बड़ी नक्सली घटनाओं का इतिहास

बड़ी नक्सली घटनाओं का इतिहास

 बस्तर में अब तक हुए नक्सली हिंसा की बड़ी घटनाओं का इतिहास इस प्रकार है। 11 मार्च 2017 को सुकमा जिले में इंजरम-भेज्जी मार्ग निर्माण को सुरक्षा प्रदान करने रवाना की गई, सीआरपीएफ 219वीं बटालियन की पार्टी से कोत्ताचेरू ग्राम में हुई मुठभेड़ में सीआरपीएफ के 12 जवान शहीद एवं तीन अन्य गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे, उस वक्त भी नक्सली शहीद जवानों के हथियार लूटकर ले गए थे।
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वहीं, 30 मार्च 16 को दंतेवाड़ा के मैलावाड़ा में आईईडी विस्फोट में सीआरपीएफ के सात जवान शहीद हुए थे। 25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले से परिवर्तन यात्रा से लौट रहे कांग्रेसियों के काफिले पर जीरम घाट में घात लगाए नक्सलियों ने दरभा घाट में बारूदी सुरंग विस्फोट कर फायरिंग कर दी थी। जिसमें कांग्रेसी समेत 28 लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा था। इस घटना में नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा समेत वरिष्ठ कांग्रेसी विद्याचरण शुक्ल, नंद कुमार पटेल का असवान हुआ था।
फिर, 12 मई 2012 को सुकमा के दूरसंचार केंद्र पर हमला, 4 जवान शहीद। जून 2011 को दंतेवाड़ा जिले के अरनपुर थाना क्षेत्र में माओवादियों ने बारूदी सुरंग में विस्फोट कर लैंड माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल को उड़ा दिया था, जिसमें 10 शहीद हुए थे। 16 अप्रैल 2010 को ताड़मेटला में भीषण नरसंहार कर सीआरपीएफ के जवानों को बारूदी सुरंग लगाकर उड़ाया तत्पश्चात फायरिंग की, मुठभेड़ मेंं 76 जवान शहीद हुए थे। 26 अप्रैल 2010 को बीजापुर जिले की घाटी में बारूदी सुरंग विस्फोट में 7 जवानों को प्राणों की आहुति देनी पड़ी।
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17 मई 2010 में जवान अश्वनी राजकुमार ट्रेवल्स की बस में सवार होकर दंतेवाड़ा से सुकमा के लिए रवाना हुए थे। गादीरास थाने से आगे ग्राम सिंगावरम गांव के निकट नक्सलियों ने बारूदी सुरंग विस्फोट कर दिया। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि बस के परखच्चे उड़ गए और 12 पुलिस अधिकारियों सहित 36 लोगों की समाधि बनी थी।
इस क्रम में 29 जून 2010 में नारायणपुर जिले के धौड़ाई में सीआरपीएफ के जवानों पर नक्सलियों ने घात लगाकर हमला किया, जिसमें 27 जवान को प्राणों से हाथ धोना पड़ा था। 15 मार्च 2007 में बीजापुर के रानीबोदली में पुलिस कैंप पर हमला। घटना में पुलिस के 55 जवान कर्तव्य की बलिवेदी पर न्यौछावर हुए। नौ जुलाई 2007 में एर्राबोर के उरपलमेटा में सीआरपीएफ के जवानों पर हुए हिंसक हमले में 23 पुलिस कर्मी देश के लिए कुर्बान हुए।

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