बाल जगत/जानकारी… चावल का सफरनामा

बाल जगत/जानकारी… चावल का सफरनामा

चावल भारत के प्रमुख खाद्यान्नों में से एक है। मुख्यतया चावल और गेहूं ही भारत के मुख्य खाद्यान्न हैं। लगभग 30 वर्ष पूर्व तक ज्वार, बाजरा और मक्का उत्तर भारत में बहुतायत से उगाए जाते थे। मक्का की रोटी और सरसों का साग कभी पंजाबियों का प्रिय भोजन था मगर अब ज्वार, बाजरा और मक्का चलन से लगभग बाहर हो गये हैं और चहुं ओर अब गेहूं और चावल का साम्राज्य कायम है।
ऐसा माना जाता है कि मनुष्य की उत्पत्ति के समय से ही चावल भी अस्तित्व में है। सिंधु घाटी सभ्यता की खुदाई में भी धान पाया गया। प्राचीन भारत में चावल का काफी वर्णन है, गेहूं का नहीं। इससे ऐसा माना जाता है कि चावल का मूल भारत ही है और गेहूं संभवत: बहुत बाद में बाहर से यहां आया।
अनेक खोजों से भी इस तथ्य की पुष्टि होती है कि चावल अर्थात धान भारत का ही मूल खाद्यान्न है यद्यपि इंडोनेशिया तथा चीन में भी चावल की उपज का इतिहास भी अत्यंत प्राचीन है। पश्चिम के देशों में चावल का प्रवेश बहुत बाद में हुआ।
शोधकर्ताओं के मुताबिक दक्षिण के कई राज्य आज जहां हैं वहां कभी समुद्र का उथला भाग था जहां चावल हर वर्ष उगता था। बाद में वहां मानव ने उसे खाद्य के रूप में अपनाया। इस खाद्यान्न पर निर्भरता बढ़ी तो उसकी प्राचीन मानव खेती करने लगा। उत्तर में धान दक्षिण से आया और फिर उत्तर भारत में ईरान, इराक पहुंच गया। वहां से यह पश्चिम ओर दुनिया के अन्य भागों में पहुंचा।
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दुनिया भर में चावल की सात हजार से अधिक किस्में पायी जाती हैं जिनमें चार हजार से अधिक किस्में केवल भारत में पायी जाती हैं। भारत के दक्षिण राज्य केरल में करीब 500 किस्में हैं। इन किस्मों में निरंतर वृद्धि होती रहती है। अनेक कृषि अनुसंधान केंद्रों में चावल पर शोध चलता रहता है।
इन शोधों में शोधार्थियों का प्रयास रहता है कि चावल अधिक उपज देने वाला, अधिक स्वादिष्ट और अधिकाधिक पोषक गुणों से संपन्न हो यद्यपि चावल को अधिक उपज वाला बनाने और आकर्षक बनाने के फेर में चावल में अनेक विकृतियां भी आयी हैं।
एक बार लखनऊ के इंडस्ट्रियल टॉक्सीकोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट ने परीक्षण कर बताया था कि चावल में रसायनिक अथवा नकली रंगों का मिश्रण करने से ऐसी प्रक्रिया शुरू हो सकती है जो कैंसर को जन्म दे सकती है। यद्यपि, रोगनाशक दवाइयों के अत्यधिक प्रयोग से चावल में विकृतियां आयी हैं और यह मानव स्वास्थ्य के लिए पूर्णत: सुरक्षित नहीं रहा है, तो भी अभी इसका गेहूं जैसा बुरा हाल नहीं हुआ है।
गेहूं में पानी कम प्रयोग किया जाता है। दो-तीन सिंचाइयों से गेहूं की फसल हो जाती है जबकि धान की फसल को 2-3 माह लगातार पानी चाहिए। पानी के अत्यधिक इस्तेमाल से रासायनिक खाद, घास व कीटनाशक आदि काफी हद तक बेअसर हो जाते हैं जबकि गेहूं में नहीं हो पाते।
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चीन के महान दार्शनिक कन्फ्यूशियस ने कहा था कि शुद्ध, सात्विक और निष्पाप जीवन बिताने के लिए चावल एक आदर्श खाद्य है। अध्ययनों में पाया गया है कि चावल खाने वाले लोग गेहूं खाने वालों की अपेक्षा अधिक शांतिप्रिय होते हैं। धार्मिक कार्यों में चावल का विशेष महत्व है। चावल हल्का, शीघ्र पचने वाला खाद्य है। यह कोलेस्ट्रॉल रहित है अत: हृदयरोगियों के लिए सुरक्षित है। इसमें वसा व सोडियम भी कम होता है।
चावल मुख्यत: भारत, बांग्लादेश, बर्मा व थाइलैंड में प्रचुर मात्रा में उगाया जाता है। चावल गर्म जलवायु की फसल है, तो भी इसे लगातार पानी चाहिए। भारत से विदेशों को काफी मात्रा में चावल का निर्यात होता है।
धनिक लोग बासमती चावल अधिक पसंद करते हैं। कभी उत्तर भारतीयों की पहली पसंद खुशबूदार तिलक चंदन चावल था किंतु कम पैदावार के कारण लोगों ने इसे उगाना बंद कर दिया।
– अयोध्या प्रसाद भारती

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