बोलचाल को मोहक बनाइये..शिष्ट भाषा मन मोह लेती है..!

बोलचाल को मोहक बनाइये..शिष्ट भाषा मन मोह लेती है..!

पत्नी का भाई होता तो साला ही है किंतु हम उसे साला कह कर तो नहीं बुलाते। छोटा हो तो भैया, बड़ा हो तो भाई साहिब कह कर ही संबोधित करते हैं। यह साधारण शिष्टाचार की बात है। सूरदास का सम्बोधन सामान्यत: अंधे के लिए होता है। अंधा व्यक्ति इस संबोधन को सामान्य ढंग से लेता है, इस का बुरा नहीं मानता मगर किसी अंधे को आप अंधा सम्बोधित करके देखिए, वह बिगड़ जाएगा। बुरा भला कहने लगेगा। आस पास खड़े सुनने वाले भी इसे आप की अशिष्टता मानेंगे।
बोलचाल में शिष्टाचार आवश्यक है। शिष्ट भाषा अच्छा प्रभाव डालती है, मन मोह लेती है। लठ्ठ मार भाषा में बोलने वाले से लोग दूर ही रहना चाहते हैं। ‘तू’, ‘तुम’ से संबोधित होना किसी को भी अखर जाता है। ‘आप’ का सम्बोधन सम्मानजनक है-बोलने वाले के लिए भी और सुनने वाले के लिए भी।
ओछा संबोधन तो बच्चों तक को भी बुरा लगता है। निकटता दर्शाने हेतु भी ‘तुम’, ‘तू’, ‘तेरा’ बोलना उचित नहीं है। शिष्ट बोलचाल में शिक्षा को भी दखल हासिल है परन्तु पढ़े लिखे लोगों में भी ओछी भद्दी भाषा बोलने वाले मिल जाते हैं। शिष्ट बोलचाल की नींव बचपन में परिवार के वातावरण में ही पड़ जाती है।
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‘प्लीज’, ‘थैंक-यू’, ‘सारी’, ‘माई प्लैजऱ’ आदि शब्द हमारी बातचीत को गरिमा, शालीनता व ठहराव प्रदान करते हैं। विनम्रता का पुट दे देते हैं। इन के क्षेत्रीय पर्यायवाची भी प्रयोग में लाए जा सकते हैं किंतु साधारण व्यवहार में यही शब्द ही अधिक प्रचलित हो गया है। कहते हैं न कि एक ‘सारी’ सारी कड़वाहट, कठिनाई, कहासुनी पर अविलम्ब विराम लगा देती है। हां, शर्त यह है कि ‘सारी’ बोलने वाले के हाव भाव भी उस की जबान का साथ दे रहे हों।
‘थैंक-यू’ कहने में हम सर्वाधिक कंजूसी करते हैं। वास्तव में हम कहना तो चाहते हैं किंतु इस का अभ्यास न होने से मौके पर यह शब्द हमारी जबान से निकल ही नहीं पाता। ‘थैंक-यू’ बिना खर्च की वह सौगात है जो पाने वाले को अंदर तक भिगो देती है। गदगद कर देती है। कुछ लोग सोचते हैं कि हम ने काम कराया, उस का पैसा दिया, फिर ‘थैंक-यू’ कहने का क्या प्रयोजन।
यह सही सोच नहीं है। ‘करूणा दोनों को धन्य कर देती है।’ (मर्सी इज टवाइस ब्लैस्ड) की भान्ति ‘धन्यवाद’ भी देने और पाने वाले दोनों को गुदगुदा देता है।
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हमारे ‘थैंक-यू’ अथवा ‘धन्यवाद’ कह देने से सामने वाले की थकावट दूर हो जाती है।
अपने हाव-भाव, चाल-ढाल की भान्ति अपनी बोलचाल को भी आकर्षक, सुसंस्कृत व मोहक बनाइए। आपकी लोकप्रियता में तो वृद्धि होगी ही, स्वयं आप को भी मानसिक संतोष मिलेगा, अच्छा लगेगा।
-ओम प्रकाश बजाज

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