मातृत्व के बाद की सौंदर्य सुरक्षा..एेसे रखें ध्यान..!

मातृत्व के बाद की सौंदर्य सुरक्षा..एेसे रखें ध्यान..!

सौंदर्यप्रिय महिलाओं को प्राय: मां बनने से कतराते हुए इसलिए देखा जाता है क्योंकि उन्हें डर होता है कि प्रसवोपरांत वे अपना सौंदर्य खो बैठेंगी। प्रसव के दौरान यदि सौंदर्य की सही देखभाल न की जाये तो इसका दुष्प्रभाव प्रसव के बाद होता है। इस अवधि में शरीर संबंधी अनेक परिवर्तन होते हैं। गर्भावस्था के दौरान उचित आहार, व्यायाम और पूर्ण विश्राम लिया जाये तो सौंदर्य बना रहता है।
प्रसवोपरांत शारीरिक स्थूलता
अधिक पौष्टिक भोजन लेने और आराम से लेटे रहने से मोटापा बढ़ता है और भारतीय स्त्रियों में यह प्रवृत्ति आम है। प्राय: प्रसव से पहले ही वे अपना ‘फिगर’ खराब कर बैठती हैं। इतना ही नहीं, अनेक रोगों को निमंत्रण भी देती हैं या डायटिंग आदि का सहारा खोजती है।
प्राकृतिक नियम के अनुसार मां बनने के साथ नारी के सौंदर्य में एक निखार आना चाहिए, विकार नहीं। विकार अक्सर नासमझी अथवा लापरवाही से ही आता है। ध्यान रखें, यही समय है स्वास्थ्य और सौंदर्य को संभालने का। प्रसव के तीन दिन के बाद से ही व्यायाम प्रारंभ कर दें जो लेटे – लेटे ही हो सकें। दो सप्ताह बाद फिर खड़े हो कर व्यायाम किये जा सकते हैं। यदि व्यायाम करने में असुविधा हो तो व्यायाम करना बंद कर दें। इस बारे में अपने डॉक्टरस परामर्श लेना जरूरी है ।
प्रसव के बाद जैसे कम पौष्टिक खुराक लेने व अधिक गरिष्ठ खुराक लेने से हानियां होती हैं, वैसे ही कैल्शियम, विटामिन प्रोटीन युक्त हल्का पौष्टिक और संतुलित आहार लेने की आवश्यकता होती है। इससे पेट नहीं बढ़ेगा, मोटापा नहीं आयेगा और स्वास्थ्य सौंदर्य निखरेगा।
प्रसव के बाद सक्रियता हर हालत में जरूरी है। तीसरे दिन के बाद ही अपने छोटे-मोटे कार्यो के लिए स्वयं निर्भर हुआ जा सकता है लेकिन छह सप्ताह तक थकने वाले काम न करें परंतु अपनी सक्रियता धीरे-धीरे अवश्य बढ़ाती जायें। अधिक विश्राम आपके लिए घातक हो सकता है। इसी प्रकार कमजोर हालत में अधिक थकान भी घातक हो सकती है।
प्रसव के बाद तीसरे दिन से लेटे लेटे हल्के व्यायाम कर सकती हैं जैसे लंबी सास लेकर कुछ देर रोकना, फिर बाहर निकालना, शरीर के विभिन्न अंगों को हिलाना डुलाना। प्रसव के तुरंत बाद सामान्य स्त्री के वजन में लगभग 5 किलो वजन और घटना चाहिए। इसके तीन दिन बाद डेढ़ से दो किलो वजन और घटना चाहिए। प्रसव के दो सप्ताह बाद जबकि गर्भाशय पूर्व अवस्था में सिकुड़ आता है, वजन लगभग एक किलो और घटना चाहिए।
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कमर पर झुर्रियां:-

