मानवता का हनन करते नक्सलवादी

मानवता का हनन करते नक्सलवादी

आतंकवादी तथा नक्सलियों द्वारा हमले सरकार का सिर दर्द बने हुए हैं। विकास के नाम पर राष्ट्र के वैज्ञानिक नई-नई मशीन, प्रयोग और दवाइयां बनाकर लोगों का इलाज करके उन्हें जीवन का अभयदान दे रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर आतंकी और नक्सली हमले लोगों को मौत के घाट उतार रहे हैं।
जिस गति से आज नक्सलियों के हमले हो रहे हैं और सेना के जवानों के साथ आम लोगों को नक्सली मार रहे हैं। वह किसी भी दृष्टि से राष्ट्र को बर्दाश्त नहीं हैं।
अपना विरोध सरकार को दिखाने और अपनी बातें मनवाने के लिए लोगों को मारना, यह कहां की सभ्यता और संस्कृति है।
कहीं न कहीं आज नक्सलियों द्वारा अपनी सेना बनाना बेरोजगार युवकों को काम देना खराब सोच का ही परिणाम है। ऐसा नहीं है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सरकार शिक्षा, रोजगार और विकास नहीं करती बल्कि सरकार तो देश के हर राज्य में विकास चाहती है और विकास के कार्य भी करती है लेकिन कुछ कट्टरपंथी सोच के लोग उसका लाभ नहीं उठाना चाहते।
दुर्व्यवहार की शिकार न बनें…फ्रेंडली रिलेशन रखें.!

नक्सलियों द्वारा पिछले आठ सालों में अपने क्षेत्र के स्कूलों को बंद करने, स्कूली भवनों को तोडऩे और बच्चों को शासन के खिलाफ भड़काने तथा उन्हें अपने हक में करने वाली वारदातें सामने आई हैं। नक्सलियों द्वारा बस्तर के दंतेवाडा और बीजापुर जिले में ही सैंकड़ों स्कूलों के भवनों को तोड़ा गया है तथा आदिवासी छात्रवासों को भी विस्फोट से उड़ाया है।
नक्सलियों के गांव-गांव में कैडर हैं तथा स्कूली बच्चों के साथ साथ ग्रामीण भी नक्सलियों को सूचना देने का काम करते हैं। इस प्रकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा और लोगों को राष्ट्र विकास के प्रति सोच बहुत कम है, चाहे वह डर के कारण हो या स्वयं से।
बुजुर्गों की सक्रियता बढ़ाता है चुकंदर…!

नुक्सान तो वे देश के साथ साथ अपना भी कर रहे हैं। इतिहास गवाह है हिंसा से किसी ने न तो न्याय हासिल किया है और न ही हिंसा के सामने कोई सरकार झुकी है। आखिर में अहिंसा का ही साथ लेना होता है और समर्पण का भाव रखना होता है। यही सच्ची मानवता है।
– नीरज भारद्वाज

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