फर्ज है वृद्ध माता-पिता की सेवा करना

फर्ज है वृद्ध माता-पिता की सेवा करना

कुछ वर्ष पहले हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा वृद्ध माता-पिता की सेवा करना कानूनी उत्तराधिकारियों के लिए कानूनन अनिवार्य करने संबंधी घोषणा की थी।
बच्चे जब बड़े हो जाते हैं तथा उनकी अपनी घर-गृहस्थी हो जाती है तो वे अपने बूढ़े माता-पिता से अलग रहना पसंद करते हैं जिससे उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्राता में कोई बाधा न पड़े। कुछ बेटे अपने माता पिता तथा अपने पद व प्रतिष्ठा की दूरी के कारण ऐसा व्यवहार करते हैं कि जैसे वे उनके माता पिता नहीं हैं। उन्हें अपने बूढ़े माता-पिता को अपना माता-पिता बताना शर्मनाक महसूस होता है।
बहुत से मामले हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में अक्सर प्रकाश में आते हैं जहां किसी उच्च अधिकारी बेटे से मिलने आए उसके पिता को उसकी भव्य कोठी के अंदर घुसने तक नहीं दिया गया। कई मामलों में बाद में अपनी सोसायटी के ऊंचे लोगों के समक्ष नौकर बताकर उनका अपमान भी किया गया।
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मेरे विचार में इसका मुख्य कारण गरीब मां बाप द्वारा अपने बच्चों की अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में शिक्षा दिलाना है। अधिकांश माता पिता अपने बच्चों के लिए बेहतर से बेहतर शिक्षा ग्रहण करने का प्रबंध करते हैं चाहे वे बेचारे स्वयं अल्पशिक्षित या अशिक्षित ही क्यों न हों।
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यहां तक कि गांवों के निवासी चाहे वे अनुसूचित जातियां जनजाति वर्ग के ही क्यों न हों, अधिकतर शिक्षा के महत्त्व से भली-भांति परिचित हो गये हैं तथा अपने बच्चों की उचित शिक्षा के प्रति सजग हैं।
-ञ्च एस. के. त्रिपाठी

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