मेथी की कड़वाहट में छिपे हैं बहुत गुण

मेथी की कड़वाहट में छिपे हैं बहुत गुण

methidanaमेथी को जीतबीजा, गंधकला, चंद्रिका जैसे नामों से जाना जाता है इसका स्वाद कड़वा होता है। आयुर्वेद में इसके गुणों की चर्चा में बताया गया है कि मेथी पाचनतंत्र की खराबी में पूर्ण रूप से लाभकारी है। इसके पत्तों की सब्जी बनायी जाती है व सूखे दानों को अन्य सब्जियों में भी डाला जाता है।
इसका उपयोग गठिया के मरीज के लिए अत्यन्त लाभकारी है। इस रोग में मेथी का सेवन गुड़ के साथ साग बनाकर किया जा सकता है।
मेथी के बीजों को दूध में पीसकर छान लें। फिर इसके रस को गर्म करके कान में डालें। इससे कान का बहना रूक जाता है।
मुंह की दुर्गन्ध दूर करने के लिए मेथी के बीजों को पानी में उबालकर खूब कुल्ला करें, दुर्गन्ध जाती रहेगी। मेथी की हरी सब्जी एसिडिटी, कब्ज, पेट दर्द जैसे रोगों में फायदेमंद है। इसके सेवन से पाचनतंत्र सक्रि य रहता है।
डायबिटीज के मरीज को मेथी के दाने पीसकर दूध के साथ सेवन करना चाहिए। शर्करा की मात्रा नियंत्रित रहती है।
मेथी का सेवन सूखा रोग, टांसिल्स, बुखार, बहुमूत्र आदि के लिए लाभकारी है। इसके दानों को बारीक-बारीक पीसकर सिर पर दही मिलाकर लेप करने से बाल मुलायम होते हैं और रूसी दूर होती है लेकिन इसके लिए आवश्यक है कि लेप के बाद सिर गर्म पानी से ही धोएं।
– राजेन्द्र सिंह सैनी

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