बिबेक देबराय ने किसानों की आय को कर के दायरे में लाने की वकालत की

बिबेक देबराय ने किसानों की आय को कर के दायरे में लाने की वकालत की

नई दिल्ली। नीति आयोग ने कर नीति आयोग ने कर चोरी रोकने और सुधार के जरिये कर तंत्र को सरल बनाने के साथ ही कर का दायरा बढ़ाने के लिए व्यक्तिगत कर पर मिलने वाली छूटों को समाप्त करने के और किसानों की आय को कर के दायरे में लाने की वकालत की है।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढिय़ा और आयोग के सदस्य रमेश चंद की मौजूदगी में आयोग के सदस्य बिबेक देबराय ने तीन वर्षीय कार्ययोजना के प्रारूप पर संवाददाताओं से कहा कि व्यक्तिगत आय पर दी जाने वाली छूट को समाप्त किया जाना चाहिये। अब भी ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले या गांवों में रहने वाले अपनी सभी आय को कृषि आय बताते हैं और उस पर कोई कर नहीं लगता। उन्होंने पुरजोर तरीके से कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वालों की सभी आय कृषि आय नहीं होती है और उन पर भी उसी तरह से कर लगाया जाना चाहिये जैसे शहरों में रहने वाले लोगों की आय पर व्यक्तिगत कर लगता है। उन्होंने कहा कि किसानों की आय निर्धारित करने के लिए उनकी तीन वर्ष या पांच वर्ष की आय के आधार पर औसत आय की सीमा तय की जानी चाहिये। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि किसानों की आय पर कर लगाने का प्रस्ताव नीति आयोग की तीन वर्षीय कार्य योजना में है या सात वर्षीय रणनीति या 15 वर्षीय विजन दस्तावेज में शामिल होगा। श्री पनगढिय़ा ने रविवार को नीति आयोग की शासकीय परिषद की बैठक में 15 वर्षीय विजन दस्तावेज, सात वर्षीय मध्यकालिक रणनीति और तीन वर्षीय कार्ययोजना का प्रारूप रखा था। तीन वर्षीय प्रारूप पर मुख्यमंत्रियों से भी सुझाव मांगे गये हैं। श्री पनगढिय़ा ने आज कहा कि 31 मार्च को 12वीं पंचवर्षीय योजना के समाप्त होने के मद्देनजर तीन वर्षीय कार्ययोजना का प्रारूप सार्वजनिक किया गया है और इस पर आम लोगों के साथ ही सभी संबद्ध पक्षों की राय भी मांग की गयी। अभी यह सिर्फ प्रारूप है। उन्होंने कहा कि इसमें वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के उपायों के साथ ही कर दायरा बढाने, कर चोरी रोकने और कर तंत्र को सरल बनाने की वकालत की गयी है।
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उन्होंने कहा कि कर तंत्र को सरल बनाने के लिए वर्तमान के सभी सीमा शुल्कों को एकीकृत दर के दायरे में लाया जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि प्रशासन में सुधार के उपाय भी इसमें सुझाये गये हैं तथा घाटे में चल रही सरकारी कंपनियों को बंद करने के रोडमैप के साथ ही रणनीतिक विनिवेश के लिए 20 सरकारी उपक्रमों की पहचान की गयी है। स्वास्थ्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में सरकार की भूमिका बढ़ाने की वकालत की गयी है। इसमें तीन वर्ष के सरकारी राजस्व और व्यय का ढांचा भी बनाया गया है। इसके अतिरिक्त वर्ष 2018-19 तक राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के तीन फीसदी तक लाने और वर्ष 2019-20 तक राजस्व घाटे को जीडीपी के 0.9 प्रतिशत तक लाने का प्रस्ताव किया गया है।
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आयोग के सदस्य श्री चंद ने कहा कि किसानों की आय वर्ष 2022 तक दोगुनी करने के लिए कई महत्वपूर्ण उपाय सुझाये गये हैं जिसमें प्रौद्योगिकी के उपयोग के साथ ही बेहतर गुणवत्ता के बीज और सिंचाई की सुविधा बढ़ाने पर जोर दिया गया है। किसानों को उच्च आय देने वाले वानिकी, पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए प्रोत्साहित करने की बात कही गयी है।

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