प्रेम प्रसंगों में पहल बुरी नहीं…ध्यान रखें कहीं देर न हो जाए

प्रेम प्रसंगों में पहल बुरी नहीं…ध्यान रखें कहीं देर न हो जाए

pram-prsang क्या आपके दिल में भी कोई ‘सपनों की रानी या राजकुमार’ रहता है? वे आपके सामने ही होते हैं लेकिन आपके अंदर इतनी हिम्मत नहीं होती कि आप उनसे अपने दिल की बात कह सकें। हो सकता है कि सामने वाला (युवक या युवती) भी आपको पसंद करता हो और वह सोच रहा हो कि इस मामले में ‘पहल’ सर्वप्रथम आप करें।
कई मामलों में देखने को मिला है कि लड़का-लड़की दोनों एक दूसरे को पसंद करते थे और शादी जैसे पवित्र बंधन में बंधने के सुनहरे सपने देखते थे लेकिन धीरे-धीरे दिन, महीने, साल गुजर गये और उनके दिल की बात दिल ही में दबकर रह गई क्योंकि उनके अभिभावकों ने उनका रिश्ता कहीं और तय कर दिया। अपनी शादी के कई वर्ष बीत जाने के बाद आज भी वे पश्चाताप के आंसू बहाते हुए कहते हैं कि काश उस लड़के या लड़की से अपने दिल की बात कह दी होती तो आज वो हमारे होते। इसलिए मेरी राय मानें तो जब भी आप किसी से प्रेम करें तो उसका इजहार भी करें। ध्यान रखें कि कहीं देर न हो जाए।
क्या आप जानते हैं कि ‘प्रेम कैसे किया जाता है? अगर नहीं जानते तो हम आपको बताते हैं। जी हां, ‘प्रेम’ एक ऐसा मधुर अहसास है जो किया नहीं जाता, अपने आप हो जाता है। दूसरे रूप में ‘प्रेम’ एक ऐसा हथियार भी है जो दुनियां भर के जाति-धर्म, भाषा, रंगरूप का भेदभाव खत्म कर हम इंसानों को भाईचारा, एकता और ढेर सारी खुशियां प्रदान करता है लेकिन अफसोस इस बात का है कि आज के मॉडर्न जमाने में खासकर युवा वर्ग के कुछ लड़के लड़कियां ऐसे हैं जो अपने शर्मीले स्वभाव के कारण अथवा माता-पिता के डर से प्रेम प्रसंगों पर पहल करने में आज भी पीछे हैं। वे प्रेम प्रसंगों पर पहल करने से पूर्व कुछ इस तरह के विचार अपने मन में लाते हैं।
प्रेम पहल और लड़कों की सोच:-
– कुछ लड़कों का स्वभाव शर्मीला होता है। वे सोचते हैं कि मैं उस लड़की से अपने दिल की बात कैसे कहूं? अगर उसने इंकार कर दिया तो या फिर कुछ बुरा भला कहकर दो-चार लोगों को इकट्ठा कर लिया तो क्या होगा?
– कुछ लड़के संकोच या भयवश चुपके से अपनी दिल की बात किसी पत्र के माध्यम से बताते हैं क्योंकि प्रथम बार इस मामले पर बात करने से वो उस लड़की से डरते हैं। इतना ही नहीं, वे अपने प्रेम-पत्र को भेजने के लिए अपने किसी मित्र की ‘बहन या गर्लफ्रेंड’ को अपना माध्यम बनाते हैं तो इसमें उन्हें काफी हद तक कामयाबी भी मिल जाती है जब उनके पत्र के जवाब के रूप में लड़की हरी झंडी दिखा देती है।
– दूसरे पहलू पर ध्यान दें तो आप पायेंगे कि कुछ लड़के ऐसे भी हैं जिनके लिए प्रेम में पहल करना मामूली बात है क्योंकि वे अब तक प्रिया, पूजा, रेखा और न जाने कितनी लड़कियों से प्रेम प्रसंगों पर पहल कर चुके होते हैं। अगर उनको लड़की की तरफ से जवाब हां में मिला तो अपना तीर सही निशाने पर लगा समझकर खुश हो जाते है, लेकिन बावजूद इसके अगर उत्तर न में मिलता है तो ‘मंजिलें और भी हैं, की तर्ज पर आगे बढ़ जाते हैं। समाज के लोग इनको आवारा तथा मनचले युवक की संज्ञा देते हैं।
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प्रेम-पहल और लड़कियों के विचार:-
लड़कियों के लिए आज हालात में काफी बदलाव आये हैं। कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां वे बिंदास होकर कार्य करती हैं और लड़कों से कहीं आगे निकल जाती हैं परंतु ‘प्रेम’ में पहल कर पाने में आज भी बहुत पीछे हैं। कारण वे कुछ इस तरह सोचती हैं कि……।
– अगर लड़के ने न कर दी तो बेइज्जती हो जायेगी।
– लड़का सोचेगा कि लड़की कितनी बदतमीज है या बेशर्म है? अथवा हो सकता है कि पूरा परिवार ही बेशर्म हो।
– कितनी बातें, कितनी उंगलियां मुझ पर उठ जायेंगी जब लड़के के मां-बाप को पता चल जायेगा कि प्रेम में पहल लड़की ने की थी।
– लड़के के मां-बाप सोचेंगे कि हमारा लड़का तो बहुत ही सीधा-सादा था। वह तो इस लड़की ने अपने प्रेम जाल में फंसा लिया, बड़ी तेज लड़की है। इसका चरित्र अच्छा नहीं होगा।
आप इन सब बातों को छोडि़ए और ध्यान दीजिए, यदि आपको लगता है कि आपका ‘ब्वाय फ्रेंन्ड’ या कोई अन्य लड़का जो आपका प्यार पाने का हकदार हो सकता है, उसमें वे सारे गुण विद्यमान हैं जो एक अच्छे लड़के में होने चाहिए और वह संकोच या किसी भय से आपसे बात करने का साहस नहीं जुटा पा रहा है तो सर्वप्रथम आप ही बात करें। यह कदापि न सोचें कि मैं
लड़की होकर कैसे पहल करूँ?

कुछ लड़के-लड़कियां अभिभावकों के डर से भी पहल नहीं करते। मैं उनसे पूछता हूं कि अगर हमें कोई वस्तु अच्छी लगती है तो हम उसकी तारीफ कर देते हैं या उसे पाने की इच्छा करते हैं तो इसमें बुरा क्या है?
ठीक इसी तरह अगर कोई इंसान हमें अच्छा लगता है और उसे पाने की इच्छा पूरा नहीं हो पाती तो इसमें बेइज्जती वाली बात कहां है? कोई बुराई नहीं है कि आप मनचाहे युवक या युवती से अपने दिल की बात साफ कर लें। अगर उत्तर न में मिलता है तो क्या हुआ? कम से कम आपको आत्मसंतुष्टि तो होगी कि आप अपने मन की बात कहने का साहस जुटा पाये।
लोग क्या कहेंगे, इस बारे में आप क्यों सोचते हैं? क्या लोग आपसे पूछकर अपने संबंध बनाते हैं या आपको अपनी जि़दगी में कुछ मिल नहीं पाता तो ये लोग उस कमी को पूरा कर देते हैं? शायद नहीं! तो आप छोडिय़े लोगों की फिक्र क्योंकि लोगों का काम है कहना।
– मूलचंद विश्वकर्माआप ये ख़बरें अपने मोबाइल पर पढना चाहते है तो दैनिक रॉयलunnamed
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