बच्चे, खिलौने और बाजार का रिश्ता पुराना

बच्चे, खिलौने और बाजार का रिश्ता पुराना

बच्चों और खिलौनों का रिश्ता बहुत पुराना है। जी हां, खिलौनों से अच्छा साथी बच्चों का कोई हो ही नहीं सकता। आज भी बच्चे जब खिलौनों को देखते हैं तो उनकी आखों में चमक और होंठों पर मुस्कान बिखर जाती है। बदलते वक्त के साथ खिलौनों का बाजार भी काफी बड़ा हो गया है। पहले तो लोग गली गली घूम कर गाना गाते हुए खिलौने बेचा करते थे लेकिन अब ऐसा नजारा कम ही देखने को मिलता है। आज के इस दौर में हमें खिलौनों का अलग-अलग रूप देखने को मिल जाता है। आज जमाना टैडी बियर, बोलने वाली गुडिय़ा, रिमोट कंट्रोल वाली गाडिय़ां, शिक्षाप्रद गेम्स और मशीनरी बंदूकों का है लेकिन पहले के समय में ऐसे आधुनिक खिलौने नहीं आते थे। समय बदला। उसके साथ साथ लोग भी बदले क्योंकि जमाना हाईटेक का है। पहले खिलौने सिर्फ बच्चे ही पसंद करते थे लेकिन आज घरों को सजाने से लेकर गिफ्ट देने तक में खिलौनों का इस्तेमाल किया जाता है। आजकल तो साल भर खिलौनों का बाजार गर्म रहता है।
बच्चे को बच्चा समझें, मगर कब तक
 चूंकि दौर इलेक्ट्रानिक युग का है तो जाहिर है कि खिलौनों का आधुनिकीकरण कैसे पीछे रहता। अब तो इलेक्ट्रोनिक खिलौने ऐसे बनने लगे हैं जिसे देखकर ऐसा लगता है कि मानों अब वे जिंदा होकर बोलने लगेंगे जिन्हें देखकर बच्चे भी खुशी से झूमने लगते हैं। खिलौनों की दुनियां भी बड़ी अजीब दुनियां होती है जो सपनों की दुनियां की तरह लगती है
जब आप किसी रिश्तेदारी में अकेली हों…!
 लेकिन अब खिलौनों की दुनियां एक सपना नहीं बल्कि हकीकत हो गई है क्योंकि इन सपनों को साकार कर दिखाया कुछ देशों ने जिसमें चीन का नाम सबसे ऊपर है। पतंग से लेकर इलेक्ट्रानिक खिलौनों का बाजार बहुत विस्तृत रूप ले चुका है। आज के इस समय में हम जैसे भी खिलौनों की मांग करते हैं, वे हमें जल्दी ही मिल जाते हैं।
-विद्या रानी

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