बहरा बना रहे प्रेशर हॉर्न

बहरा बना रहे प्रेशर हॉर्न

देश के कई बड़े शहरों में ट्रैफिक रूल्स के खिलाफ सब वे कार्य हो रहे हैं जो नियमों के खिलाफ हैं। युवाओं और कुछ टशनखोरों ने ट्रैफिक नियमों का बैंड बजा रखा है। इसमें हेलमेट, आर.सी.बुक और ड्राइविंग लाइसेंस के बिना ड्राइविंग, ट्रिपल राइडिंग, नशे में ड्राइविंग, बिना नंबर प्लेट की गाड़ी, ओवर स्पीड गाड़ी और प्रेशर हॉर्न का उपयोग शामिल है।
नुकसानदायक प्रेशर हॉनर्:
बाकी चीजें तो ड्राइवर के लिए ही नुकसानदायक हैं लेकिन प्रेशर हॉर्न और हूटर ने सबका जीना दूभर कर दिया है। रोड पर सरसराती सैकड़ों बाइक, कार और अन्य खड़े वाहनों में तेज आवाज में बजने वाले हार्न, चीखने-चिल्लाने और डरावने अंदाज में बजने वाले हार्न और अभद्र गानों के टोन वाले प्रेशर हॉर्न से किसी की सांसें भी बंद हो सकती हैं। प्रेशर हॉर्न वाली गाडिय़ां सिग्नल, मार्केट और घर-मोहल्लों के बीच से होकर निकलती हैं तो एकाएक परेशानी बढ़ जाती है। लोग न चाहते हुए भी कष्टदायक ध्वनि को झेलते हैं।
कोर्ट के दिशा-निर्देश: कोर्ट के दिशा-निर्देश के अनुसार पूजा स्थलों, स्कूल, कॉलेज, ट्रेफिक सिग्नल व अस्पतालों के बाहर प्रेशर हॉर्न बजाना मना है। बावजूद इसके इन आदेशों का उल्लंघन हो रहा है।
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क्या है नियम, होता है क्या:
वाहन निर्माता कंपनी द्वारा निर्धारित डेसीबल के अनुसार ही संबंधित वाहन में हॉर्न लगाए जाते हैं लेकिन वाहन खरीदने के बाद लोग अपनी इच्छा के अनुसार बाजार से प्रेशर हॉर्न खरीदते हैं। बाजारों में नए वाहनों में नए लुक देने के लिए दर्जनों किस्म के प्रेशर हॉर्न उपलब्ध हैं जिनकी कीमत वाहन और हॉर्न की क्षमता के आधार पर अलग-अलग है।
यह है मापदंड:
० हॉर्न की क्षमता 80 डेसिबल से कम होनी चाहिए।
० प्रेशर हॉर्न और हूटर 110 से 115 डेसिबल के होते हैं।
ट्रैफिक पुलिस बेखबर: शहर की टै्रफिक पुलिस बाकी अन्य चीजों पर तो ध्यान देती है लेकिन जो सबसे ज्यादा नुकसानदेह है प्रेशर हॉर्न-हूटर, उस ओर उसका बिलकुल ध्यान नहीं है जबकि यह ध्वनि प्रदूषण और ट्रैफिक नियम के अनुसार गलत है।
बीमारियों की जड़: विशेषज्ञों का मानना है कि प्रेशर हॉर्न से कान, ब्लड प्रेशर और मानसिक बीमारियों में लगातार इजाफा हो रहा है। जॉब, स्टडी, घरेलू और अन्य कार्यों से लोगों को रोजाना टै्रफिक के झंझावातों से गुजरना पड़ता है।
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डॉक्टरों की राय:
० एमडी डॉ.आशीष दुबे कहते हैं कि लगातार प्रेशर हॉर्न के संपर्क में रहने से लोग मानसिक संतुलन खो रहे हैं। सिग्नल, दुकान और घरों के बीच जब लगातार हॉर्न के संपर्क में होते हैं तो चिड़चिड़ाहट और गुस्सा आने लगता है जिससे मानसिक स्थिति खराब होती है। इसके साथ ही तेज आवाज से ब्लड प्रेशर भी बढ़ता है। अचानक तेज सुनने से संतुलन बिगडऩे से एक्सीडेंट भी हो जाता है।
० ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. राकेश गुप्ता कहते हैं कि प्रेशर हॉर्न लगभग 11० डेसिबल के होते हैं जबकि सामान्य मनुष्य के कान की श्रवण क्षमता 25-30 डेसिबल होती है। इससे ज्यादा आवाज होने पर सुनाई देने वाली नस खराब होती है। कान में लगातार सीटी बजने की आवाज होने लगती है। लगातार सीटी बजने से हमेशा के लिए कान के सुनने की क्षमता खत्म हो सकती है। शासन को इस पर जल्द सख्त रोक लगानी चाहिए।
– नरेंद्र देवांगन

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