बेटी-बेटे का रिश्ता करते समय किसी बात को नहीं छिपाएं..!

बेटी-बेटे का रिश्ता करते समय किसी बात को नहीं छिपाएं..!

आम तौर पर देखा जाता है कि माता-पिता बेटी का रिश्ता करते समय उसके ससुरालवालों के समक्ष उसकी बीमारी का भेद छुपा कर उसे नर्क की जिदंगी जीने को मजबूर कर देते हैं, क्योंकि जब ससुराल वालों के सामने यह भेद खुलता है तो लड़की को अपनाने को तैयार नहीं होते। लड़की की बीमारी से ज्यादा वे अपने साथ धोखा होने को ज्यादा महत्त्व देते हैं।
उन्हें इसी बात का भय होता है कि जिसने अब इतना बड़ा धोखा दिया है, उससे जिंदगी भर साथ निभाने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। कई मामलों में तो लड़की खुद को बेबस या अपमानित महसूस कर आत्महत्या तक कर लेती
है। आखिर मां-बाप क्यों अपने हाथों ही अपनी बेटी का जीवन बर्बाद कर देते हैं।
इसका अहम् कारण यह है कि भारतीय माता-पिता आज भी लड़कियों के प्रति अपनी संकीर्ण सोच को बदल नहीं पाए हैं। उनको अब भी लड़की मां-बाप पर बोझ लगती है। जैसे ही लड़की 20-22 वर्ष की होती है, उन्हें उसकी शादी की चिन्ता सताने लगती है। वे जैसे-तैसे कोई लड़का ढूंढ कर उसकी शादी कर देना चाहते हैं। जब उन्हें कोई उपयुक्त वर मिलता है तो वे बिना किसी को भनक लगे उसके साथ बेटी का रिश्ता कर देते हैं।
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वे खुद तो वर पक्ष के लोगों से बेटी की बीमारी छुपाते ही हैं, अगर लड़की, लड़के को बताना चाहती है तो वे उसे सख्ती से मना कर देते हैं। ऐसा करते समय वे इसके परिणामों के बारे में गंभीरता से नहीं सोचते हैं।
कई बार देखा जाता है कि अगर वर पक्ष के लोगों को सब कुछ सच बता दिया जाए तो शायद बात बन भी सकती है।
शादी-ब्याह गुड्डे-गुडिय़ों का खेल नहीं। यह पूरी जिंदगी का बंधन होता है जिसमें विश्वास होना अत्यंत आवश्यक है परंतु कई माता-पिता यह विश्वास होने से पहले ही उसे तोड़ देते हैं। ऐसे मामलों में अधिक पीड़ा लड़की को ही झेलनी पड़ती है।
सिर्फ लड़की के माता-पिता ही नहीं, लड़के के माता-पिता भी बेटे का रिश्ता करते समय उसकी बीमारी के बारे में नहीं बताते हैं जैसा कि राजीव के माता-पिता ने किया।
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बेटे-बेटी का रिश्ता करने से पहले अभिभावकों को उनके भविष्य पर भी गौर करना चाहिए। अगर वे किसी गंभीर रोग से ग्रस्त हैं तो शादी करने का विचार छोड़ उनके इलाज की तरफ ध्यान देना चाहिए।
आम तौर पर कई अभिभावकों की राय होती है कि शायद उनका बच्चा शादी के बाद ठीक हो जाएगा और वह इसका इलाज कराने की बजाय शादी रूपी बेडिय़ां उसके पैरों में डाल देते हैं।
उन्हें यह अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि उनका एक झूठ उनके बच्चे का जीवन तबाह कर देगा। झूठ व धोखे का नतीजा हमेशा बुरा ही निकलता है। अत: ऐसा करने से पहले इसके परिणामों पर अवश्य सोच लेना चाहिए।
– भाषणा बांसल

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