मेरी चिट्ठी पीएम के नाम…. डॉ. महेश शर्मा और नितिन गडकरी से भी ‘चाय पर शादी’ की मिसाल पेश करायें…!

मेरी चिट्ठी पीएम के नाम…. डॉ. महेश शर्मा और नितिन गडकरी से भी ‘चाय पर शादी’ की मिसाल पेश करायें…!

unnamedआदरणीय प्रधानमंत्री जी,
सबसे पहले तो आपको नोटबंदी के बड़े फैसले के लिए हार्दिक बधाई, जिस देश में कोई भी राजनेता फैसला लेने से पहले, उसके अपने वोटरों पर प्रभाव के लिए सोचने को मजबूर होता हो, उस देश में इस तरह का कड़ा फैसला लेने के लिए आप बधाई के पात्र हैं। इस फैसले में किसी को कोई फायदा नजर आता हो या न आता हो, लेकिन मेरी नजर में सबसे बड़ा फायदा तो ये ही है कि आपने एक ही झटके में पाकिस्तान से आये नकली नोटों को रद्दी बना दिया। आपने फिलहाल हवाला और ड्रग तस्करी के धंधे को चौपट कर दिया, कश्मीर में नोट बांटकर हिंसा कराने वालों पर लगाम लगा दी।
देश 8 नवम्बर से लाइन में खड़ा है, आपने 50 दिन मांगे हैं… हमने दिए…. वैसे भी हमें लाइन में खड़े होने की आदत पड़ी हुई है, हम तो फ्री के सिम के लिए भी घंटों लाइन में खड़े होने के आदी हैं, इस बार तो आपने बताया कि ये देश बदलने वाला फैसला है, तो हमारा तो देशप्रेम का
प्रधानमंत्री का नोट बदलने का फैसला आपको कैसा लगा ?
नाम सुनकर खून वैसे ही उबाल लेने लगता है, आप जब भी अपने भाषण में कहते हो कि भारत माता की जय, तो हमारा तो रक्त प्रवाह वैसे ही तेज हो जाता है, लेकिन क्या हमें सिर्फ 50 दिन तक ही लाइन में खड़ा होना पड़ेगा..?..विपक्ष के नेता कहते हैं कि सालों तक स्थिति ठीक नहीं होगी, हम उनकी बात पर यकीन कर भी नहीं रहे..करते होते तो पिछले चुनाव में आपको बम्पर समर्थन देकर पीएम क्यों बनाते …?… 28 नवम्बर के भारत बंद को सफल न कर देते.. ?आपको पिछले चुनाव में जिताकर हमने कोई गलती नहीं की, ये तब और अहसास होता है, जब आप किसी भी देश में जाते हो तो वहां की सरकारे आपका स्वागत ऐसे करती हैं, जैसे दामाद का कर रही हों, हम तो अमेरिका के राष्ट्रपति को हव्वा समझते थे, पर जबसे आपने हाथ पकड़कर साथ घुमाया और ‘बराक’ कहकर संबोधित किया, तब से लगा कि अब वास्तव में अपनी भी कोई हैसियत विश्व में है। अच्छा लगा, बहुत अच्छा लगा, बल्कि गर्व भी महसूस हुआ। आपने नोटबंदी का फैसला किया कि देश का कालाधन बाहर निकाल सकें, पर माननीय पीएम
जेटली ने हंगामे के बीच लोकसभा में पेश किया कर संशोधन विधेयक
साहब, देश में काला धन है कितने प्रतिशत के पास…? आपके पास तो पूरी सरकार है, पूरा सिस्टम है…आप तो जब ठान लेते तभी सबका हिसाब-किताब कर देते, तालाब के मगरमच्छ को मारने के लिए तालाब सुखाने का फैसला क्यों कर दिया .? लाइन में लगी मछलियां तो बेवजह मारी जा रही हैं…!…आप जानते हैं कि काला धन कहाँ है..?…इस देश में बड़े नेता, अफसर, उद्योगपति बटोरे बैठे हैं, 8 नवम्बर से अब तक इनमें से कोई लाइन में दिखा..?.एक दिन राहुल जी और एक दिन माता जी दिखी.., पर देश जानता है कि उन दोनों को लाइन में लगने की कोई जरुरत नहीं थी…..।8 की रात को जब आपने घोषणा की, कि 500-1000 के नोट रद्दी, तो आम आदमी तो बैंक के बाहर लाइन में लग गया कि 10 -20  हजार भी,जो घर में पड़े हैं, ये बेकार न हो जाएं, लेकिन बड़े आदमी की गाडी सर्राफा बाजार में पहुँच गई, वहां 31 हजार का सोना 56 से 62 हजार तक में खरीद लिया…डॉलर बदल लिए…काले धन का केवल स्थान परिवर्तन हुआ, वो खत्म नहीं हुआ। आगे आप सोने
