भविष्य के संकेत देते हैं स्त्रियों के अंग…जानिये क्या है ….?

भविष्य के संकेत देते हैं स्त्रियों के अंग…जानिये क्या है ….?

2भारतीय साहित्यों में नारी मूलक विषयों पर बहुत चर्चाएं की गई हैं। नारियों के बाल, आंख, कपोल, होंठ, कमर, नितम्बों आदि की विशेषताओं को अनेक कवियों एवं शायरों ने बेझिझक अपना विषय बनाया क्योंकि नारियों की रचना ईश्वर ने भी फुर्सत के क्षणों में ही की है। नारी का मन, तन एवं अंग सभी कुछ पुरूषों से भिन्न एवं अनेक रहस्यों को समेटकर रखने वाले हुआ करते हैं।
ज्योतिष शास्त्र ने भी भविष्य बताने के लिए नारियों के अंगों का वर्णन किया है। इस लेख में स्तन, जंघा, कमर, बांह, योनि के आधार पर नारियों का भविष्य ब्रह्मलीन पं. तृप्तिनारायण झा शास्त्री द्वारा रचित पुस्तक महिलाएं एवं ज्योतिष के आधार पर विवरण प्रस्तुत है :-
जिस स्त्री का कंठ उभरा हुआ एवं पतला होता है, उसे अत्यन्त भाग्यशाली माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार वह स्त्री मधुर बोलने वाली, सुशीला, पति की प्रिया एवं परिवार को सम्भाल कर चलने वाली होती है। इसके विपरीत जिस स्त्री का कंठ सपाट एवं मोटा होता है, वह कर्कशा, पति को धोखा देने वाली, अत्यधिक सेक्सी एवं परिवार में विघटन पैदा करने वाली हुआ करती है।
नीचे की ओर झुकी एवं सुडौल स्तनों वाली नारी सौभाग्यशालिनी होती है। दायीं ओर झुका स्तन यह बताता है कि वह नारी सर्वप्रथम पुत्र की मां बनेगी। अगर स्तनों के चूचूक (निपल) का झुकाव बायीं ओर हो तो वह प्रथम प्रसव के बाद बेटी की मां कहलाएगी। अगर चूचूक का खिंचाव ऊपर की ओर हो तो वह नारी संतान-सुख से वंचित रहती है।
स्तनों की गोलाई एक समान होने पर वह स्त्री अपने पति को आजीवन यौनतुष्टि देने वाली मानी जाती है। अगर दोनों स्तनों की गोलाई में अन्तर होता है तो वह नारी परपुरूष गामिनी होती हे। स्तनों के ऊपर शंख के समान आकार दिखाई दे तो वह नारी सौ वर्ष तक जीवित रहती है। स्तनों पर तिल होना सौभाग्य का सूचक होता है। चूचूक के छेद जिस औरत के बडे होते हैं, वह पुत्र के बजाय अधिक पुत्रियों को जन्म देती है। छोटे-छोटे छिद्रों से युक्त स्तनों वाली महिला पुत्रों को अधिक जन्म देती है।
स्तन का अग्र भाग भीतर की ओर झुका होने पर यह बताता है कि स्त्री अनेक यौन रोगों से ग्रस्त रहेगी। अपनी उम्र से अधिक स्तनों का विकास इस बात का प्रतीक है कि उक्त बच्ची सेक्स की क्रियाओं का अनुभव कर चुकी है। इसी प्रकार उम्र बढने पर भी स्तनों का विकास न होना यह बताता है कि उक्त नारी अत्यधिक तनावग्रस्त रहती है।
जंघा (नितम्ब) का भरा होना यह बताता है कि नारी स्वस्थ एवं सहृदय है। अगर दोनों जंघाएं आपस में सटती हों तो नारी का दांपत्य जीवन सुखमय नहीं रह पाने का संकेत देता है। इसके विपरीत दोनों जंघाओं के बीच से (सावधान की मुद्रा में खडे होने पर) एक गिलास निकलने भर जगह बचती है तो वह नारी सब प्रकार से अपने पति को सुखी रख सकती है। जंघाओं का थुलथुल करना इस बात का प्रतीक होता है कि वह नारी अनेक भोग्या होगी। इसके विपरीत सम्पुष्ट जंघा वाली औरत ऐश्वर्यशालिनी होती है। मांसल, चिकने, लाल तथा रोओं विहीन जंघा वाली लडकी किसी ऐश्वर्यशाली पुरूष की पत्नी होती है।
पतली कमर एवं लम्बी बांह वाली लडकी या स्त्री अनेक प्रकार के भोगों को भोगती है। मोटी कमर तथा छोटी बांह वाली लडकी या स्त्री परपुरूषगामिनी होती है तथा अपने पति को कष्ट देने वाली सिद्घ होती है। मोटी बांह वाली तथा मोटी चमडी एवं रोमयुक्त बांह वाली स्त्री शत्रुओं को यौन संतुष्टि प्रदान करने वाली, चंचला, लक्ष्मी को दूर करने वाली तथा जीवन भर असन्तुष्ट रहने वाली होती है। पतली बांह वाली, नर्म चमडी वाली एवं रोमयुक्त विहीन स्त्री हर प्रकार से अपने पति को संतुष्ट रखते हुए धन धान्य से पूर्ण रहती है। जिस युवती की योनि की ऊपरी त्वचा रूखी, अधिक बालों से युक्त, भुगांकुर हल्का लाल व उभार लिये होता है वह वैधव्यता को प्राप्त करती है तथा यौनसुख प्राप्ति के लिए व्याकुल रहती है। इसके विपरीत जिसकी योनि त्वचा चिकनी, सपाट, कम बालों वाली और भगांकुर हल्का गुलाबी होता है वह पतिव्रता, सुशीला एवं जीवन भर दूसरों की सहायता करने वाली होती है।
योनि का ऊपरी भाग पुष्ट एवं निचला भाग तंग होने पर उस नारी को ल्यूकोरिया, प्रदर रोग, गर्भाशय रोगों से जूझना होता है। इसके विपरीत जिस स्त्री का ऊपरी भाग सपाट एवं निचला भाग लचीला होता है, वह स्त्री अपने पति का पूर्ण पे्रम प्राप्त करती है। अन्य अनेक पुरूष भी उससे मोहित होते है। कोमल, विषमता रहित तथा उन्नत वाली योनि वाली स्त्री पतिव्रता, धर्मात्मा एवं यशस्विनी होती है। छिन्न भग्ना औरत कुटिला एवं कलहप्रिया होती है।
-पूनम दिनकर

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