भारत के गृह मंत्री राजनाथ सिंह की सार्क सम्मेलन के लिए हुई पाक यात्रा की समीक्षा ‘जमीं पे पैर रखकर आसमां कुचल देते हैं’

भारत के गृह मंत्री राजनाथ सिंह की सार्क सम्मेलन के लिए हुई पाक यात्रा की समीक्षा  ‘जमीं पे पैर रखकर आसमां कुचल देते हैं’

Asha Tripathiजी हां। यह कोई मजाक और लतीफा नहीं, बल्कि भारतीय राजपूतों की शान में इस तरह के कसीदे अक्सर गढ़े और पढ़े जाते हैं। यह भी कहा जाता है कि मगरमच्छ की पकड़ और राजपूतों की अकड़ जबर्दस्त होती है। आप सोच रहे होंगे कि अचानक राजपूती शान की यहां चर्चा करने का औचित्य क्या है। हम उस विषय पर प्रकाश डाल रहे हैं, जो ना सिर्फ भारत-पाकिस्तान बल्कि इस वक्त पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। भारत-पाकिस्तान के तल्ख रिश्ते कोई नया नहीं है। इसे सुलझाने के लिए एक नहीं, हजार बार कोशिश की गई। इस सिलसिले में भारत और पाकिस्तान के उच्च पदस्थ राजनेता व राजनयिक सैकड़ों बार दोनों देशों में आ-जा चुके है। पर, 4 अगस्त 2016 को पाकिस्तान की सरजमीं पर जो हुआ, उसने ना सिर्फ रिकार्ड बनाया बल्कि इतिहास के पन्नों में भी स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। भारतीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान में जिस कदर उसे लताड़ लगाई, शायद ही किसी भारतीय नेता ने इससे पहले की है। पाकिस्तान में जाकर सबको मिमियाते हुए ही देखा-सुना गया है, लेकिन काबिल-ए-तारीफ राजनाथ सिंह की दहाड़ आज पूरी दुनिया में गूंज रही है। राजनाथ सिंह पूर्वांचल के राजपूत है। परम्परा के मुताबिक उन्हें अपनी शान में गुस्ताखी बर्दाश्त नहीं। सो, उन्होंने पाकिस्तान को बताया दिया जमीं पे पैर रखकर आसमां कुचल देते हैं।
पाकिस्ताान में सार्क देशों के गृह मंत्रियों की बैठक को लेकर जानकारी मिली कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह कश्मीार के मुद्दे को उठाने से गुस्सा गए। फलत: उन्होंने कांफ्रेंस भी बीच में ही छोड़ दी और लंच भी नहीं लिया। राजनाथ ने अपने भाषण में आतंकवाद के मुद्दे पर पाक को उसी की जमीं पर घेरा और कहा कि आतंकियों को शहीद के तौर पर महिमंडन नहीं किया जाना चाहिए। आतंक का समर्थन करने वाले देशों व संगठनों से भी कड़ाई से निपटा जाना चाहिए। भारत-पाकिस्तामन के गृह मंत्री की इस्लामाबाद में तनावपूर्ण माहौल में मुलाकात हुई। बताया जा रहा है कि पाकिस्ताान ने जब कश्मीर का मुद्दा उठाया तो राजनाथ सिंह गुस्से में पाकिस्तान से रवाना हो गए। खबर है कि पाक ने शिष्टाचार भी नहीं दिखाया, फलत: राजनाथ ने लंच भी नहीं किया। जानकार बताते हैं कि पाक के गृहमंत्री निसार अली खान ने जैसे ही कश्मीर मुद्दा उठाया राजनाथ अपने साथ आए डेलीगेशन के साथ कांफ्रेंस से बाहर आ गए। कश्मीर तनाव के मुद्दे को उठाए जाने से राजनाथ आवेश में आ गए। इस दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल व पाक के अफसरों के बीच भी तीखी बातें हुई। राजनाथ ने रवाना होने से पहले गुडबाय हैंडशेक भी नहीं किया और वे सीधे होटल गए और वहां से भारत के लिए रवाना हो गए। भारतीय पक्ष रखने के लिए उन्होंने उच्चायुक्त को भी जिम्मेदारी दे दी।
वहीं भारत सरकार के अनुसार भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने पहले ही बता दिया था कि संसद सत्र चल रहा है इस वजह से गृहमंत्री जल्दी रवाना होंगे। अफगानिस्तान और भूटान के बयानों के बाद राजनाथ सिंह ने आतंकवाद के खिलाफ कड़े शब्दों में बयान दिया। इससे पाकिस्तानी गृहमंत्री तिलमिला गए। जब भारतीय दल भारत के लिए रवाना हुआ तब भी पाक से कोई अधिकारी मौजूद नहीं था। 5 अगस्त को संसद में राजनाथ ने कहा कि आधिकारिक लंच में पाक के गृह मंत्री शामिल नहीं हुए। इसलिए मैं भी वहां नहीं गया। दूरदर्शन और एएनआई के पत्रकारों को भी अंदर जाने से रोका गया। पाक में सार्क देशों के गृह मंत्रियों की बैठक से लौटे गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने राज्यसभा में अपने दौरे को लेकर बयान दिया। राजनाथ ने कहा कि उन्होंने इस्लामाबाद में आह्वान किया कि किसी भी आतंकी को महिमामंडित नहीं किया जा सकता।
किसी भी देश का आतंकी दूसरे देश के लिए शहीद नहीं हो सकता है। राजनाथ ने बताया कि उन्होंने आतंकियों के प्रत्यर्पण के लिए कड़े नियम बनाने की वकालत भी की। सार्क देशों के गृहमंत्रियों ने भी एक सुर में आतंकवाद का विरोध किया। बैठक का एजेंडा सार्क ड्रग्स की रोकथाम और बच्चों की स्थिति से भी जुड़ा था। राजनाथ ने बताया कि उन्होंने ड्रग मॉनिटरिंग डेस्क में भारत में बच्चों की स्थिति और ऑपरेशन स्माइल जैसे मुद्दो से सार्क को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि भारत का संदेश मानवता के लिए था।
