता है।
फास्फोरिक एसिड:- शीतल पेयों का प्रमुख घटक है जो दांत व हड्डियों को कमजोर कर गला देता है। हड्डियां पोली व भुरभुरी हो जाती हैं जिसके कारण जल्दी टूटती हैं या टूटने पर जुड़ती नहीं है।
हाई फ्रक्चेस कोन सिरप:- मिठास लाता है। इससे लिवर सिरोसिस की बीमारी होती है। लिवर खराब होता है।
डाइट कोला:- शीतलपेय में मिला मृदुल पदार्थ है जो एण्डोक्राइन ग्लैण्ड की कार्यक्षमता कम कर देता है।
हाइड्रोक्लोरिक एसिड:- शीतपेय को हल्का खट्टा बनाता है। इससे पाचन नली की टिशूस नष्ट होती हैं।
मीठा:- शक्कर या मीठा बनाने हेतु रसायन मिलाते हैं। इसकी मात्रा प्रति बोतल पांच चम्मच होती है जो रक्तचाप व शुगर को अचानक बढ़ाता है। इन सबके अलावा कृत्रिम रंग, कृत्रिम स्वाद मिथाइल बैन्जाएट, सोडियम बैन्जोएट, सोडियम ग्लूटामेट, पोटेशियम सार्बेट, जिंक, आर्सेनिक, सोडा आदि रसायनों का प्रयोग भी किया जाता है। ये सभी स्वास्थ्यघाती हैं।
यह दुर्भाग्य है कि जनता के लोकप्रिय सिनेपात्र एवं क्रिकेट स्टार सचिन अपने चहेतों को शीतपेय का जहर पीने को प्रेरित कर रहे हैं। लगता है ये अपने प्रेमियों को बीमारी एवं मौत का सामान पीने को प्रेरित कर रहे हैं। इनकी मात्रा पर न जाएं। हर हाल में कीटनाशकों का उपयोग सर्वत्र प्रतिबंधित हो। इन कम्पनियों को बचाने व बचाव करने वाले जनता के दुश्मन हैं।
– सीतेश कुमार द्विवेदी

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