प्रसवोपरांत प्राय: कमर पर झुर्रियां पड़ जाती हैं और त्वचा पर श्वेत दाग होने लगते हैं । बेहतर होगा गर्भावस्था के आखिरी तीन महीनों के दौरान जब पेट विकसित हो रहा हो, नियमित रूप से ऑलिव ऑयल द्वारा मालिश की जाये। यदि पेट पर झुर्रियां हो जायें तो भैंस के दूध में बादाम रोगन या जैतून का तेल(ऑलिव ऑयल) मिला कर थोड़ा गर्म करें और उससे नित्य मालिश करें, फिर नहा लें। प्रसवोपरांत यदि मालिश, व्यायाम या संतुलित आहार द्वारा लाभ नहीं हो रहा हो, विशेष रूप से पेट तथा नितंबों की चर्बी कम न हो रही हो तो कटि-स्नान विधि लाभकर सिद्ध होगी।
कटि-स्नान विधि:
कटि स्नान विधि में एक टब का प्रयोग किया जाता है। टब साफ, ठंडे पानी से लगभग तीन चौथाई भर लें और टब को दीवार इतने निकट रखिए कि आप दीवार से आसानी से पीठ टिका कर टब में बैठ सकें। दीवार से पीठ टिक जाये और पैर टब से बाहर रहे। इस प्रकार टब के पानी में पेट, कमर तथा नितंब डूबे रहने चाहिए। याद रहे टब में इतना पानी भरा हो कि नाभि पानी में डूबी रहे।
अब पेट को बिलकुल ढीला छोड़ दीजिए और थोड़ी देर पानी में बैठी रहिए। किसी मुलायम तौलिये को भिगोकर नाभि से निचले भाग पर दाये से बायें रगडि़ए। रगडऩे की क्रिया दायीं ओर कमर के किनारे से बायीं ओर कमर के किनारे तक तौलिया बिना उठाये जारी रखें।
पहले दिन कटि – स्नान केवल दस मिनट तक करें। फिर दो दो मिनट तक बढ़ाते हुए स्नान का समय बीस मिनट तक कर लें। कटि-स्नान नाश्ता करने से पहले करना चाहिए। गर्मियों में ठंडे पानी तथा शीत ऋतु में गुनगुने पानी का प्रयोग करें। सप्ताह भर में आप आश्चर्यजनक अंतर पायेंगी। कमर के मोटापे पर नियंत्रण पाने के लिए एक विशेष प्रकार की पेटी के इस्तेमाल करने से मांसपेशियों में रक्त संचार क्रिया रूक जाती है। इसका उपयोग न करें। प्रसवोपरांत डायटिंग भूल से भी नहीं करें।
व्यायाम क्रिया:
प्रसव के कितने दिन बाद से व्यायाम शुरू किये जाये, यह प्रसूता की स्थिति व शक्ति पर निर्भर करता है इसके लिए आप अपने डॉक्टरों से सलाह ले लें। शारीरिक सुविधा होने पर व्यायाम तुरंत बंद कर देना चाहिए।
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पीठ के बल व्यायाम:

पीठ के बल लेट जाइए। भुजाएं शरीर के आसपास हों। अब अपना सिर जमीन से लगभग 20 सें.मी. ऊपर उठाइये। इस क्रिया को कई बार दोहराएं।
पीठ के बल लेट जाइए। बांहें सीने पर रखें। अब नितंबों से ऊपर वाले शरीर का भाग जमीन से धीरे धीरे उठाएं और बैठने की स्थिति में आ जायें। बैठने की स्थिति में आने पर आगे झुकते हुए पैरों को छुएं। धीरे धीरे पहले सी स्थिति में आ जायें।
पीठ के बल लेट जायें। हाथ अगल बगल रखिए। पहले दायीं टांग धीरे धीरे उठाइए, फिर बायीं टांग। पूर्वावस्था में आने पर दोनों टांगों को एक साथ ऊपर उठाइए, पांव जमीन से लगभग 15 सें. मी. उठे रहें।
पीठ के बल सीधे लेट लाइए, दायीं टांग बिस्तर से उठा कर बायीं टांग के उपर से झुलाते हुए पार ले जाइए जिससे दायां पैर बिस्तर को छूने लगे। अब पहले-सी चित अवस्था में आकर बायीं टांग से व्यायाम पूरा कीजिए।
खड़े होकर व्यायाम
सीधे खड़े होकर दोनों भुजाओं को पहले बारी बारी, फिर एक साथ शरीर के दोनों ओर गोलाइयों में लगभग दस दस बार घुमाइये।
शरीर के दोनों ओर भुजाएं रखते हुए खड़ी हो जाइए। अब दायीं ओर अधिक से अधिक झुकती चली जायें लेकिन पीठ सीधी रहे। पहले सी अवस्था में वापस लौट कर अपना शरीर बायीं ओर झुकाते हुए व्यायाम पूरा करें। आगे झुकते हुए दोनों हाथों से दायां अंगूठा छुएं। फिर सीधी खड़ी हो कर पुन: अंगूठा छू कर व्यायाम पूरा करिए।
दीवार के सहारे पीठ लगाकर खड़ी हो जाये। एडिय़ां दीवार से लगभग 8 से.मी. दूर रहे। कंधे और पीठ दीवार से दबाते हुए अंदर की ओर श्वास लें। पेट पर तनाव महसूस होने पर कंधा ढीला छोड़ दें। व्यायाम के दौरान घुटने व कूल्हे एकदम सीधे रहने चाहिए।
बैठ कर व्यायाम:
घुटने मोड़ कर पैरों के बल बैठिए और शरीर का ऊपरी भाग आगे की ओर झुकाते हुए धीरे धीरे श्वास छोड़ें।
जांघों के बीच तकिया दबा कर जांघे सिकोडि़ए, फिर शरीर को़ ढीला छोड़ दीजिए। इस क्रिया को कई बार दोहराइए।
पेट के बल व्यायाम

पेट के बल लेटिए और शरीर का ऊपरी भाग अर्थात सिर, कंधा और वक्ष थोड़ा ऊपर उठाइए। घुटने बिना मोड़े अब टांगें थोड़ी ऊपर उठाइए जिससे शरीर वृत्त खंड आकार में आ जाये। अब हाथ पीछे ले जा कर पैरों को छूने की चेष्टा करें। पेट के बल उल्टे लेट कर हाथों को आगे फैला कर कुछ देर लेटी रहिए।
घुटनों के बल उकडू बैठें। दोनों बांहें आगे जमीन पर फैला कर सिर दोनों बांहों के बीच डाल दें। अब नितंबों को सिकोड़ते हुए जाघें परस्पर मिलायें।
– परवेश हांडा

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