बाल कथा: समय की कद्र करें

बाल कथा: समय की कद्र करें

सूरज एक बारह वर्षीय बच्चा था। वह बहुत ही समझदार तथा पढ़ाई में होशियार था और व सदा कक्षा में अव्वल आता था, इस कारण सब उसे बहुत प्यार करते थे। विद्यालय में भी सभी लड़के उससे दोस्ती रखते थे।
एक दिन जब सूरज की बोर्ड की परीक्षाओं में केवल दो महीने रह गये तो उसकी क्लास का एक लड़का रोहित जो पढ़ाई में बहुत कमजोर था, उसके पास आया और बोला – सूरज हमारे यहां कालोनी में लड़कों की एक नई किक्रेट टीम बनी है। क्या तुम भी उसमें शामिल होगे।
सोहन ने उससे कहा – अभी बोर्ड की परीक्षाएं शुरू होने में केवल दो महीने हैं। मैं अभी शामिल नहीं हो सकता।
उसका उत्तर सुनकर रोहित बोला – तुम तो होशियार लड़के हो, तुम तो यदि देर से भी पढ़ोगे, तो भी अव्वल ही आओगे। अब यदि तुम कुछ समय खेलोगे, तो क्या बिगड़ेगा।
रोहित की बातें सुनकर सोहन ने सोचा – शायद रोहित सही कह रहा है। मैं तो एक महीने पहले भी पढूंगा तो भी अव्वल आ ही जाऊंगा, इसलिए अभी पढऩे से अच्छा है कि पहले एक महीने मैं किक्रेट टीम में शामिल हो जाऊं और बाद के एक महीने पढ़ लूं।
इस तरह सोहन किक्रेट टीम में शामिल हो गया। पहले तो शुरू में वह कम खेलता था लेकिन फिर वह धीरे-धीरे अपना ज्यादा समय किक्रेट खेलने में ही बर्बाद करने लगा।
जब जबकि उसकी परीक्षाओं में केवल एक महीना ही रह गया था, उसके पिताजी ने उससे कहा – बेटा सोहन, तुम्हारी परीक्षाओं में एक ही महीना रह गया है। अब तुम्हें क्रिकेट से ज्यादा पढ़ाई में ध्यान देना चाहिए।
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उनकी बात सुनकर सोहन ने कहा – पिताजी, आप चिंता न करें। अभी तो एक महीना शेष है। मैं तो यदि पन्द्रह दिन भी पढ़ा तो भी अव्वल ही आऊंगा।
पिताजी ने भी उसकी बात को महत्त्व देते हुए ज्यादा कुछ नहीं कहा। धीरे-धीरे पन्द्रह दिन ही रह गये लेकिन फिर भी सोहन की लापरवाही कम नहीं हुई।
वह हर रोज यह सोचकर कि अभी तो इतने दिन है, तैयारी हो जायेगी, पढ़ाई की तरफ लापरवाही करता गया।
धीरे-धीरे समय बीता। परीक्षा में केवल एक ही दिन रह गया लेकिन सोहन की लापरवाही खत्म न हुई। वह यह सोचकर कि अभी तो काफी घंटे हैं, मैं तैयारी कर लूंगा, किक्रेट खेलने पहुंच गया।
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इस तरह वह बिना कोई तैयारी किये परीक्षा देने पहुंच गया और फिर आखिर वही हुआ जिसका कभी उसने ख्यालों में भी नहीं सोचा था। हर वर्ष अव्वल आने वाला विद्यार्थी इस बार परीक्षाओं में फेल हो गया।
उस दिन मोहन को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसी दिन से उसने यह कसम खाई कि अब वह कभी भी भविष्य में लापरवाही न करते हुए समय की कद्र करेगा और अपने सभी काम सही समय पर करेगा।
– सपना जैन

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