बेहद खतरनाक है ध्वनि प्रदूषण गर्भस्थ शिशु के लिये

बेहद खतरनाक है ध्वनि प्रदूषण गर्भस्थ शिशु के लिये

Pregnant Woman Belly. Pregnancy Conceptअत्यधिक ध्वनि प्रदूषण से गर्भस्थ शिशु विकलांग हो सकता है और भला चंगा मनुष्य मानसिक रूप से विक्षिप्त। यह कोई कोरी चेतावनी नहीं बल्कि वैज्ञानिक तथ्य है। विशेषज्ञों का मानना है कि विकलांग पैदा होने वाले शिशुओं में से तीन प्रतिशत की विकलांगता की वजह ध्वनि प्रदूषण यानी अत्यन्त तेज शोर शराबा ही है। शोर प्रदूषण का एक अत्यन्त घातक माध्यम है।
अदृश्य ध्वनि प्रदूषण से गर्भस्थ शिशुओं के विकलांग होने का पूरा खतरा रहता है। सामान्य मनुष्य इसके दुष्प्रभाव से नहीं बच सकते। सीधी सरल भाषा में कहा जाये तो ध्वनि प्रदूषण व्यक्ति को पागल बना सकता है।
ध्वनि प्रदूषण औद्योगिक व आधुनिक युग की देन है। शोर के चक्रव्यूह में मानव आज चारों तरफ से घिरा हुआ है। प्रात: उठने के समय अलार्म के शोर से लेकर रात के सोते समय टीवी के बीच पूरा दिन व्यतीत होता है। वैज्ञानिक स्तर पर जो अनुसंधान हुए हैं उनमें अब यह अनुभव किया जाने लगा है कि शोर एक अदृश्य प्रदूषण है जो धुंध की तरह मनुष्य के स्वास्थ्य पर घातक प्रभाव डालकर उसे धीरे-धीरे मृत्यु की ओर अग्रसित कर रहा है।
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ध्वनि प्रदूषण की तेजी हर दस वर्ष में दो गुनी होती जा रही है। यदि यह गति जारी रही तो आने वाले दशकों में नगरों और महानगरों में रहने वालों की एक बहुत बड़ी संख्या उनकी हो जायेगी जो बहरे होंगे।
अवांछित ध्वनि को शोर कहते हैं। अनचाही ध्वनि जब आस-पास के परिवेश में इतनी मात्रा में पहुंचने लगे कि उससे जनस्वास्थ्य को खतरा पैदा होने लगे, तब शोर प्रदूषण का रूप धारण कर लेता है।
इस प्रकार ध्वनि प्रदूषण से तात्पर्य हुआ पर्यावरण में अनचाही ध्वनि की मात्रा में उपस्थिति। प्रश्न किया जा सकता है कि इस बात का निर्धारण कैसे हो कि अमुक ध्वनि अवांछित है या नहीं। इसके लिए, जनस्वास्थ्य, पर्यावरण संवैधानिक उपबंध और सिविक सेन्स जैसे मानकों को अपनाना पड़ेगा। इन मानकों के आधार पर ध्वनि प्रदूषण का मूल्यांकन किया जा सकता है।
इसके अतिरिक्त हर व्यक्ति को शोर की प्रतिक्रिया भी एक समान नहीं होती है। यही वजह है कि किसी बूढ़े व्यक्ति के लिए पॉप संगीत शोर है तो युवा के लिए मनोरंजन का साधन। और तो और, पशुपक्षियों की भी ध्वनि के स्रोत में एक समान प्रतिक्रिया नहीं होती।
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ध्वनि प्रदूषण के कारणों पर जब हम दृष्टिपात करते हैं, तब औद्योगिक शहरीकरण और जनसंख्या विस्फोट पर हमारा ध्यान जाता है। प्राकृतिक और मानवीय संसाधनों को अधिकाधिक दोहन करने के मोह के कारण ध्वनि प्रदूषण बढ़ा। ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव काफी हानिकारक होते हैं। कुछ मनोवैज्ञानिकों का विश्वास है कि ध्वनि प्रदूषण के कारण अच्छे खासे स्वस्थ व्यक्ति को भी अनिद्रा तथा बेचैनी हो जाती है तथा कभी-कभी इसके प्रभाव से लोग हिंसा पर भी उतारू हो जाते हैं।
वैज्ञानिकों की मान्यताओं के अनुसार शोर भले ही कम स्तर का क्यों न हो किन्तु लगातार उसके कानों में पड़ते रहने से श्रवण संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि ध्वनि प्रदूषण शारीरिक तथा मनोवैज्ञानिक दोनों दृष्टियों से प्रभावित करता है और रक्तचाप तथा हृदय गति को बढ़ाता है। प्राय: इसके परिणाम से तनाव, झक्कीपन, डर आदि पैदा होते हैं।
-सुभाष चन्द्र मिश्र

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