बेनामी संपत्तियों पर शिकंजा…निर्णायक प्रहार !

बेनामी संपत्तियों पर शिकंजा…निर्णायक प्रहार !

 नोटबंदी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेनामी संपत्ति पर कड़े और निर्णायक प्रहार की घोषणा कर डाली है। जब नोटबंदी के बाद बेनामी संपत्ति पर सरकार का डंडा चलेगा तो फिर देश में कालेधन रखने वाले, लूट, भ्रष्टाचार, कदाचार और अपराध में शामिल लोगों पर किस प्रकार की विपत्ति टूटेगी? शायद इसकी कल्पना तक अभी नहीं की गई है।
ट्रांजेक्शन कानून 2016 के मुताबिक मां, बहन, भाई, रिश्तेदार व करीबी मित्र के नाम पर खरीदी गई प्रापर्टी बेनामी संपत्ति के दायरे में आएगी। इसी कानून का सहारा ले कर सरकार ने अब मानकों के इतर और अज्ञात आय स्रोत से खरीदी गई संपत्ति मालिकों पर नकेल कसनी शुरू कर दी है।
नोटबंदी के बाद जमीन और फ्लैटों की कीमत आधी हो गई है। जाहिर तौर पर यह कमाल कालेधन पर प्रहार का है। यह सच है कि कालेधन की हनक ने आम आदमी के जीवन को मोहताज बना डाला था और खास आदमी जो लूट, भ्रष्टाचार और अपराध के हिस्सेदार थे, वे मालामाल हो रहे थे। एक अनुमान के मुताबिक देशभर की आधी से ज्यादा दौलत दूसरों के नाम पर कर रखी है। अकूत संपत्ति को बचाने के लिए औरों का सहारा लेेते रहे हैं ताकि कभी जांच हो तो यह कह कर बचा जाए कि उक्त संपत्ति हमारी नहीं है।
बेनामी संपत्ति खून-पसीने की कमाई नहीं होती है। बेनामी संपत्ति कोई देश के कानून और संविधान का पालन कर कमाई नहीं जाती है। बेनामी संपत्ति कोई आदर्शवाद पर खड़ी नहीं होती। बेनामी संपत्ति के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद उन लोगों में खलबली मच गई है जिन्होंने बेनामी संपत्तियों का किला खड़ा कर रखा है। बेनामी माफिया खुद को बचाने के लिए कानून के जानकारों से राय लेते दिखाई दे रहे हैं।
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बेनामी संपत्ति देश के कानून और संविधान को ताक पर बनाई जाती है, सरकारी टैक्स की लूट पर बनाई जाती है। सरकारी नीतियों में भ्रष्टाचार कर बेनामी संपत्ति बनाई जाती है। सरकारी गरीबों के कल्याण के लिए हजारों योजनाएं संचालित करती हैं। गरीबों के कल्याण को ले कर संचालित होने वाली योजनाओं में सरकारी पैसे पानी की तरह बहाए जाते हैं। जिन लोगों के ऊपर सरकारी योजनाओं को लागू और संचालित करने की जिम्मेदारी होती है, वे लोग बंदरबांट कर बेनामी संपत्ति बनाते हैं।
ऐसी बेनामी संपत्तियों पर सरकार की नजर पिछले दो सालों से थी। ऐसी संपत्तियों को जब्त करने की तैयारी भी कई दिनों से चल रही थी। इसके लिए केंद्र सरकार ने आईटी व अन्य जांच एजेंसियों की टीमों को सक्रिय कर दिया है। बेनाम दौलत कालेधन का अहम हिस्सा माना जाता है। इस हिस्से को समेटने के लिए अब सरकार ने जाल बिछा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कालेधन के बाद काली संपत्ति पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने डंके की चोट पर कहा है कि कालेधन के बाद अब काली संपत्ति वाले बचने वाले नहीं हैं।
राष्ट्रीय राज्यमार्ग के नजदीक अचल संपत्ति की बड़ी परियोजनाओं की जांच के लिए सरकार ने आयकर विभाग की दो सौ टीमों को कार्रवाई करने का आदेश दिया है। इससे बड़ी मछलियां हलकान हैं। यह भी सही है कि अधिक कालाधन बेनामी संपत्तियों में छिपा हुआ है। राजनीतिज्ञ, अधिकारी, कर्मचारी, बड़े पत्रकार, वकील, डॉक्टर, इंजीनियर, व्यापारी और औद्योगिक कार्पोरेट घराने बेहिसाब बेनामी संपत्तियां खड़ी कर रखी हैं। ऐसे अधिकांश लोग भूमिगत हो गए हैं। कालेधन की छाया में बनाई गई बेनाम दौलत को सरकार कैसे भी बाहर लाना चाहती है।
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कार्रवाई के लिए सरकार ने जो टीम पीछे लगाई हैं, ये टीमें व्यावसायिक फ्लैटों, हाईवे के किनारे की जमीनें और औद्योगिक जमीनों की जांच कर रही हैं। इसके अलावा देश के प्रमुख शहरों के वीआईपी इलाकों में मौजूद जायदादों की जांच भी की जा रही है। सबसे अधिक अचल संपत्ति में फ्लैट, कोठी, मॉल, होटल आदि हैं। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरू, कोलकाता, अहमदाबाद आदि देश के बड़े-बड़े शहरों के फ्लैटों, कोठियों, होटलों, मॉलों का सही सर्वेक्षण किया जाए तो साफ पता चलेगा कि इनमें से अधिकतर संपत्तियां कालेधन पर खड़ी हैं।
हाल ही में जारी हुई ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट पर गौर करें, तो उसका साफ कहना है कि हिंदुस्तान अगर भ्रष्टाचार से मुक्त हो जाए, तो मुल्क से गरीबी का उन्मूलन अपने आप हो जाएगा। देखा जाए तो इस लिहाज से केंद्र की मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार के सह उत्पाद कालाधन और बेनामी संपत्ति पर चोट मार कर सही काम किया है। आम आदमी को अर्थव्यवस्था की बारीकियों की समझ होती नहीं है, इसलिए आम आदमी यह समझ ही नहीं पाता है कि उनका जो जीना मुश्किल हुआ है उसके पीछे कारण क्या है?
कारण जाहिर तौर पर अराजक, आक्रामक और बेलगाम पूंजी का खेल है। कालेधन की बिसात पर ही पूंजी बेलगाम होती है। जब बेलगाम हो चुकी क्रय शक्ति पर लगाम लगेगी तो निश्चित तौर पर वस्तुओं की मांग घटेगी। अर्थशास्त्र का नियम है कि जब क्रय शक्ति घटती है, वस्तुओं की मांग कमजोर होती है तो फिर वस्तुओं का मूल्य स्थिर रहता है या फिर घटता है। भ्रष्टाचार से मुक्ति के बाद आम आदमी को राहत मिलेगी। इस कदम से देश के सकल घरेलू उत्पाद में तेजी से वृद्धि होगी और शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और बिजली-पानी जैसी सुविधाओं में भी धन की कमी नहीं होगी।
– नरेंद्र देवांगन

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