बच्चे जब पूछें – क्या, क्यों और कैसे…?

बच्चे जब पूछें – क्या, क्यों और कैसे…?

 उस दिन मेरे छोटे देवर की शादी हुई थी। भाभी होने के नाते दुल्हन की सुहाग की सेज और उन दोनों की मुलाकात की सारी व्यवस्था मुझे ही करनी थी। नई-नई आई देवरानी को लेकर मैं जैसे ही कमरे में घुसी, वैसे ही मेरा 10 वर्षीय बेटा मिन्टू जिद करने लगा कि आज मैं अपनी नई चाची के साथ सोऊंगा। बड़ी मुश्किल से उस दिन उसे मैं समझा पाई थी।
उसके दूसरे दिन मिन्टू रसोई में आकर मुझसे बोला-‘मम्मी, चाचा और चाची कमरे में बंद क्यों थे? ‘मैं सन्न रह गईं। कोई जवाब न सूझा, बस इतना ही बोल पाई ”बेटा, उनकी अभी नई शादी हुई है। ढेर सारी बातें करनी हैं उनको। एक दिन वह पूछ बैठा मम्मी- आदमी मरता क्यों है? क्या हम सब भी मर जायेंगे? मैंने उसे डांटा था।
ऐसे ही न जाने कितने सवाल जैसे-धर्म क्या है? बच्चे कहां से आते हैं? तारे कहां छुप जाते हैं? आदि। माता-पिता या अन्य बड़े लोग उनकी बातें सुनकर अचम्भा करते हैं और पीछा छुड़ाने के लिए कुछ भी जवाब देते रहते हैं।
बच्चों का क्या, क्यों और कैसे का सिलसिला कभी-कभी इतना लंबा खिंच जाता है कि माता-पिता परेशान हो उठते हैं। कुछ माता-पिता बच्चों द्वारा इस प्रकार के जिज्ञासायुक्त सवाल पूछने पर लंबी-चौड़ी डांट-फटकार लगाते हैं और बच्चों को जवाब मिलता है, ‘चुप हो जा बहुत बोलने लगा है आजकल’, मगर ऐसे माता-पिता शायद यह नहीं समझते कि बच्चों के मन में उठ रहे सवालों को दबाना इतना आसान नहीं है। जवाब आपसे मिला तो ठीक है अन्यथा वे अपनी जिज्ञासा को किसी अन्य माध्यम से पूरी करते हैं। अभिभावकों के सामने मुख्य प्रश्न यह उठता है कि आखिर कब और किस प्रश्न पर कितनी और कब जानकारी दें।
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सेक्स के विषय में बच्चों में उत्सुकता अधिक होती है। बच्चों द्वारा यह पूछने पर कि ‘शादी क्यों होती है?’, ‘मैं कहां से आया हूं?’ आदि का जवाब अभिभावक यह दे कर पीछा छुड़ा लेते हैं कि ‘बच्चों को भगवान भेजते हैं,’ नर्स ने दिया है, अस्पताल से लाये हैं आदि पर क्या यह सही है?
यह बात अलग है कि आप बच्चों को विस्तृत जानकारी नहीं दे सकते तो संक्षिप्त बता सकते हैं कि मम्मी-पापा एक दूसरे से बेहद प्यार करते हैं, इसलिए उन्होंने बच्चों को जन्म दिया। बच्चा घर में जो भी प्रश्न पूछता है उसका जबाव सही और इत्मीनान से दें भले ही वह संक्षिप्त हो। बात टालना या गलत जानकारी देना ठीक नहीं।
सेक्स के विषय में किशोर वय के बच्चों की जिज्ञासा अधिक रहती है। यदि आप उन्हें बता पाने में शर्म महसूस कर रही हों तो उन्हें कोई छोटी-मोटी संबंधित पुस्तक लाकर दे सकते हैं जिससे वे संक्षिप्त जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। वैसे यहां सेक्स संबंधी प्रश्न बच्चे द्वारा पूछने पर अभिभावक द्वारा आग बबूला हुआ देखा जाता है। यदि 10-12 वर्ष का बालक सेक्स संबंधी प्रश्न माता-पिता से पूछता है तो माता-पिता द्वारा उसे चुप करा दिया जाता है।
सेक्स ऐसा विषय है जिसके बारे में 10-12 वर्ष का बालक न तो संक्षिप्त रूप से समझ सकता है और न उसे किसी किताब के माध्यम से समझाया जा सकता है, अत: ऐसे मौकों पर उसे डांटकर या टालकर चुप कराना ही बेहतर है। यदि आपने उस वक्त उसकी जिज्ञासा को शांत करने की चेष्टा की तो समझो उलझ गये। यहां एक हल हो सकता है कि आप स्वयं बातचीत का रूख दूसरी ओर मोड़ दें और बच्चे का ध्यान किसी दूसरी ओर आकर्षित करें।
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ऐसे ही बच्चों को समय-समय पर बताएं कि शादी क्या होती है? लड़की शादी के बाद पराये घर क्यों चली जाती है? चरण स्पर्श करने से क्या होता है? जीवन की सच्चाई क्या है? पति-पत्नी के मध्य जब जरा-जरा सी बात पर झगड़ा होता रहता है तो उसका असर बच्चों पर भी पड़ता है, साथ ही कई ज्वलंत प्रश्न भी गूंजते हैं कि आखिर मम्मी-पापा क्यों लड़ते हैं? यहां उसे सही जानकारी देना जरूरी है।
घर या पास-पड़ोस में किसी की मृत्यु पर भी बच्चे कई तरह के प्रश्न करते हैं जैसे-आदमी मरता क्यों है? मर कर कहां जाता है? लोग उसे समझाते हैं कि भगवान ने उसे अपने घर बुला लिया है अत: वे भी वहां जाने की जिद करते हैं। यहां उसे प्रकृति के नियम समझाएं कि ऐसा सब के साथ होता है।
प्रश्न सभी बच्चे करते हैं, उन्हें हल आपको ही करना है पर शिक्षा नेक दें। कोई भी शिक्षा बुरी नहीं होती। आपके द्वारा दी गई मौखिक शिक्षा पर ही उनका भविष्य निर्भर करता है।
– राजू सिंह गुर्जर

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