बाल कथा: बेरी का बड़ा काम

बाल कथा: बेरी का बड़ा काम

mosquito-copyअंडे से प्यूपा और प्यूपा से बने मच्छर बेरी ने जब अपने आसपास दृष्टि दौड़ाई तो उस की तरह अनेक मच्छर इधर उधर बैठे दिखाई दिए। कई मच्छर तो अभी प्यूपा की ही स्थिति में थे।
वह भी धीरे-धीरे चल कर अपने साथियों के पास बैठ गया। अभी बेरी उडऩे में पूरी तरह समर्थ नहीं था। उस ने अपने साथियों की बातचीत सुनी तो उसे पता लगा कि उसे भी दूसरे मच्छरों की तरह सब का खून चूस कर अपने को जीवित रखना है।
बेरी ने अपने पास बैठे मच्छर से पूछा, ‘क्या तुम भी सब प्राणियों को तंग करोगे, सभी का खून चूसोगे?
‘हमें तो यही पता है। तुम बताओ तुम क्या सब से कुछ अलग ही करने वाले हो, उस के साथी ने कहा।
बेरी ने कहा, ‘हां, मैं तो सब की तरह नहीं बनना चाहता। देखना, मैं कुछ अलग ही कर के दिखाऊंगा। पहले मैं खूब घूमूंगा, उस के बाद मैं तुम्हें बताऊंगा कि मैंने क्या अलग से किया।
बेरी की बात सुन कर कुछ और मच्छर उस के पास आ गए परंतु उस की बात किसी की समझ में नहीं आई।
जब अनोखी समझ वाले बेरी मच्छर ने देखा कि अब वह पूरी तरह से उड़ सकता है तो वह घूमने के लिए निकल पड़ा।
बेरी बहुत जगह गया और उस ने उनेक दृश्य देखे। नदियां, पर्वत, जंगल, इंसानी बस्तियां, पशु पक्षियों के रहने की जगह आदि परंतु कुछ दृश्य उस के मन को छू गए और तब उसे समझ में आया अब उस का क्या काम है।
उस ने सोचा, ‘जहां कहीं भी अत्याचार हो रहा है, उस स्थान के अत्याचारियों को मैं सताऊंगा। मैं उन्हीं का खून चूस कर जीवित रहूंगा।
बेरी एक ऐसी जगह गया जहां उस ने देखा था, बहुत से जवान लोग आराम से बैठे गपशप मार रहे थे और बूढ़े, कमजोर व्यक्ति दिनभर काम कर रहे थे। उसे बहुत बुरा लगा।
बेरी ने 4-5 व्यक्तियों को बड़े जोर से काटा और तुरंत वहां से उड़ गया।
उड़ते-उड़ते बेरी जब एक घर के पास से गुजर रहा था तो उस ने देखा कि एक घर में खड़े घर के सदस्यों पर कुछ भयानक से दिखने वाले लोग बंदूकें ताने खड़े हैं। 2-3 व्यक्तियों को तो उन्होंने मार भी दिया है। सभी डरे और सहमे हुए से खड़े हैं। एक बच्चा चीखा तो उन्होंने उसे भी वहीं खत्म कर दिया।
उस समय बेरी को बहुत क्रोध आया। बेरी अब उस बंदूकधारी को काटने के लिए जाने लगा तो उसे लगा कि वह अकेला कुछ नहीं कर सकता। वे लोग तो अधिक थे। बेरी ने इधर-उधर दृष्टि दौड़ाई तो उसे सामने पेड़ पर मधुमक्खियों का छत्ता दिखाई दिया।
बेरी तुरंत उड़ कर मधुमक्खियों के पास पहुंचा। उसने उन्हें सारी बात बताई और अपनी योजना भी उन्हें समझाई। मधुमक्खियों को भी योजना पसंद आई। वे तुरंत बेरी के साथ चल पड़ीं। उन्होंने अपने और साथियों को भी अपने साथ ले लिया।
देखते ही देखते मधुमक्खियों के झुंड उन बंदूकधारियों के पीछे पड़ गए। मधुमक्खियों ने उन बंदूकधारियों के सारे शरीर पर काटना शुरू किया। अब उन के शरीर बुरी तरह सूज गए थे और लाल हो गए थे। उन की आंखों पर भी मधुमक्खियों ने काट लिया था।
अब कुछ साहसी पुरूषों ने अपने सिर पर कपड़ा डाल कर उन बंदूकधारियों से बंदूकें छीन ली और उन्हें बांध कर सीधा नजदीक के पुलिस थाने में ले गए और पुलिस को सौंप दिया।
मधुमक्खियां खुश थीं और बेरी मच्छर का धन्यवाद कर रही थी कि उसने उन से अच्छा काम करवाया।
मधुमक्खियों ने सुना कि सब लोग उन का धन्यवाद कर रहे थे। लोगों को क्या पता था कि यह साहस सब से पहले बेरी ने किया और उन से अच्छा काम करवाया नहीं तो वे स्वभाववश सभी को काटती थीं। वे सोचती थी, वे तो छोटी सी हैं, कैसे किसी की मदद कर सकती हैं परंतु एक छोटे से मच्छर बेरी ने वह काम कर दिखाया जो एक बड़ा आदमी भी मुश्किल से कर पाता।
यह किस्सा बेरी के साथी मच्छरों के कानों में भी पड़ा। वे भी भन्न भन्न करते आ गए और बेरी को शाबाशी देने लगे। उन्होंने यह संकल्प किया कि आगे से वे भी उस के भलाई के अभियान में उस के साथ काम करेंगे। उस के बाद से बेरी मच्छरों का नेता बन गया और उन सब ने मिल कर गलत काम करने वाले अनेक लोगों को सबक सिखाया और यह बताया कि एक निर्बल प्राणी भी यदि संकल्प कर ले तो वह बड़े से बड़ा काम कर सकता है।
-नरेंद्र देवांगन

Share it
Top