मुजफ्फरनगर में कृषि मेले का हुआ भव्य उद्घाटन
पर कुछ नया कुल्हाड़ा चलाओगे तो प्रधानमंत्री जी… उसका भी ये कोई तोड़ निकाल लेंगे, ज्यादा से ज्यादा आपके सामने ‘ईमानदार’ बन जायेंगे और 50 प्रतिशत का जुर्माना देकर और 25 प्रतिशत 4 साल के लिए बैंक में बिना ब्याज का रखकर 25 प्रतिशत तो हाथो-हाथ घर ले आयेंगे.. इनके तो ये 25 प्रतिशत ही इतने होंगे कि देश की आधे से ज्यादा आबादी की पूरी जीवन भर की कुल कमाई भी मिलाकर इतनी नहीं होगी।आज बिग-बाजार, वी मार्ट समेत सिनेमा हाल डेबिट कार्ड से 2000 रुपये दे रहे हैं, वी मार्ट की तो स्कीम है कि 1000 से ज्यादा का सामान खरीदो और 2000 नकद ले जाओ, वहां लाइन लग रही है, लोग अपने 2000 पाने के लिए भी 1000 का सामान बिना आज की ज़रुरत के खरीद रहे हैं, इसका मतलब है कि वे दुखी तो है, अपनी मेहनत से कमाए 2 हजार के लिए..क्या ये काला धन वाले हैं..?..ये सभी निजी संस्थान अपने पास से नकदी नहीं बाँट रहे हैं, बल्कि इन्हें बैंक से दी जा रही है, ऐसा क्यों…?…इन निजी संस्थानों को समानान्तर बैंक की तरह तरजीह क्यों दी जा रही है ? जबकि देश में आज भी एटीएम ज़्यादातर खाली हैं, बैंकों से घोषणा के अनुरूप भी कैश नहीं मिल रहा है, बैंक कैश के बिना परेशान है।आप कह रहे हैं कि अब मोबाइल से लेन-देन करो, आपका सुझाव सही भी है, प्रगतिशील भी है, पर जिस देश में अभी भी सरकारी आंकड़ों के हिसाब से ही 30 करोड़ से ज्यादा लोग निरक्षर हैं, जिस देश में ग्राम प्रधान से लेकर कुछ सांसद तक केवल अंगूठा लगाकर काम करते हों, उस देश में क्या अभी ये संभव है…? जिस देश में अभी 125 करोड़ की आबादी में से केवल 34.26 करोड़ आबादी इन्टरनेट का प्रयोग करती है, उस देश में कैशलेस लेन-देन क्या अभी सफल हो पायेगा?
पिछले ढाई साल से आप गांव-गांव तक इन्टरनेट पहुँचाने का प्रयास कर रहे है, पर क्या ये हो पा रहा है…? आपके प्रयासों को क्या ये अफसरशाही लागू कर रही है…? चलिए एक उदाहरण भी देता हूँ.. मैं नोएडा में शहर के बिल्कुल बीच में जिस सोसाईटी में रहता हूँ, कुछ महीने पहले वहां बोर्ड लगा कि यहां बीएसएनएल की केबिल आ गई है, मेरा भी राष्ट्रप्रेम जागा कि अपनी स्वदेशी सरकारी कम्पनी का फोन व इन्टरनेट लगाया जाए…लगवा लिया…लेकिन 4-5 महीने बाद ही कटवाना पड़ा, क्योंकि वो कभी ठीक से काम करता ही नहीं था, रोज
उत्तर प्रदेश में भारतबंद फ्लॉप… कांग्रेस और सपा ने सडकों पर उतरकर दिखाया आक्रोश
शिकायत लिखाने पर 2 दिन बाद ऑटो एसएमएस आ जाता था कि आपकी शिकायत का निदान कर दिया गया, लेकिन कभी नेट ठीक से नहीं चला, माननीय प्रधानमंत्री जी! जब एनसीआर में ये स्थिति है तो केवल इन अफसरों के सहारे आप अगर ये सोच रहे हैं कि देश में डिजिटल क्रांति आ जाएगी, तो अभी वो संभव नहीं है। 70 साल की बिगड़ी व्यवस्था सुधारने में आपको अभी और वक्त चाहियेगा।गंगा तब साफ होगी, जब गंगोत्री से साफ हो, इस देश की गंगोत्री तो सरकारे हैं…कोई मुख्यमंत्री 32 करोड़ की लागत से बुलेटप्रूफ  बंगला और टॉयलेट बनवाता है, कोई नेता धरती माँ का दोहन करके उससे कमाए 500 करोड़ से बेटी की शादी करता है, उस देश में एक आम बाप को अपनी बेटी की शादी के लिए बैंक से अपने जमा धन में से केवल ढाई लाख रुपये भी न मिल पा रहे हो, ये तो ठीक नहीं है, आम आदमी अपनी बेटी की शादी के लिए अपना पेट काटकर बरसों तक थोडा-थोडा धन जोड़ता है, उसके जीवन में तो ऐसी खुशी के पल कम ही आते हैं, आपको नहीं लगता कि आपके अफसरों द्वारा नई करेंसी की सही व्यवस्था न करने से उनसे ये खुशी भी छीन ली गई…?