बच्चों में बढ़ रहा है हार्ट अटैक..!

बच्चों में बढ़ रहा है हार्ट अटैक..!

चिंताओं व तनाव से दूर रहने वाला बचपन हार्ट अटैक के घेरे में है। अत्याधुनिक लाइफ स्टाइल के कारण हार्ट अटैक की बीमारी बच्चों पर अटैक कर रही है।
खेलने कूदने की उम्र में हार्टअटैक, सहसा विश्वास नहीं होता लेकिन आजकल इसने खौफनाक रूप धारण कर लिया है। पढ़ाई की टेंशन, परीक्षा का खौफ और अच्छे करियर को पाने की तमन्ना के कारण बच्चे इसके घेरे में आ रहे हैं।
चिकित्सकों के अनुसार तनाव रहित शांत माहौल देकर ही बच्चे का विकास किया जा सकता है। भविष्य की चिंता को लेकर बच्चे छोटी उम्र में जबरदस्त तनाव में हैं। अच्छे अंक पाने के लिये बच्चे जी तोड़ मेहनत करते हैं। प्रतिस्पर्धा को महसूस करने के कारण दबाव में आते हैं। दबाव के कारण तनाव व सिरदर्द के अलावा हारमोनल डिस्बैलेंस की समस्या अक्सर बच्चों में सुनने को आती रहती है।
देश में हुए एक चिकित्सकीय सर्वेक्षण के अनुसार 10-15 साल की उम्र के बच्चों में हार्ट अटैक के लक्षण मिले हैं। अपने नौनिहालों पर इस जटिल बीमारी के हमले से समूचा चिकित्सा जगत हैरान है। चिकित्सकों के अनुसार कृषि में प्रयोग होने वाले जहरीले हानिकारक रासायनिक खाद, खेल-कूद की गतिविधियों में भारी कमी और बचपन से ही दवाइयां लेने की प्रकृति ने बच्चों के स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित किया है।
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बच्चों में दिल की बीमारी ने पूरी पीढ़ी पर खतरे को इंगित किया है। जंक फूड, फास्ट फूड कल्चर, तनाव दर तनाव और युवाओं में करियर को लेकर असुरक्षा की भावना ने बच्चों को भी वृद्ध बना दिया है।
ऐसे में अभिभावकों को बच्चों के करियर के साथ-साथ शारीरिक विकास और खेलकूद पर भी ध्यान देना चाहिए। बच्चों के जीवन में पोषण वृद्धि व विकास अति महत्त्वपूर्ण चरण हैं। साथ ही खानपान में भी तले-भुने खाने की जगह सादे खान पान को तरजीह देनी चाहिए। बचपन से ही बच्चों को भविष्य की डरावनी तस्वीर दिखाकर डराने की जगह पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। चिंता, तनाव, कुपोषण, हताशा, डर, बच्चों के भविष्य के लिए डरावनी तस्वीरें हैं। अभिभावकों को बच्चों के रहन सहन, खान पान, दिनचर्या जीवन शैली पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
बाल कथा: मुफ्त का काम

माता-पिता को चाहिए कि परिवार में बच्चों के साथ अच्छी बातें शेयर करें। उन्हें घर के तनाव से दूर रखें। उनके मनोरंजन का पूर्ण ध्यान रखें, पिकनिक आदि पर ले जायें। घर में समाचार पत्र, पत्रिकाएं मंगवायें और उन्हें पढऩे के लिए प्रेरित करें।
– संजीव चौधरी ‘गोल्डी’

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