बाल कहानी: लाला की आंख खुली

बाल कहानी: लाला की आंख खुली

लाला अम्बाप्रसाद की ‘अम्बा जनरल स्टोर’ के नाम से मेन बाजार में दुकान है। घर गृहस्थी को आम जरूरतों का लगभग सारा सामान उनकी दुकान पर मिल जाता है। रेट भी सही हैं, इसलिये दुकान खूब चलती है।
दुकान पर दो नौकर हैं। एक जवान लड़का है, दूसरा अधेड़ आयु का है। अधेड़ आयु के नौकर का नाम पन्नालाल है। वह उनका पुराना और वफादार नौकर है। पन्नालाल, लाला जी की कोठी के बाहर
बने एक कमरे में अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहता है। रात को दुकान बंद करके वह लाला जी के साथ ही घर आता है।
लाला अम्बाप्रसाद तो इतने मोटे, तोंदुल और थुलथुल हो गये थे कि दुकान से उठकर ग्राहक को सामान देना उनके बस की बात नहीं थी। उन पर मोटापा दिनोंदिन बढ़ता जा रहा था। कारण था लाला जी का चटोरा और पेटू होना। सामने जाती कोई चाट पकौड़ी की ठेली दिखी नहीं कि सेठ जी के मुंह में झट पानी भर आता था। बगैर खाये वे रह नहीं सकते थे।
एक दिन पन्नालाल ने अपने मालिक अम्बाप्रसाद जी से कहा-मालिक, मोटापा आप पर दिनों दिन हावी होता जा रहा है। आप तो जानते ही हैं कि अधिक मोटा आदमी समाज में उपहास का पात्र बनता है। गरिष्ठ, तले भुने, मिर्च मसालेदार चटपटे व्यंजनों से जीभ की तृप्ति भले ही होती हो लेकिन इनके खाते रहने से सारे शरीर को इसका परिणाम भुगतना पड़ता है। मोटापे के कारण अनेक रोग खड़े हो जाते हैं। उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग आदि मोटापे और गलत खानपान का ही परिणाम हैं। अभी आपकी उम्र ही क्या है परंतु मोटापे के कारण चलना तक दूभर है।
ऐसा नहीं है कि अम्बाप्रसाद अपने नौकर पन्नालाल की बात से सहमत नहीं थे। कई बार उन्होंने ठाना कि अब सब छोड़कर वे दाल, सब्जी, रोटी और दूध, फल पर निर्भर रहेंगे और मोटापा बढ़ाने वाले पदार्थों को छुएंगे तक नहीं लेकिन जीभ के वशीभूत होकर सब भूल जाते थे।
पन्नालाल मालिक की अंट शंट और अधिक खाने की आदत से दुखी थी। नौकर था, अधिक कह नहीं सकता था।
एक दिन हल्की बारिश पड़ रही थी। आकाश बादलों से घिरा हुआ था। पन्नालाल ने अम्बालाल से कहा-‘मालिक मुझे थोड़ा काम है, इसलिये दुकान बंद करने से एक घंटा पहले छुट्टी चाहिये।
अंदाज अलग-अलग दुपट्टे के
लाला अम्बाप्रसाद ने पन्ना लाल को एक घंटा पहले जाने की अनुमति प्रदान कर दी।
रात को अम्बालाल दुकान बंद करा कर रोज की तरह ब्रीफकेस में दिनभर की बिक्री के रूपये लेकर अकेले ही घर की ओर चल पड़े।
उनके घर जाने का थोड़ा-सा रास्ता एकाकी और सुनसान था। वहीं पर अचानक उन्हें एक भारी आवाज सुनाई पड़ी-रूको, यह ब्रीफकेस चुपचाप मेरे हवाले कर दो। आनाकानी करोगे तो यह छुरा पेट में उतार दूंगा।
