मसाला ही नहीं…! अत्यंत गुणकारी औषधि भी है तेज़पत्ता

मसाला ही नहीं…! अत्यंत गुणकारी औषधि भी है तेज़पत्ता

 तेजपत्ता (तेजपत्र) ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में पाया जाता है। आमतौर पर इसका प्रयोग सब्ज़ी में मसाले के रूप में किया जाता है परंतु यह एक अत्यंत गुणकारी औषधि भी है। आइए, इसके औषधीय गुणों को जानें:-
-यह अत्यंत गर्म एवं उत्तेजक होने के कारण यौन शक्ति में वृद्धि करता है।
-इसके प्रयोग से गठिया रोग में आराम मिलता है।
-यह उदरशूल एवं अपच संबंधी पेट के रोगों में भी लाभ पहुंचाता है। इसके सेवन से भूख खुल कर लगती है।
-इसके सेवन से मूत्रविकार संबंधी तकलीफ में फायदा होता है।
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-सर्दी या गर्मी किसी भी कारण से सिरदर्द हो तो तेज़पत्ता ढंठल सहित पीस कर हल्का गर्म करके मस्तक पर लेप करें।
-मुंह, नाक, मल या मूत्र, किसी भी रास्ते से रक्त निकलने पर ठंडे पानी के एक गिलास से एक चम्मच पिसा हुआ तेज़पत्ता चूर्ण मिला कर हर चार घंटे में सेवन करने से रक्तस्राव बंद हो जाता है।
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-तेज़पत्ते के चूर्ण का हर तीसरे या चौथे दिन मंजन करने से दांत चमकने लगते हैं एवं कीड़े लगने का भय नहीं रहता।
-तेज़पत्ते को चूर्ण के रूप में पीसकर ताजे पानी के साथ सेवन करना चाहिए। इसका सेवन अल्पमात्र में ही करना चाहिए। व्यस्क लोगों के लिए खुराक 4 से 5 माशा एवं बच्चों के लिए 1 से 2 माशा से अधिक नहीं होनी चाहिए।
– कर्मवीर अनुरागी

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