मेहमानों का मिठास से स्वागत करता है कानपुर का यह कुआं

मेहमानों का मिठास से स्वागत करता है कानपुर का यह कुआं

कानपुर । गर्मी के चलते पानी की भारी किल्लत चल रही है और लोग प्यास बुझाने के लिए दूर-दराज से पानी ला रहे हैं। लेकिन कानपुर का एक कुआं ऐसा भी है, जो गांव आने वाले मेहमानों को मिठास से स्वागत करता है। भीतरगांव ब्लॉक के दौलतपुर गांव में एक ऐसा कुआं है जिसका पानी शरबत के समान है। गांव वालों का तो यहां तक दावा है कि एक जमाने में इसके पानी से जलेबी का सिरा भी बनाया जाता था। कुछ भी हो पर आज भी यह कुआं किसी चमत्कार से कम नहीं है। गांव के बजुर्ग कल्लू यादव ने बताया कि हमारी बेटी की शादी 40 वर्ष पूर्व हुई थी पर घर की माली हालात ठीक नहीं थी।
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जिसके चलते इसी कुएं के पानी से हलवाई रघुनंदन साहू ने जलेबी का सिरा बनाया और इसी पानी से रिश्तेदारों को शरबत परोसा गया। लेकिन कुछ आराजक तत्वों ने करीब 20 वर्ष पहले कुछ ऐसी चीज घोल दिया जिससे इसके मिठास में कमी आ गई। फिर भी इसके पानी में नीबूं मिलाकर गांव वाले रिश्तेदारों को भीषण गर्मी में शरबत देकर स्वागत करते हैं। गांव के रामकुमार ने बताया कि एक समय था कि इसका पानी लोटे से निकाल लिया जाता था लेकिन जलस्तर कम होने के चलते अब इसका पानी करीब 30 फिट नीचे चला गया और मिठास में भी कमी आ गई।

अंग्रेजों के समय हुआ था निर्माण

कल्लू यादव ने बताया कि भीतरगांव ब्लॉक में पानी की बहुत किल्लत थी और पांच किसनों की मौत हो गई थी। जिसके चलते गांव के जमीदार कामता प्रसाद के बेटे सूर्यप्रसाद ने 1854 में शिव मंदिर के पुजारी स्वामी कृष्ण मोहन के सहयोग से इस कुएं का निर्माण कराया था। पुजारी ने इस कुएं में अच्छा पानी निकलने के लिए जंगल में खूब तपस्या की और जब पानी अच्छा निकल आया तभी वह गांव लौया जाता है कि उस दौरान कुएं से पानी बाहर निकल रहा था।
दूर होती बीमारियां
गांव वालों के मुताबिक इस कुएं के पानी से जटिल से जटिल रोग दूर हो जाते थे। एक समय आया कि यहां पर रोगियों का तांता लगा रहता था। यह देख कानपुर के हैलट अस्पताल के डॉक्टरों का दल भी यहां आया, पर वह भी इस रहस्य को नहीं समझ सके थे। गांव के अजय कुमार ने बताया कि यहां पर स्नान करना मना है। सुबह सबसे पहले इसका एक लोटा पानी भगवान शिव के चरणों पर चढ़ाया जाता है। इसके बाद ही गांव वाले इसका पानी ले सकते हैं।

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