लुटेरा मुंह को कपड़े से छुपाये, हाथ में लम्बा-सा छुरा थामे लाला के सामने खड़ा था। भय से लाला जी थर-थर कांपने लगे। ब्रीफकेस में हजारों रूपये थे। उन्हें कुछ सूझ नहीं रहा था।
लुटेरे ने थोड़ी-सी नर्मी दिखाते हुए कहा-‘मैं तुम्हें पांच मिनट का समय देता हूं। अगर तुम पांच मिनट के अंदर भाग कर मेरी पकड़ से बाहर हो गये तो मैं तुम्हें छोड़ दूंगा नहीं तो ब्रीफकेस छीन कर ले जाऊंगा।
लाला अम्बाप्रसाद लुटेरे की बात सुनते ही भाग पड़े लेकिन थोड़ी दूर ही जाकर उनके हाथ पैर जवाब दे गये। दिल जोर से धड़कने लगा। सांस फूल गई। आगे चलना मुश्किल हो गया। वे हांफते हुए बैठ गये। लुटेरे ने आकर ब्रीफकेस हाथ से छीना और चलता बना।
बेचारे अम्बाप्रसाद लुटे-पिटे, निराश, थके हारे से घर आ गये। किसी से कुछ नहीं कहा लेकिन उसी समय उन्होंने प्रण कर लिया कि जीवन के दुश्मन मोटापे को दूर करके ही रहेंगे।
लाला अम्बाप्रसाद ने दिनचर्या और खान-पान ही बदल दिया। सवेरे जल्दी उठते और नित्य कर्मों से निपटकर लम्बी सैर को निकल पड़ते। नाश्ते में फल और दूध लेते। भोजन हल्का, सादा और कम करते। केवल दो ही समय भोजन करते और बीच में कुछ नहीं लेते थे। सप्ताह में एक दिन उपवास रखते। पूजा-पाठ करते। घर वाले उनमें अचानक इतना बड़ा बदलाव देखकर हैरान थे।
गांधी जी के आदर्श
दो महीने के भीतर ही लाला अम्बा प्रसाद का कायाकल्प हो गया। शरीर से दो तिहाई मोटापा गायब हो चुका था और अजीब चुस्ती फुर्ती भर गई थी। दुकान का काम वे स्वयं भी निपटाने लगे थे।
एक दिन पन्नालाल ने कहा-‘मालिक, आपने तो चमत्कार कर दिखाया है। अब तो आप वास्तविक उम्र से भी कम दिखाई पडऩे लगे हैं। आपकी फुर्ती देखने लायक है। अचानक मोटापा घटाने की प्रेरणा आपको कहां से मिली?
लाला अम्बिका प्रसाद ने पन्नालाल को ब्रीफकेस लुटने वाली बात बताई और कहा-पन्नालाल, मैेंने उसी समय प्रण कर लिया था कि जीवन भर के लिये अभिशाप बने इस मोटापे से मुक्ति पाकर ही दम लूंगा। जब मन में ठान लिया जाये तो कुछ भी असंभव नहीं रहता। मेरा उदाहरण तुम्हारे सामने हैं।
पन्नालाल ने अम्बाप्रसाद के सामने दोनों हाथ जोड़कर कहा-‘मालिक मुझे क्षमा करना। उस दिन का लुटेरा मैं ही हूं। मैंने ही आपका ब्रीफकेस लूटा था। यदि मैं यह सब न करता तो शायद आप अपने को सुधार न पाते। यह मेरा सौभाग्य है कि मेरी युक्ति से बीमारी से आपको मुक्ति मिल गई। अम्बाप्रसाद पन्नालाल की बात सुनकर आश्चर्य में था।
पन्नालाल ने अम्बाप्रसाद को उनका ब्रीफकेस सौंपते हुए कहा-‘ब्रीफकेस खोलकर देख लीजिये मालिक कि रूपये पूरे भी हैं।
अम्बाप्रसाद ने कहा-”मुझे तुम पर पूरा भरोसा रहा है। मैं तुम्हें इनाम के तौर पर पांच हजार रूपये देता हूं। अपने बच्चों के साथ दीपावली धूमधाम से मनाना।
अम्बाप्रसाद खुश था। पन्नालाल खुश था।

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