भारत में लगातार बढ़ रही है अवसाद पीडितो की संख्या

भारत में लगातार बढ़ रही है अवसाद पीडितो की संख्या

नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में मानसिक अवसाद से पीड़ति लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है और लगभग 36 प्रतिशत भारतीयों के अपने जीवन में अपने जीवन में कभी न कभी अवसाद से ग्रस्त होने की संभावना हैं।
एक अनुमान के अनुसार भारत में लगभग पांच करोड़ लोग अवसाद से पीड़ति हैं और प्रत्येक 20 व्यक्ति में से एक व्यक्ति मानसिक रोगों से पीड़ति है। यह माना जा रहा है कि वर्ष 2020 तक मानसिक अवसाद पूरे विश्व में शारीरिक अक्षमता का एक बड़ा कारण होगा। भारत में वर्ष 2005 से 2015 के बीच मानसिक अवसाद से पीड़ति लोगों की संख्या में 18.4 प्रतिशत की वृद्धि हुयी है। दक्षिण पूर्व एशिया में अवसाद से पीड़ति लोगों की संख्या 8.6 करोड़ है और 15 से 29 वर्ष आयु समूह में आत्महत्या करने का दूसरा सबसे बड़ा कारण अवसाद पाया गया है। एक अध्ययन रिपोर्ट से पता चला है कि ऑफिस और कार्यस्थलों पर अवसाद से ग्रस्त लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है और यह हाल के दिनों में एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है। लोगों में होने वाली हर चार मानसिक समस्याओं में से एक’कार्यस्थल अवसाद के कारण होती है।
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मेलबर्न विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ची नग ने एक वक्तव्य जारी कर कहा कि लंबी कार्य अवधि,तय समय में काम करने का दबाव और जाम की स्थिति में घर से ऑफिस जाने में देरी ऐसे कारण है जिससे लोगों में मानसिक परेशानियां बढ़ती है। उन्होंने बताया,चार में से एक मानसिक स्वास्थ्य समस्या’कार्यस्थल अवसाद की वजह से होती है यह न केवल उत्पादकता को कम करता है, बल्कि व्यवसाय की लागत को भी प्रभावित करता है। इसलिए तकनीकी रूप से कर्मचारियों पर मालिकों का दबाव परोक्ष रूप से कंपनी को प्रभावित करता है और कंपनी की उत्पादकता और व्यापार को भी कम करता है। भारत की अगर बात करें तो पांच करोड़ लोग अवसाद से पीड़ति हैं जिसका मतलब है कि अनुमानित एक करोड़ भारतीय’कार्यस्थल अवसाद का शिकार हैं।

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