बरमूडा त्रिकोण का रहस्य खुला..1000 से ज्यादा लोगों की जा चुकी है जान

बरमूडा त्रिकोण का रहस्य खुला..1000 से ज्यादा लोगों की जा चुकी है जान

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नई दिल्ली । अभी तक रहस्य के कारण बने बरमूडा त्रिकोण की तस्वीरें अब साफ हो गई हैं। वैज्ञानिकों ने दशकों से अटलांटिक महासागर में वैज्ञानिकों के लिए रहस्य का कारण बने इस त्रिकोण की पहेली सुलझा लेने का दावा किया है। इस रहस्यमयी त्रिकोण ने अबतक तकरीबन 75 विमानों, 100 से ज्यादा जहाजों को को अपनी ओर खींच लिया था जिनकी कोई जानकारी नहीं मिली। इसमें तकरीबन 1000 से ज्यादा लोगों की जाने भी चली गर्इं थीं। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि हेक्सागोनल बादल की वजह से वहां ऐसी हरकतें होती हैं। इस मसले पर शोध कर चुके कुछ लेखकों ने कहा कि इसकी परिधि फ्लोरिडा, बहमास, सम्पूर्ण केरेबियन द्वीप तथा महासागर के उत्तरी हिस्से तक फैली है। इस इलाके से रोजाना कई जहाज निकलते हैं। यह दुनिया के सबसे व्यस्ततम समुद्री यातायात जलमार्ग है।
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गत 100 साल में बरमूडा त्रिकोण के आसपास करीब 100  से ज्यादा छोटे-बड़े पानी के जहाज गायब हुए हैं जिन पर सवार 1000 से ज्यादा लोग कभी वापस नहीं आए। कई लोगों ने इस रहस्य की वजह से वहां एलियन होने की भी आशंका जाहिर की थी। वैज्ञानिकों ने इन बादलों को बेहद शक्तिशाली करार दिया था। ये हवा में एक बम विस्फोट की मौजूदगी के बराबर शक्ति रखते हैं और इनके साथ 170 मील प्रति घंटा की तेजी वाली हवाएं होती हैं। ये बादल और हवाएं मिलकर पानी और हवा में मौजूद जहाजों से टकराते हैं जो फिर कभी नहीं मिलते। 50,0000 वर्ग किलोमीटर में फैला ये इलाका पिछले कई दशकों से बेहद खतरनाक रहा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक मौसम की चरम अवस्था की वजह से उपजी बेहद तेज ऱफ्तार वाली हवाएं ही ऐसे बादलों को जन्म देती हैं। ये बादल देखने में बेहद अजीब होते हैं। एक बादल का दायरा कम से कम 45 फीट तक होता है। इनके भीतर एक बेहद शक्तिशाली बम से भी ज्यादा ऊर्जा होती है।
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मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक ये बादल ही बम विस्फोट जैसी स्थिति पैदा करते हैं जिससे इनके आस-पास की सभी ची़जें बर्बाद हो जाती हैं। ये हवाएं इन बड़े-बड़े बादलों का निर्माण करती हैं जो एक विस्फोट की तरह समुद्र के पानी से टकराते हैं और सुनामी से भी ऊंची लहरें पैदा करते हैं जो आपस में टकराकर और ज्यादा ऊर्जा पैदा करती हैं। इस दौरान ये अपने आस-पास मौजूद सब कुछ बर्बाद कर देते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक ये बादल बरमूडा आइलैंड के दक्षिणी छोर पर पैदा होते हैं और फिर करीब 20 से 55 मील का स़फर तय करते हैं। गौरतलब है कि सदियों से चर्चा का विषय रहे इस त्रिकोण के क्षेत्रफल को लेकर भी तरह-तरह की बातें कही और लिखी गई हैं।आप ये ख़बरें और ज्यादा पढना चाहते है तो दैनिक रॉयल unnamed
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