प्रेम को न बनाएं मजाक

प्रेम को न बनाएं मजाक

आजकल राजधानी दिल्ली क्षेत्र में प्रेम करने वाले युवा जोड़ों की संख्या तकरीबन बढ़ती ही जा रही है, यह कहना शायद गलत साबित नहीं होगा। जिधर देखो वहीं जगह-जगह ये युवा जोड़े प्रेम की पींग बढ़ाते हुए अक्सर दिखाई देते हैं।
आलम यहां तक आ पहुंचा है कि यह प्रेमी युगल आज की तारीख में न सिर्फ गलियों में घूमते हुए देखे जा सकते हैं अपितु सड़कों के किनारे एकांत में बैठे हुए, पार्क की सीट पर लिपट कर बैठ हुए तथा पेड़ की ओट में छिपकर गुफ्तगू करते हुए, अलावा शहर के बीचोंबीच रेस्तरां, सिनेमाघर, स्कूल, कॉलेज, इत्यादि जगहों पर भी जमकर रोमांस करते हुए दिखलाई पड़ते हैं। मेट्रो स्टेशन और मॉल्स भी इनका प्रिय ठिकाना है।
यहां पर महत्त्वपूर्ण बात यह है कि यह प्रेमी युगल अपने प्रेम की तलाश कर उसे महसूस करते हुए न केवल खुल्लम खुल्ला प्रेम लीलाएं करके अपनी हसरतों को पूरा करने के लिए इन स्थानों का भरपूर उपयोग करते हैं बल्कि कभी-कभी मंदिर एवं सार्वजनिक स्थानों को भी निशाना बनाने से पीछे नहीं हटते हैं। निश्चित ही, यह सभी उपरोक्त स्थान शहर के अन्य सुलभ स्थानों की तुलना में कहीं अधिक सुन्दर व सुरक्षित है। तभी तो, इन युवा जोड़ों को भी यहां पर प्रेम करके आनन्द की अनुभूति उठाने में किसी तरह की कोई परेशानी नहीं महसूस होती है।
आज के इस बदलते दौर में युवा प्रेमियों द्वारा आए दिन शहरों के अन्दर खुले स्थानों पर खुलकर रोमांस करके हंगामा करना शहरी लोगों को कतई रास नहीं आता।
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उनके अनुसार, इस प्रकार के रोमांस रूपी प्रेम में गंभीरता कम व फूहड़ता अधिक दिखाई देती है जिससे प्रेम का अपमान होता है।
शायद यही वजह है कि दिल्लीवासियों को इस तरह का प्रेम एकमात्र मनोरंजन का साधन लगता है। तभी तो, इन युगल प्रेमियों को कई बार इस नाटक रूपी प्रेम की खातिर हंसी का पात्र बनना पड़ता है तो कभी उनके चरित्र पर सवालिया निशान अंकित कर दिया जाता है। यही नहीं, कई बार तो उन्हें लोगों के सम्मुख शर्मिन्दा तक होना पड़ता है।
हालांकि युगल प्रेमियों का इस तरह प्रेम करने को कोई अपराध तो नहीं कह सकते परन्तु प्रेमियों को हमेशा प्रेम करके रोमांस बढ़ाने से पहले उचित माहौल एवं स्थान का स्मरण रखना बेहद जरूरी है क्योंकि उनका रेस्तरां, पार्क, सिनेमाघर आदि जगहों पर प्रेम रूपी रोमांस करना तो कुछ समझ में आता है लेकिन दूसरी तरफ शहर के विभिन्न स्कूलों, कालेजों, मॉल्स यहां तक कि मैट्रो जैसे सार्वजनिक
स्थानों पर प्रेम की पींग बढ़ाना यकीनन अनुचित है जो प्रेम के नाम पर खिलवाड़ है।
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वास्तव में यदि आप प्रेम के नाम पर खुलकर रोमांस करने की इच्छा रखते हैं तो सर्वप्रथम अपने माता-पिता से मान्यता प्राप्त कर आशीर्वाद लें, फिर दूर कहीं जाकर एकांत में प्रेम लीलाएं रचायें तो कहीं ज्यादा बेहतर होगा। वैसे भी, असल में जीवन की सारी व्यवस्था का मूल सूत्र ही प्रेम का बोध है।
अंत में निष्कर्ष के तौर पर हम यहां कह सकते हैं कि अब युगल प्रेमियों को खुलेआम प्रेम लीलाएं रूपी नाटक करने की अपेक्षा अपनी मानसिक बुद्धि का विकास करके अपनी संकीर्ण सोच में परिवर्तन लाने के साथ-साथ लोगों के समक्ष मनोरंजन परोसने के बजाय अच्छे विचारों के आदान प्रदान के जरिए यथार्थ प्रेम की उपस्थिति दर्ज कराएं तो कहीं ज्यादा श्रेष्ठकर व दमदार साबित होगा।
यकीनन इससे जीवनसाथी को सच्चे प्रेम की एक अलग पहचान कराने में सफलता तो हासिल होगी ही, साथ ही भविष्य में यही प्रेम सौ फीसदी गतिमान भी सिद्ध होगा और तो और, लोगों को भी यह एकमात्र मनोरंजन का साधन मात्र न लगकर अपितु एक सच्चे प्रेम की अनुभूति का अहसास करायेगा। तब कहीं जाकर इस सम्पूर्ण शहर में प्रेम का वास्तविक सौन्दर्य दिखाई दे।
– अनूप मिश्रा

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