बाल कथा: गीदड़ ले कर चला बरात

बाल कथा: गीदड़ ले कर चला बरात

 एक था बुद्धू जुलाहा। कोई लड़की उससे शादी करने को तैयार नहीं होती। एक गीदड़ उसका दोस्त था। उसने जुलाहे से कहा, ‘राजा की लड़की के साथ मैं तुम्हारी शादी रचाऊंगा।’
एक दिन गीदड़ शादी की बात करने राजा के पास चल पड़ा। पगड़ी, अच्छे कपड़े और जूते पहन कर, वह जब राजा के पास पहुंचा तो राजा ने सोचा, यह जरूर कोई बड़ा पंडित है।
गीदड़ ने पूछा, ‘महाराज, क्या हमारे राजा के साथ आप अपनी लड़की की शादी करेंगे?’
असल में जुलाहे का नाम राजा था। राजा ने पूछा, ‘तुम्हारे राजा कैसे हैं?’ गीदड़ ने बढ़-चढ़ कर उसके गुणों का वर्णन किया।
राजा बोला, ‘तुम्हारे राजा से ही मैं अपनी लड़की की शादी करूंगा।’
खुश हो कर गीदड़ जुलाहे के पास लौटा तो देखा कि जुलाहे ने इतने कपड़े बुन लिए हैं कि गांव के हर आदमी को एक-एक कपड़ा दिया जा सकता है। गीदड़ ने एक-एक कपड़ा गांव वालों को दे कर कहा, ‘हमारे दोस्त के साथ राजा की लड़की की शादी होगी। हरेक को न्योता है।’
आठवें दिन बरातियों की फौज ले कर गीदड़ राजमहल की ओर चल पड़ा। राजा का महल जब नजदीक आ गया, तब गीदड़ ने सबको बुला कर कहा, ‘अब तुम लोग मिल कर गाना शुरू करो। मैं राजा को जा कर खबर कर देता हूं।’
शौक अपने-अपने

गीदड़ को देख कर राजा खुश हो गया। शोर सुन कर, उसने पूछा, ‘ये आवाजें कैसी हैं?’
गीदड़ ने कहा, ‘यह बरातियों की आवाज है।’
इतने आदमियों की आवाजें सुन कर राजा घबरा गया। तब गीदड़ ने कहा, ‘मैं सबको वापस भेज देता हूं।’
राजा ने खुश हो कर गीदड़ को इनाम में रूपए दिए। गीदड़ ने उन रूपयों से हरेक को खाना खिलाया। सब खुश हो कर चले गए। फिर जुलाहे को ले कर वह राजा के पास आया। जुलाहे को उसने सिखा दिया, ‘खबरदार, तुम कोई बात मत करना। अगर करोगे, तो शादी नहीं होगी।’
खाने के समय जुलाहा जितना खा सका, खा गया। बाकी वह चादर में बांधने लगा। लोगों ने पूछा तो गीदड़ ने बताया, ‘हमारे राजा ज्यादा नहीं खाते। वह बचा खाना चादर में बांध कर गरीबों को दान दे देते हैं। एक गरीब को बुलाइए और चादर दे दीजिए।’
आकर्षक होंठ बढ़ाते हैं नारी का सौंदर्य…!

जब जुलाहा सोने गया तो देखा, पलंग पर रेशमी बिस्तर, ऊपर मच्छरदानी लगी हुई है। यह सब उसने जिंदगी में कभी नहीं देखा था। पहले तो वह पलंग के नीचे घुस गया, फिर मच्छरदानी के ऊपर सोने लगा। सब टूट-टाट कर नीचे गिर पड़ा। जुलाहा रोने लगा, ‘पहले धान काटता था, कपड़े बुनता था, वही जिंदगी अच्छी थी। अब राजकुमारी के साथ शादी करके मेरी कमर ही टूट गई।’
राजा की लड़की यह सब देख-सुन कर बहुत रोई। फिर गीदड़ को भी डांटा मगर वह बहुत सयानी थी, किसी से कुछ नहीं कहा। तीर्थयात्र के बहाने पिता से आज्ञा ले कर, वह एक दूर देश में चली गई। वहां बड़े-बड़े पंडितों से पढ़वा कर जुलाहे को विद्वान बना दिया। राजा के गुजरने के बाद उसी को राजगद्दी मिली।
-नरेंद्र देवांगन

Share it
Share it
Share it
Top