5 अगस्त को राज्यसभा में राजनाथ सिंह के इस बाबत बयान देने के बाद विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने उनके सुर में सुर मिलाया और कहा कि हमने सुना है कि पाक मीडिया ने आपकी स्पीच को ब्लैक आउट किया और जो होस्ट थे उन्होंने भी रिसीव नहीं किया। हम इसकी निंदा करते हैं। टीएमसी के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने भी राजनाथ की स्पीच ब्लैकआउट करने पर सवाल खड़े किए। बीएसपी अध्यक्षा मायावती ने कहा कि गृह मंत्री ने जो कुछ भारत की ओर से कहा है इसका हमारी पार्टी समर्थन करती है। इस मुद्दे पर सभी दलों को ऊपर उठकर साथ देना चाहिए लेकिन जो वहां आपके साथ हुआ उसका विरोध हमारी सरकार और मीडिया को दर्ज कराना चाहिए था। उन्होंने पूछा कि आप प्रधानमंत्री से बात करके भारत पाक के संबंधों पर क्या पुनर्विचार करेंगे। एसपी सांसद राम गोपाल यादव ने कहा कि आपने जिस सख्ती से बात की उसकी हम सराहना करते हैं और पाकिस्तान से इसी तरह बात करनी चाहिए क्योंकि पाकिस्तान नरमी से बात नहीं सुनने वाला है। जेडीयू सांसद शरद यादव ने कहा कि गृह मंत्री का वहां जाना पूरे देश की तरफ से स्वीकार हुआ और आपके साथ जो व्यवहार हुआ उसकी घोर निंदा करते हैं। शेड्यूल के मुताबिक राजनाथ को इस्लामाबाद में सार्क कॉन्फ्रेंस खत्म होने तक रुकना था और 4 अगस्त की रात 9 बजे दिल्ली लैंड करना था, लेकिन वे 4.40 बजे ही लौट आए और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को रिपोर्ट दी। राजनाथ सिंह के पाकिस्तान से लौटने के बाद भी भारत और पाकिस्तान की तरफ से बयानबाजी का दौर जारी है। राजनाथ के लौटने के बाद पाकिस्तान ने कहा कि इंडियन होम मिनिस्टर ने गुस्से में सार्क समिट छोड़ दी थी। पाकिस्तान के इंटीरियर मिनिस्टर ने एक बयान दिया। इसमें भारत का नाम लिए बिना कश्मीर में दमन का आरोप है।
खैर, जो हुआ सो हुआ। पर इस घटनाक्रम से एक बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की अक्सर गुफ्तगू होती रहती है। यानी ये दोनों नेता नहीं चाहते कि किसी तरह का विवाद बढ़े और प्यार बना रहे। भारत में लोकसभा चुनाव 2014 से पहले जनता के बीच पानी पी-पी कर पाकिस्तान को गरियाने वाले नरेन्द्र मोदी की नरमी भी आज के डेट में सवालों के घेरे में है। नरेन्द्र मोदी भी बिना बुलावे के नवाज शरीफ के घर अचानक चले गए थे। गले मिले, शरीफ की मां के पैर छुए। यानी इतनी मोहब्बत दर्शायी। लेकिन जब बात राजनाथ सिंह की हो तो उन्होंने बता दिया कि वो जिस जाति से ताल्लूक रखते हैं, उस बिरादरी का दोहरा चरित्र नहीं होता। जो कहते हैं, वो करते हैं। पाकिस्तान को यह भी जानकारी रखनी चाहिए कि राजपूत भारतीय उपमहाद्वीप भारत, पाकिस्तान, बाँग्लादेश और नेपाल, की बहुत ही प्रभावशाली जाति है, जो शासन और सत्ता के सदैव निकट रही है। अपनी युद्ध कुशलता और शासन-क्षमता के कारण राजपूतों ने पर्याप्त ख्याति अर्जित की है। 15 अगस्त 1947 को स्वतन्त्र हुए भारत की छह सौ रियासतों में से लगभग चार सौ पर राजपूत राजाओं का शासन था। भारत और पाकिस्तान, जिसे 15 अगस्त 1947 के पूर्व हिन्दुस्तान के नाम से ही जाना जाता था। बहरहाल, पाकिस्तान की सरजमीं पर ही उसे लताडऩा कमोबेश हर भारतीय को अच्छा लग रहा है। इतना तक सदन में पक्ष-विपक्ष दोनों ने एक सुर से राजनाथ सिंह फैसले को सही करार दिया।
पाकिस्तान में जिस मुद्दे पर राजनाथ सिंह को गुस्सा आया, वह मसला इस वक्त अंतरराष्ट्रीय बन चुका है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून भी कश्मीर के मुद्दे पर नजरें गड़ाए हुए हैं। 4 अगस्त को बान के उपप्रवक्ता फरहान हक ने कहा कि कश्मीर के मुद्दे पर बान का रुख बरकरार है। उन्होंने घाटी के संकट के बारे में कुछ ही सप्ताह पहले बयान दिया था। बान ने कहा कि वह हिज्बुल आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद कश्मीर में हुई हालिया झड़पों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने के लिए कहा था ताकि आगे हिंसा से बचा जा सके। बहरहाल, अब देखना यह है कि भारत-पाक रिश्ते किस दिशा में मुड़ते हैं।
आशा त्रिपाठी

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