भाजपा और गठबंधन के लिए मायावती के गढ़ सहारनपुर को तोड़ना बना चुनौती, सात सीटों पर 15 को वोटिंग, चुनाव प्रचार हुआ बंद

भाजपा और गठबंधन के लिए मायावती के गढ़ सहारनपुर को तोड़ना बना चुनौती, सात सीटों पर 15 को वोटिंग, चुनाव प्रचार हुआ बंद

सहारनपुर (गौरव सिंघल)। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती का गढ़ समझे जाने वाले सहारनपुर के सात विधानसभा क्षेत्रों में सेंध लगाने की जुगत में समाजवादी पार्टी (सपा)-कांग्रेस गठबंधन और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रत्याशियों को खासा पसीना बहाना पड़ सकता है। राज्य विधानसभा के दूसरे चरण में 15 फरवरी को होने वाले मतदान में सभी सात सीटों पर त्रिकोणीय संघर्ष के हालात हैं। गैर बसपाई दल बसपा के इस गढ़ को तोड़ने की पुरजोर कोशिश में जुटे है हालांकि वे इसमें कितने सफल होते है, वह यहां के 23 लाख 53 हजार 95 मतदाता तय करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर लड़ रही भाजपा के लिए नतीजे लोकप्रियता की कसौटी और केन्द्रीय मंत्रियों और सांसदों के कामकाज का बैरोमीटर बनेंगे। 
जिले की जनसंख्या 34 लाख 66 हजार 382 है जिसमें 42 फीसद मुस्लिम और 22 फीसद अनुसूचित जाति है। 69 फीसद ग्रामीण और 31 फीसद शहरी आबादी है। जिले की साक्षरता दर 70.49 फीसद है। पिछले तीन चुनावों में बसपा ने जिले की सात सीटों में से 2012 में चार,2007 में पांच सीटें जीती थी हालांकि 2014 में लोकसभा चुनाव में बसपा किसी भी सीट पर बढत नहीं ले पाई थी। भाजपा पांच सीटों पर और कांग्रेस के इमरान मसूद सहारनपुर देहात और बेहट समेत दो सीटों पर बढत बनाने में सफल हुए थे। पिछले चुनाव में 62 फीसद मतदान हुआ था। 
सहारनपुर जिले में चार हजार 314 नए मतदाता किसी भी उम्मीदवार के राजनीतिक भविष्य का उलटफेर करने में सक्षम हैं। युवा मतदाताओं में मुस्लिम युवकों का अखिलेश यादव और राहुल की नई बनी जोडी को लेकर और हिंदू युवाओं में मोदी को लेकर खासा क्रेज दिख रहा है। देवबंद ऐसी अकेली सीट है जिस पर सपा और बसपा के मुस्लिम उम्मीदवार आमने-सामने है। भाजपा के प्रत्याशी ब्रिजेश रावत मुस्लिम बंटवारे में ही अपनी जीत की संभावनाएं टटोल रहे है। लचर चुनाव प्रबंधन और भाजपा के टिकट के दावेदारों का रोष जरूर उनकी राह का रोडा बने है।
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भाजपा की जीत का दारोमदार मतदान प्रतिशत पर भी टिका है। बसपा के माजिद अली और सपा के माविया अली मुस्लिमों में अपनी ज्यादा से ज्यादा पकड़ दिखाने में लगे है। बसपा को 70 हजार दलितों का सहारा है। तीन लाख 26 हजार आठ सौ 64 मतदाताओं में करीब डेढ लाख मतदाता हिंदू है। सहारनपुर नगर सीट पर तीन लाख 92782 मतदाता है। यहां भाजपा के मौजूदा विधायक राजीव गुंबर और सपा के संजय गर्ग के बीच सीधा मुकाबला है। संजय गर्ग का यह लगातार सातवा चुनाव है।
वह दो बार विजयी रह चुके है। मुस्लिमों के सवा लाख वोटर उनकी ताकत बने है तो नोटबंदी की नाराजगी भाजपा की परेशानी का सबब बनी है। बेहट सीट पर बसपा इकबाल का मुकाबला कांग्रेस के नरेश सैनी से है। भाजपा के महावीर राणा संघर्ष को तिकोना बनाने में लगे है। नरेश सैनी की जीत मुस्लिम वोटों में सेंधमारी पर निर्भर करती है।
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यहां समीक्षक इकबाल को मजबूत देखते है। सहारनपुर देहात सीट पर दो बार के मौजूदा बसपा विधायक को कांग्रेस और भाजपा से तगडी चुनौती मिलती नहीं दिख रही है। भाजपा ने देवबंद के पूर्व बसपा विधायक मनोज चौधरी को और कांग्रेस ने नए चेहरे मसूद अख्तर को उम्मीदवार बनाया है। इस सीट से मायावती भी चुनाव जीत चुकी है। गंगोह सीट पर भाजपा प्रत्याशी पूर्व कांग्रेसी विधायक, पालिकाध्यक्ष एवं कांग्रेस उम्मीदवार नोमान मसूद (इमरान मसूद के भाई) और पूर्व बसपा विधायक महीपाल माजरा के बीच मुकाबला है। जिले की यह अकेली सीट है जहां कांग्रेस और सपा प्रत्याशी आमने-सामने डटे है। सपा के चौधरी इंद्रसेन हाईकमान की मनाही के बावजूद चुनाव लड़ रहे है।

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