बच्चों का ज्यादा टी.वी. देखना है हानिकारक…आंखों की मांसपेशियों पर पड़ता है बुरा असर

बच्चों का ज्यादा टी.वी. देखना है हानिकारक…आंखों की मांसपेशियों पर पड़ता है बुरा असर

 दृष्टिपूर्णता एवं मांसपेशियों की शक्ति की दृष्टि से उनका पूर्ण विकास पांच साल की उम्र तक ही हो पाता है, इसलिए छोटे बच्चों को दृष्टि थकान से बचाना चाहिए।
बच्चों के स्वास्थ्य पर टी. वी. का बेहद बुरा असर पड़ रहा है। यह इसी से जाहिर हो जाता है कि आजकल अधिकतर छोटी उम्र के बच्चों की आंखों पर चश्मे लगने लगे हैं। बच्चों की आंखें उनके शरीर के अन्य अंगों के समान ही बेहद कोमल व संवेदनशील होती हैं। अत: आंखों को जब अपनी शक्ति से अधिक काम करना पड़ता है तो वे थक जाती हैं।
बच्चे जब अधिक देर तक टी. वी. देखते हैं तो उनकी आंखों की मांसपेशियों पर इनका प्रतिकूल असर होता है। टी. वी. से संबंधित एहतियात बरतकर तथा जब टी. वी. देख रहे हों, उस समय कुछ मुख्य सावधानियों को ध्यान में रखकर आप बच्चों को टी.वी. से होने वाले प्रतिकूल प्रभाव से बचा सकती हैं।
यदि बच्चे टी. वी. टकटकी लगाकर अधिक समय तक देखते हैं तो आंखों पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ता है। इसलिए बच्चे जहां टी.वी. देखते हैं, वह कमरा टी. वी. की स्क्रीन से बीस गुना बड़ा होना चाहिए।
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प्राय: अधिकतर घरों के कमरे छोटे होते हैं, अत: टी. वी. सेट भी छोटे साइज का लेना ही उचित रहता है।
अक्सर बच्चे तिरछे बैठकर या जमीन पर बैठकर सिर ऊपर उठाकर टी. वी. देखते हैं। इससे आंखों पर बुरा असर पड़ता है। इसके लिए हमेशा प्रोग्राम देख रहे बच्चे व टी. वी. का उपकरण एक ही स्तर पर होना चाहिए।
टी. वी. देखते समय कमरे में अंधेरा नहीं रखना चाहिए क्योंकि टी. वी. के प्रकाश तथा वातावरण के अंधकार के कारण जो विपरीत प्रभाव उत्पन्न होगा उससे आंखों पर अधिक दबाव पड़ेगा इसलिए टी. वी. देखते समय टी. वी. के प्रकाश के अलावा ट्यूब लाइट वगैरह भी जरूर जलाए रखें।
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एक बात का और ध्यान रखें कि वह प्रकाश टी. वी. के स्क्रीन और देखने वाले पर सीधे न पड़े। टी. वी. पर दृश्य ठीक से न आ रहा हो या कार्यक्रम स्पष्ट दिखाई न दे रहा हो तो टी. वी. न देखें। कभी भी बच्चों को टी. वी. लगातार न देखने दें। कार्यक्रम के बीच में विज्ञापन आदि के समय बच्चों को जरा टहलने या इधर-उधर कुछ करने के लिए कहें। आप उन्हें थोड़ी देर के लिए आंखें बंद करने के लिए भी कह सकते हैं।
छोटे बच्चों को एक-डेढ़ घंटे से ज्यादा टी. वी. न देखने दें। इस बात का भी विशेष ध्यान दें कि रंगीन या धुंधले शीशे का चश्मा लगाकर बच्चे टी. वी. न देखने पाएं।
टी. वी. का केबिनेट लेते समय इस बात का ध्यान अवश्य रखा जाना चाहिए कि वह किसी धातु या किसी चमकीली सतह का न बना हो क्योंकि इसकी चमक आंखों को नुक्सान पहुंचाती है।
– कर्मवीर अनुरागी

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