प्राण ऊर्जा का पर्व है दीपावली..ऋण मुक्ति का पर्व भी है दीपावली

प्राण ऊर्जा का पर्व है दीपावली..ऋण मुक्ति का पर्व भी है दीपावली

  artiकार्तिक मास की अमावस्या का महत्त्व भारतीयों और खासतौर पर उत्तरी भारतीयों से ज्यादा कौन जान सकता है। यह ही वह दिन होता है जब सब भारतीय अपने घरों, दुकानों ,आंगनों और आवासीय तथा व्यापारिक परिसरों को प्रकाश से सराबोर कर काली अमावस को भी सबसे ज्यादा प्रकाशवान बनाने का अद्भुत कारनामा कर अंधकार पर प्रकाश की जीत का परचम लहराते हैं।
जिस प्रकार दक्षिणी भारत में ओणम पर प्रकाश का साम्राज्य घोषित होता है, उसी प्रकार से दीपावली पर पूरा उत्तरी भारत रोशनी से नहा उठता है । दीपावली के पर्व को हिंदुओं का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है । इस दिन हर हिंदू अपनी सामर्थ्य के अनुसार अपने घर और व्यापारिक तथा आवासीय परिसर को रोशन करने का भरपूर प्रयास करता है और यथाशक्ति लक्ष्मीजी  को प्रसन्न करने का प्रयास भी करता है। इस दिन के बारे में यह एक आम धारणा है कि जो व्यक्ति आज के दिन कुछ धन या सम्पन्नता सूचक वस्तु प्राप्त कर लेता है उसे वर्ष पर्यन्त ही शुभ लाभ प्राप्त होता रहता है। शायद इसी वजह से आम भारतीय दीपावली के पर्व पर न केवल खरीदारी करता है अपितु येन केन प्रकारेण कुछ धन या वस्तु प्राप्त करने का पूरा पूरा प्रयास करता है । द्यूत या जुआ खेलना भी संभवत: इसी कारण से अस्तित्व में आया होगा। अब यह अलग बात है कि जुए को आज भी भारतीय समाज में हेय दृष्टि से ही देखा जाता है क्योंकि भारत एक ऐसा देश है जिसमें आज भी नैतिकता ओर अनैतिकता के बीच एक बड़ी और मोटी रेखा खिंची हुई है ।दीवाली भारत में केवल धन सम्पदा पाने के लिये ही नहीं मनाई जाती वरन् इसके मनाने के पीछे और भी कई कारण छिपे हुये हैं। अनेकों मान्यताओं के चलते किसी न किसी कारण से दीवाली मनाई जा रही है । कुछ लोग जहां मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के रावण को मारकर और सीता वापस जीतकर अयोध्या लौटने की खुशी में दीवाली मनाते हैं तो कुछ इस विश्वास के साथ दीवाली मनाते हैं कि इस दिन धन की देवी लक्ष्मीजी  पृथ्वी पर भ्रमण करने निकलती है और कलियुग में लक्ष्मीजी  के सिवा और किस का सहारा, सो लक्ष्मी मैया को प्रसन्न करने के लिये ही सही एक बड़ा वर्ग उनके स्वागत में प्रकाश बिखेरता है।
इतिहास भी दीवाली के महत्त्व को इस रूप में प्रतिपादित करता है कि इस दिन विक्रमी संवत् के प्रवर्तक महाराजा विक्रमादित्य ने सिंहासन पर आरूढ़ होकर अपने से पहले के प्रजा पर बकाया सारे ऋणों को माफ कर नये खाते लगवा दिये थे यानी कि ऋण से प्रतीकात्मक मुक्ति का पर्व भी है दीवाली।मिथकीय दृष्टि से भगवान ने महादानी, पर अहंकारी हो चले महाराजा बलि के अहंकार को चूर चूर करने के लिये आज के ही दिन उनके राज्य में पहुंचकर वामन रूप में उनसे केवल तीन गज जमीन लेने के बहाने से न केवल उनका सारा राज्य ही ले लिया था अपितु उन्हें भी बड़ी चतुराई से पृथ्वी लोक से सीधे पाताल लोक भेज कर पृथ्वी की राक्षसों से रक्षा की थी । इस नज़रिये से दीवाली रक्षापर्व भी हो जाता है।
यदि विज्ञान की दृष्टि से देखें तो बरसात के बाद वायुमण्डल में आये अनेकों कीट पतंगों को नष्ट करने के लिये वातावरण में पर्याप्त मात्रा में अग्नि यानी रोशनी का होना लाभदायक होता है, सो दीवाली विज्ञान के नजरिये से भी एक वैज्ञानिक पर्व ठहरता है। अध्यात्म के नजरिये से दीवाली अन्नमयकोश से प्राणमयकोश की तरफ प्रस्थान करवाती है जिससे मानव मुक्ति की तरफ कदम बढा़ता है और दैवीय ऊर्जा प्राप्त करने की तरफ कदम बढ़ाता है ।
अब किसी भी दृष्टि से देख लें। दीवाली हर दृष्टि से एक बहुत ही उपयोगी पर्व सिद्ध होता है। दीवाली का एक व्यावहारिक महत्त्व यह भी है कि दीवाली के अवसर पर अपने घर से दूर कार्यरत व्यक्ति भी किसी न तरह अपने परिवार से जुडऩे के लिये उसके पास किसी न किसी प्रकार पहुंच ही जाता है। इस प्रकार से  दीपावली बिछुड़े हुये लोगों को फिर से मिलाने का भी कार्य करती है । शायद इसी भाव को ध्यान में रखते हुये ही कविवर स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन ने कहा होगा;बिछुड़े दीपक फिर मिलते हैं
मिलकर मोद मनाते हैं
किस पर कब कैसी गुजरी
आपस में बतियाते हैं
अस्तु , किसी भी रूप में और चाहे कैसे भी मनाया जाये, कुल मिलाकर दीवाली है एक बहुत ही प्यारा और मनोहर त्योहार।
-घनश्याम बादल आप ये ख़बरें और ज्यादा पढना चाहते है तो दैनिक रॉयल unnamed
बुलेटिन की मोबाइलएप को डाउनलोड कीजिये….गूगल के प्लेस्टोर में जाकर
royal bulletin
टाइप करे और एप डाउनलोड करे..आप हमारी हिंदी न्यूज़ वेबसाइटwww.royalbulletin.com
और अंग्रेजी news वेबसाइटwww.royalbulletin.in को भी लाइक करे..कृपया एप और साईट के बारे में info @royalbulletin.com पर अपने बहुमूल्य सुझाव भी दें… 

Share it
Top