‘भगवान की शरण में जो जाता है उसका होता है कल्याण’

‘भगवान की शरण में जो जाता है उसका होता है कल्याण’

khatuलखनऊ । श्री श्याम परिवार लखनऊ के तत्वावधान में बीरबल साहनीमार्ग स्थित श्री खाटू श्याम मन्दिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के सातवें व अन्तिमदिन शनिवार को कोलकाता के कथा व्यास पण्डित बाल व्यास श्रीकांत जी शर्मा ने कहा कि भगवान की शरण में जो भी जाता है उसका भगवान कल्याण करते हैं। शरण आने वाले लोगों के कल्याण के लिए भगवान अपने ऊपर कलंक तक ले लेते है। लेकिन शरणागति कोनिराश नही करते हैं। भगवान को जिसने भी स्वीकार किया वह भगवान का हो गया। इसीलिए कहा गया है कि ‘हरि को भजे से हरि का होई‘ भगवान शरणागति को स्वीकार करने के साथ-साथ समाज में उसके सम्मान को प्रतिष्ठा भी देते हैं।
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उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की आठ पटरानियां और 16,100 रानियां थी। कर्मकांड के 16100 मंत्र है। इन्होंने भगवान के साथ-साथ रमण की इच्छा व्यक्त की थी। इसके बाद से कन्या के रुप में धरती पर आये। 16,100 सौ कन्याओं को भौमासुर नामक एक असुर ने बन्दी बना लिया था। भगवान ने इस असर को मार कर इनका उद्धार किया।
मुजफ्फरनगर शहर से गौरव प्रत्याशी घोषित, अबदुल्लाह राणा चरथावल, कँवर हसन बुढ़ाना से
इसके बाद इन कन्याओं को उनके घर भेजने का प्रस्ताव दिया। तब इन्होंने कहा कि वे असुर के जेल में रह चुकी है, समाज में उन्हें विवाह के लिए कौन स्वीकार करेगा और कौन समाज में प्रतिष्ठा दिलायेगा, जिसको कोई स्वीकार नही करता है उसे भगवान स्वीकार कर लेते हैं।
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बाल व्यास श्रीकांत जी महाराज ने कहा कि भगवान शरणागत को नही छोड़ सकते हैयह मानी हुयी बात है। इसी लिए जो उनकी शरण में जता है उसका कल्याण होता है। राम और कृष्ण दोनों ने ही नारियों के सम्मान की रक्षा की है। राम ने सीता के उद्धार के लिए रावण और अन्य असुरों का संघार किया था।  

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