मधुमेह को भी नियंत्रित करती हैं फनसी की फलियां..इंसुलिन के स्रावों में भी करती है वृद्धि

मधुमेह को भी नियंत्रित करती हैं फनसी की फलियां..इंसुलिन के स्रावों में भी करती है वृद्धि

french-beansफनसी का मूल वतन अमरीका माना जाता है परन्तु यह अपने भारत में राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश आदि अनेक राज्यों में भी पाई जाती है। यह लता वर्ग की फली है जिसका व्यवहार सब्जी के रूप में किया जाता है। सेमल की तरह हरी-हरी फलियां बीजों से युक्त होती हैं। फलियों का आकार 3 से 5 से. मी. तक होता है। अंग्रेजी में इसे फ्रेंच बींस के नाम से जाना जाता है। सेम की तरह इसकी सब्जी काफी स्वादिष्ट होती है।
आयुर्वेद के अनुसार फनसी की प्रकृति गुरू, स्निग्ध, शीतल, रोचक और पित्त नाशक मानी गयी है। शोथहर, वेदानास्थापन, दुर्गन्ध नाशक, व्रणशोधन, मूत्रल, ज्वरध्न, रक्तम्भन, अर्शांकुर, स्तनशिथिलता, कामशीतलता आदि अनेक बीमारियों में आयुर्वेद चिकित्सक इसके योगों का प्रयोग कर सफलतापूर्वक उपचार करते हैं।
यह कहना अनुचित नहीं होगा कि फनसी के रामबाण औषधि प्रभावों के कारण ही सब्जी से अधिक यह औषधि के रूप में प्रयोग की जाने लगी है। इसके प्रभावयुक्त गुणों को देखकर आज भारत की अनेक आयुर्वेदिक – हर्बल कंपनियां इस पर अनुसंधान का कार्य करके पेटेन्ट औषधि का निर्माण भी कर रही हैं।
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फनसी ज्ञान तन्तुओं को शक्ति व उत्तेजना प्रदान करती है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह इंसुलिन के स्रावों में भी वृद्धि करती है इसलिए इसका प्रभाव मधुमेह (डायबिटीज) के रोगी पर अत्यधिक पड़ता है। गोभी पत्ता के रस के साथ फनसी का रस व कच्चे करेले के रस को दो-दो चम्मच की मात्र में प्रतिदिन निराहार अवस्था मेेें लेते रहने से मधुमेह के लक्षण नियंत्रित रहते हैं तथा इस बीमारी का कुप्रभाव रोगी पर नहीं पड़ता है। हल्के-फुल्के व्यायाम के साथ आहार-विहार पर नियंत्रण रखकर अगर इस योग का प्रयोग किया जाए तो निश्चय ही मधुमेही स्वस्थ हो सकते हैं। बीमारी के बाद की शक्ति अक्षमता तथा गाउट के रोग में फनसी के रस को दिनभर में 15० मि. ली. तक पीना चाहिए। मधुप्रमेह के रोगियों के लिए इसकी मात्र 275 मि. ली. प्रतिदिन होना आवश्यक है। फनसी का रस आंतों में आहार का खमीर नहीं बनने देता तथा आंतों में स्थित मित्र जीवाणुओं को उत्तेजित करता है। इसका रस पेट और आंतों के उपदंश वाले रोगियों को बहुत आराम देता है। अर्श बवासीर के कष्टों को दूर करने में भी यह लाजवाब है। चर्मरोगों में, विशेषत: खाज-खुजली में इसका रस चमत्कारी प्रभाव को दिखाता है। गर्भवती औरत के पेडू पर गर्भ के निशान बन जाने पर उस निशान को मिटाने में भी इसका प्रयोग किया जाता है। अनेक प्रयोगों से यह सिद्ध हो चुका है कि फनसी का रस, चूर्ण और क्वाथ कायाकल्प कराने के साथ-साथ अनेक बीमारियों की रामबाण औषधि भी है। इसका प्रयोग आबाल-वृद्ध-नारी सभी पर समान रूप से किया जाता है। इसका किसी भी प्रकार से कोई ‘साइड इफेक्ट’ नहीं होता है। मधुमेह के रोगियों को इसका सेवन अवश्य ही करना चाहिए।
– आनंद कुमार अनंत 

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