फलों और सूखे मेवों द्वारा संभव है रोगोपचार

फलों और सूखे मेवों द्वारा संभव है रोगोपचार

शरीर के रोगों के लिए हमारा खान-पान और आचार-विचार ही जिम्मेदार है वरना प्रकृति ने मानवीय शरीर के गुण और स्वभाव को ध्यान में रखकर ही फलों, सब्जी, मसाले, द्रव्य और मेवों का उत्पादन किया है। वैज्ञानिक शोधों ने यह प्रमाणित किया है कि इन सब प्राकृतिक उत्पादों में भरपूर विटामिन, खनिज व एंटी बायोटेक मौजूद हैं। अत्यधिक मसालेदार, खट्टे व चिकनाईयुक्त भोजन स्वास्थ्य के शत्रु हैं।
सदा स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक है सप्ताह में एक दिन का उपवास, प्रात: एक घंटे का टहलना और मौसमी फलों का सेवन। अंकुरित अनाज, रसेदार दाल-सब्जी खानी चाहिए। दस मिनट का व्यायाम भी आवश्यक है। चार बादाम, चार मुनक्के, चार काली मिर्च रात पानी में भिगोकर सबेरे चबाकर खाने से और ऊपर से कुनकुना दूध पीने से दिमाग व दृष्टि को बहुत फायदा पहुंचाता है।
काजू ह्नदय की दुर्बलता व स्मरण शक्ति तथा भूख बढ़ाता है। इसमें प्रोटीन 21 प्रतिशत, कार्बोहाइड्रेटस 22 प्रतिशत और विटामिन ए.बी.काम्पलेक्स होते हैं। बादाम पौष्टिक मेवा है। यह दिमागी कमजोरी के साथ-साथ तोतलापन भी दूर करता है।
चिरौंजीदाना बलवद्र्धक, वीर्यवद्र्धक तथा कमजोरी में सेवन योग्य है। अखरोट के साथ मुनक्का मिलाकर खाने से शरीर में शक्ति बढ़ती है। चूंकि अखरोट का आकर दिमाग के आकार का है, इसका तात्पर्य है कि यह दिमाग की कमजोरी दूर करता है।
अंजीर बीजों वाला मेवा है। यह कश्मीर, पंजाब तथा दक्षिण भारत में अधिक पैदा होता है। यह रक्त विकार तथा कब्ज को दूर करता है। यह पथरी गलाने वाला है। दो अंजीर चार-चार टुकड़े करके शाम को पानी में डाल दे और सुबह इन टुकड़ों को पानी से निकाल कर खूब चबाकर खाना चाहिए खाली पेट। इसी प्रकार सवेरे भी दो अंजीर पानी में भिगोकर शाम को खाना है। दस-पंद्रह दिनों में पथरी गल जाती है और रोगी को राहत मिलती है। कब्जियत में भी यह प्रयोग लाभकारी है। अंजीर में मिनरल्स, कैल्शियम, फास्फोरस, लौह तत्व, ए.बी.सी. विटामिन युक्त है।
छुहारा खजूर का सूखा हुआ रूप है। यह खांसी, बुखार, अतिसार, दमा तथा मद्यसेवन से हुए रोगों को नष्ट करता है। इसमें 25 ग्राम प्रोटीन, 75 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 2 ग्राम खनिज है। रोज 2-4 छुआरे खाने से सर्दी-जुकाम जल्दी ठीक होता है। दुबले-पतले बच्चों को 2-4 छुहारे दूध के साथ देने से तंदुरूस्ती आती है।
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तिल से तिल्ली तेल निकलता है। तिल त्वचा के लिए हितकारी है। यह स्तनों में दूध बढ़ाने वाला और दांतों को मजबूत बनाने वाला है। जो बच्चे बिस्तर गीला कर देते हैं, उन्हें दो माह तक तिल के लड्डू खिलाये। दो चम्मच तिल मक्खन में पीसकर सेवन करने से बवासीर और कब्ज में लाभ होता है।
केसर कश्मीर में अधिक पैदा होता है। दूध के साथ केसर घोलकर पीने से स्नायविक दुर्बलता व हाईपरटेंशन (रक्तचाप) ठीक होता है। केसर को दूध में घोलकर पीने से सर्दी-जुकाम, खांसी में आराम मिलता है। सर्दियों में इसका सेवन लाभप्रद है क्योंकि इसकी प्रकृति गरम है।
गूलर महाराष्ट्र में बहुतायत में पाया जाता है। भगवान दत्तात्रेय का निवास गूलर के वृक्ष में माना जाता है। मधुमेह में गूलर के कोमल पत्तों का रस 20 मि.ली शहद में मिलाकर 2-3 बार पीने से शर्करा की मात्रा कम हो जाती है।
सेब कश्मीर व हिमाचल में पैदा होता है। सेब के बारे में कहा जाता है कि जो व्यक्ति प्रतिदिन एक सेब खाता है उसे डॉक्टर के पास नहीं जाना पड़ता। विटामिन ए,बी,सी,सभी मिनरल्स (खनिज) इसमें होते है। जो एक सेब, एक गाजर रोज खायेगा, उसे कैंसर नहीं होता। सोने से पूर्व सेब के टुकड़े खाने से दांत खराब नहीं होते।
आंवले को ‘अमृत फल कहा जाता है और प्रतिदिन आंवला खाने से शरीर चुस्त दुरूस्त रहता है, विकार नहीं होते। आंवला में खनिज पदार्थ 1.7 प्रतिशत, फास्फोरस 0.75 प्रतिशत, कैल्शियम 0.1 प्रतिशत और 600 मि.ली.ग्राम विटामिन सी हर 100 ग्राम आंवला में होता है। आंवला, बुद्धि तेज करता है तथा शरीर की झुर्रियां कम करता है और पेट की गैस कम होती है।
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पपीते में विटामिन ए प्रचुर मात्रा में होता है। बच्चों को, बड़ों को, वृद्धों को पपीता अवश्य खाना चाहिए। यह पाचक है तथा भोजन के बाद खाने से भोजन पच जाता है। बच्चों में रतौंधी रोग (अंधेरे के समय न दिखना) ठीक हो जाता है।
आम फलों का राजा है। आम में विटामिन ए,बी,सी सभी मिलते हैं। रोज आम खाने से वजन बढ़ता है। आंखों की प्रतिकार शक्ति बढ़ाने में मददगार है। आम शक्तिवद्र्धक, खून बढ़ाने वाला होता है। इसके छिलके का चूर्ण दो दो ग्राम दिन में चार बार शहद के साथ लेने से बवासीर ठीक हो जाती है।
अमरूद में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। अमरूद खाने से पाचन अच्छा होता है, कब्जियत दूर होती है। प्रकृति ठंडी है।
अनन्नास (पाइनेपल) खट्टा मीठा होता है। अपचन में इसके टुकड़े खाने से लाभ होता है। पेट के लिए अनन्नास अमृततुल्य है। इसे खाने से आंत की बीमारी भी दूर होती है। केला सबसे सस्ता और सर्वत्र तथा हर समय मिलने वाला बारहमासी फल है। कार्बोहाइड्रेट प्रचुर मात्र में है, शक्तिवद्र्धक है। केला कद बढ़ाने में सहायक है इसलिए उन बच्चों को अवश्य खिलाना चाहिए जिनका कद कम है। इसकी प्रकृति ठंडी है, अत: शीत प्रकृति के लोगों को कम खाना चाहिए।
– आर.डी. अग्रवाल प्रेमी

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