कविता-मैं भारत की बेटी हूँ….!

कविता-मैं भारत की बेटी हूँ….!

 मेरी यह कविता उन बेटियों को समर्पित है जिन्होने रियो ओलम्पिक मे इतिहास रचा और दिन प्रतिदिन भारतीय संस्कृति के माध्यम से हर क्षेत्र में नया इतिहास रच रही हैं…….
मैं भारत की बेटी हूँ …!
संस्कारों की नीव जमाती
हर पल आगे बढ़ती जाती,
वेद ऋचाओं में भी मैं हूँ
आज गगन में पैर जमाती,
नहीं किसी से हेठी हूँ
मैं भारत की बेटी हूँ।
मात पिता की सेवा करती
सास ससुर के मन को भाती,
नन्हे-नन्हे कोमल मन पर
ममता का संसार लुटाती,
ज्ञान दीप की ज्योति हूँ
मैं भारत की बेटी हूँ।
धरती, अम्बर और अनल तक
विजय ध्वज मैंने फहराया,
लक्ष्मी, सरस्वती और पार्वती
देवी जैसा मान भी पाया,
ममता की अनुभूति हूँ
मैं भारत की बेटी हूँ।
सीता जैसी पतिव्रता हूँ
राधा जैसी प्रेम दीवानी,
जब-जब संकट पड़ा देश पर
लक्ष्मी हूँ झाँसी की रानी,
अंग्रेजों की काल कटी हूँ
मैं भारत की बेटी हूँ।
इंदिरा जैसी सत्ता शीर्ष पर
कल्पना सी पहचान बनी हूँ,
साहित्य में महादेवी हूँ
हर घर की मैं रानी हूँ,
शिक्षा के दीप जलाती हूँ
मैं भारत की बेटी हूँ।
डॉ. कीर्तिवर्धन

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