आपकी पार्टी के कुछ नेता सुझाव दे रहे हैं कि शादी में शगुन भी चेक से दो, प्रधानमंत्री जी, ये शगुन की परंपरा दरअसल बेटी की शादी में सामाजिक सहयोग का तरीका थी, शायद आपने भी बचपन में देखा होगा कि गाँव में अगर किसी परिवार में बेटी की शादी होती थी तो वो पूरे गाँव की बेटी की शादी मानी जाती थी, गाँव के लोग उस परिवार को दूध-दही के साथ चारपाई और बिस्तर आदि तक देते थे, जिससे वो मेहमानों को ठहरा सके, उनका स्वागत-सत्कार कर सके, पूरा गाँव 2-5 रुपये कन्यादान के रूप में देता था और बदले में वो भी गाँव के सभी परिवारों को जब उनके यहां बेटी की शादी होती थी, तो इसी तरह सहायता लौटाता था, आज बैंकेट हाल बन गए, टैंट हाउस आ गए, केटरर आ गए, शगुन देने के तरीके और नजरिये बदल गए, बड़े आदमी के यहां शादी में बड़ा लिफाफा और छोटे के यहां 100 -50 देने का चलन बन गया है, पर आज भी ज्यादातर आम परिवार में जब शादी सम्पन्न हो जाती है, तो रात में ही हलवाई और टैंट वाले भी वेटर और अन्य खर्चों के नाम पर तुरंत ही पैसे मांगने शुरू कर देते हैं और प्रधानमंत्री जी मैंने देखा है कि आम परिवार में आज भी वे लिफाफे खोलकर इस तरह के भुगतान
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  किये जाते हैं और जो लिफाफे बच जाते हैं, वो सुबह ही बाकी के भुगतान में निपट जाते हैं, ऐसे में चेक से शगुन देने जैसा सुझाव क्या व्यावहारिक है..?..ये बड़े लोग हैं, इनकी शादी में खर्च करने वाले बहुत होते हैं, कोई बिल मांगने नहीं आता, पर मेरा देश आज भी 80 प्रतिशत आम लोगों का देश है, जहाँ बेटी की शादी में हुए खर्चों से आम आदमी कई-कई साल तक तनाव मुक्त नहीं हो पाता। आपने तो आम परिवार में बचपन गुजारा है, आपको तो इन बातों का अहसास होगा ..?
आम आदमी के जीवन में क्या सपने हैं…?..केवल दो समय सकून की रोटी, एक घर और बच्चों को कहीं काबिल करके स्थापित कर देना, इसी के लिए वो पूरा जीवन संघर्ष में गुजार देता है, मेरे देश में हर आदमी को दो समय रोटी मिल जाए, इसकी भी दिक्कत है, आपने खुद खाद्य सुरक्षा कानून लागू किया है, यानि कि आप जानते हैं कि अभी हम दो समय खाना भी मुहैया नहीं करा पाए हैं, शिक्षा के स्तर को भी आप बेहतर जानते हैं, ऐसे में पेटीएम से गोलगप्पे या चाय वाले को भुगतान शहरी आदमी तो कर सकता है, लेकिन जिस देश में मोबाईल क्रांति के दौर में भी आज पुरानी पीढ़ी केवल हरे बटन से फोन सुनना और लाल बटन से बंद करना ही जानती हो, उस देश को कैशलेस इंडिया बनाने में आपको अभी लम्बा वक्त लगेगा। आपने 27 नवम्बर को मन की बात में सूरत की एक बेटी दक्षा को बधाई दी, जिसने केवल चाय पर शादी कर मिसाल स्थापित कर दी, आने वाले कुछ दिनों में आपके मंत्रिमंडल के सहयोगियों डॉ. महेश शर्मा व नितिन गडकरी के बच्चों की शादियां है…क्या ये भी केवल चाय पर शादी की मिसाल स्थापित करके आपके अभियान को बढ़ावा देंगे या केवल आम आदमी ही आपसे प्रभावित होता रहेगा । …..जय हिन्द..!   

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